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ओवरलोड ट्रकों पर अब और सख्ती, जुर्माना भरने के बाद भी नहीं मिलेगी आगे जाने की अनुमति

उत्तरप्रदेश। देश की सड़कों पर निर्धारित क्षमता से अधिक सामान लेकर दौड़ने वाले ट्रक और अन्य भारी वाहनों पर अब शिकंजा और कसने की तैयारी है। ओवरलोड पाए जाने वाले वाहन अब केवल अतिरिक्त टोल या जुर्माना भरकर आगे नहीं जा सकेंगे। ऐसे वाहनों को मौके पर ही रोक दिया जाएगा और अतिरिक्त भार उतारने के बाद दोबारा वजन कराया जाएगा। वजन निर्धारित सीमा के भीतर आने पर ही वाहन को आगे जाने की अनुमति दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद टोल प्लाजा या सड़क पर जांच के दौरान कोई ट्रक अथवा भारी वाहन निर्धारित सीमा से ज्यादा भार लेकर चलता मिला तो उससे केवल जुर्माना वसूलना पर्याप्त नहीं होगा। वाहन को वहीं रोककर अतिरिक्त सामान उतरवाना होगा। इसके बाद वाहन का दोबारा वजन किया जाएगा। वजन नियमों के अनुसार मिलने पर ही उसे आगे की यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी।
अभी कई स्थानों पर ओवरलोड वाहनों से अतिरिक्त शुल्क या जुर्माना वसूलने के बाद उन्हें आगे जाने दिए जाने की स्थिति सामने आती है। इससे वाहन मालिक और चालक जुर्माना चुकाने के बावजूद अतिरिक्त भार के साथ यात्रा जारी रखते हैं। नई व्यवस्था का उद्देश्य इसी स्थिति पर रोक लगाना है। जुर्माना भरने को ओवरलोड वाहन के आगे जाने की अनुमति के रूप में नहीं देखा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद संबंधित एजेंसियों को ओवरलोडिंग रोकने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा। सड़क परिवहन व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों और टोल प्लाजा पर तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ सकती है। वाहन के वजन की जांच के बाद यदि वह निर्धारित क्षमता से अधिक पाया जाता है तो उसे तत्काल आगे बढ़ने से रोका जाएगा।
ओवरलोडिंग लंबे समय से सड़क परिवहन से जुड़ी बड़ी समस्या रही है। निर्धारित क्षमता से ज्यादा सामान लेकर चलने वाले भारी वाहन सड़कों और पुलों पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। ऐसे वाहनों के कारण सड़क की सतह को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बढ़ जाती है। इसके अलावा भारी और असंतुलित भार वाहन को नियंत्रित करने में चालक के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
नई व्यवस्था में वजन जांच की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। टोल प्लाजा या निर्धारित जांच स्थल पर भारी वाहनों का वजन किया जाएगा। यदि किसी वाहन का वजन निर्धारित सीमा से ज्यादा निकलता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार अतिरिक्त टोल या जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद भी वाहन को तुरंत आगे जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।
चालक या वाहन संचालक को अतिरिक्त सामान उतरवाना होगा। भार कम किए जाने के बाद वाहन को फिर से वजन मशीन पर ले जाना होगा। दूसरी बार जांच में वाहन का वजन निर्धारित सीमा के भीतर पाया गया तभी उसे आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी। इस तरह ओवरलोडिंग के खिलाफ जुर्माने के साथ-साथ मौके पर ही वास्तविक भार कम कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
इस फैसले से माल परिवहन करने वाले वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों को भी अपने वाहनों में सामान लोड करते समय निर्धारित वजन सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा। क्षमता से अधिक सामान भरकर वाहन भेजने की स्थिति में रास्ते में वाहन रोका जा सकता है। इससे माल की डिलीवरी में देरी के साथ अतिरिक्त खर्च का सामना भी करना पड़ सकता है।
व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए टोल प्लाजा और अन्य जांच स्थलों पर वजन मापने की सुविधाओं का इस्तेमाल महत्वपूर्ण रहेगा। संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वजन की जांच सही तरीके से हो और ओवरलोड पाए गए वाहन अतिरिक्त भार कम किए बिना आगे न निकल सकें।
ओवरलोड वाहनों पर सख्ती का सीधा असर सड़क सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। अधिक भार के कारण ट्रक और अन्य भारी वाहनों की ब्रेकिंग क्षमता तथा नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। अचानक ब्रेक लगाने या मोड़ के दौरान अधिक भार वाले वाहन के असंतुलित होने का खतरा रहता है। ऐसे में निर्धारित क्षमता के अनुसार माल ढुलाई सुनिश्चित करने से जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
सड़क और पुलों की सुरक्षा के लिहाज से भी ओवरलोडिंग पर नियंत्रण जरूरी माना जाता है। भारी वाहनों के लिए वजन की सीमा सड़क और वाहन की क्षमता को ध्यान में रखकर तय की जाती है। लगातार ओवरलोड वाहनों की आवाजाही होने से सड़क के जल्दी खराब होने और रखरखाव का खर्च बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यही होगा कि जुर्माना भरना ओवरलोडिंग जारी रखने का रास्ता नहीं बनेगा। यदि किसी वाहन पर निर्धारित सीमा से ज्यादा भार है तो उसे कम करना ही पड़ेगा। अतिरिक्त भार उतारने और दोबारा वजन कराने के बाद ही वाहन अपनी यात्रा जारी रख सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने पर देशभर में ओवरलोड ट्रकों और भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण बढ़ सकता है। इससे ट्रांसपोर्टरों को पहले से ही वजन सीमा का पालन करना होगा और वाहन चालकों को भी जांच के दौरान नियमों का पालन सुनिश्चित करना पड़ेगा।
फिलहाल संबंधित स्तर पर व्यवस्था को प्रभावी बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात सामने आई है। इसके लागू होने के बाद ओवरलोड वाहन चालकों के लिए केवल जुर्माना या अतिरिक्त टोल देकर निकल जाना संभव नहीं होगा। वाहन तभी आगे जा सकेगा जब उसका अतिरिक्त भार उतार दिया जाए और दोबारा जांच में वजन निर्धारित सीमा के भीतर पाया जाए।





