उत्तर प्रदेश

यूपी में फॉर्म-7 को लेकर सख्ती, गलत जानकारी पर जेल

Rajeshwari Nishad
18 Oct 2026 2:49 PM IST
यूपी में फॉर्म-7 को लेकर सख्ती, गलत जानकारी पर जेल
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से किसी का नाम हटवाने के लिए गलत जानकारी देना अब भारी पड़ सकता है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के तहत मिलने वाली आपत्तियों की जांच निर्वाचन आयोग के निर्धारित नियमों के अनुसार की जाए। यदि जांच में कोई आपत्ति गलत, झूठी या मनगढ़ंत पाई जाती है, तो संबंधित आवेदक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। नियमों के तहत दोषी पाए जाने पर एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।
निर्वाचन विभाग के इस निर्देश का उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाए रखना है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी है कि किसी योग्य मतदाता का नाम गलत जानकारी या जानबूझकर की गई शिकायत के आधार पर सूची से न हटाया जाए। अधिकारियों को आपत्तियों की जांच करते समय तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है फॉर्म-7 और इसका इस्तेमाल कब होता है?
निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया में फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम को हटाने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग निर्धारित परिस्थितियों में किया जा सकता है, जैसे किसी मतदाता की मृत्यु हो जाने, संबंधित पते पर सामान्य निवास न होने या मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज होने जैसी स्थिति में।
हालांकि, किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज कराने का मतलब यह नहीं है कि उसका नाम अपने आप सूची से हटा दिया जाएगा। संबंधित निर्वाचन अधिकारी को आवेदन और उसमें दिए गए कारणों की जांच करनी होती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जा सकता है।
इसलिए फॉर्म-7 भरने वाले व्यक्ति के लिए जरूरी है कि वह आवेदन में सही जानकारी दे और अपनी आपत्ति के समर्थन में उपलब्ध तथ्यों को स्पष्ट रूप से बताए। केवल किसी से व्यक्तिगत नाराजगी, राजनीतिक मतभेद या किसी अन्य अनुचित उद्देश्य के कारण मतदाता का नाम हटवाने की कोशिश करना गंभीर मामला बन सकता है, खासकर जब आवेदन में जानबूझकर गलत जानकारी दी गई हो।
झूठी शिकायत करने पर क्या होगी सजा?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के निर्देशों के मुताबिक, फॉर्म-7 के तहत दर्ज आपत्तियों की जांच निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार की जाएगी। यदि जांच में यह सामने आता है कि आवेदन में दी गई जानकारी गलत या मनगढ़ंत है, तो संबंधित आवेदक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
निर्देश में बताई गई सजा के तहत दोषी व्यक्ति को एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया का दुरुपयोग रोकना और गलत शिकायतों के जरिए किसी नागरिक के मतदान अधिकार को प्रभावित करने की कोशिशों पर अंकुश लगाना है।
हालांकि, किसी आवेदन में गलती मिलने और जानबूझकर झूठी जानकारी देने के बीच अंतर हो सकता है। इसलिए किसी आवेदक के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले संबंधित कानून के प्रावधानों और मामले के तथ्यों को देखना जरूरी होगा। अंतिम कार्रवाई सक्षम प्राधिकारी और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही की जाएगी।
जिला निर्वाचन अधिकारियों को जांच के निर्देश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को फॉर्म-7 के तहत प्राप्त आपत्तियों को गंभीरता से लेने और उनका नियमानुसार निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे केवल आवेदन मिलने के आधार पर किसी मतदाता का नाम हटाने का निर्णय न लें, बल्कि संबंधित मामले की जांच कर आवश्यक तथ्यों की पुष्टि करें।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। यदि किसी व्यक्ति का नाम गलत तरीके से हट जाता है, तो वह चुनाव में मतदान करने के अपने अधिकार से वंचित हो सकता है। दूसरी ओर, यदि मृत व्यक्ति या नियमों के तहत अपात्र प्रविष्टि सूची में बनी रहती है, तो मतदाता सूची की शुद्धता प्रभावित हो सकती है।
इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए आपत्तियों की जांच निष्पक्ष तरीके से करना जरूरी है। निर्वाचन अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सही शिकायतों पर उचित कार्रवाई हो और किसी योग्य मतदाता को गलत जानकारी के आधार पर नुकसान न पहुंचे।
मतदाता सूची में नाम की जांच करना क्यों जरूरी?
मतदाताओं के लिए भी जरूरी है कि वे समय-समय पर मतदाता सूची में अपना नाम और उससे संबंधित विवरण जांचते रहें। यदि नाम, पता या अन्य जानकारी में कोई त्रुटि है, तो निर्वाचन आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है।
इसी तरह, यदि किसी मतदाता को लगता है कि सूची में कोई प्रविष्टि गलत है, तो उसे संबंधित अधिकारी के सामने तथ्यात्मक आधार पर आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। आवेदन में अनुमान, अफवाह या जानबूझकर गलत जानकारी देने से बचना चाहिए।
मतदाता सूची में नाम शामिल होना चुनाव में मतदान करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति का नाम हटवाने के लिए आवेदन करने से पहले संबंधित नियमों और निर्धारित प्रक्रिया को समझना जरूरी है। यदि किसी मामले में संदेह हो, तो संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (BLO), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी या निर्वाचन विभाग से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
मतदाता सूची की पारदर्शिता पर जोर
उत्तर प्रदेश में फॉर्म-7 के तहत आने वाली आपत्तियों की जांच को लेकर जारी निर्देशों से स्पष्ट है कि
निर्वाचन
विभाग मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के साथ-साथ शिकायत प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने पर जोर दे रहा है। गलत जानकारी देकर किसी मतदाता का नाम हटवाने की कोशिश न केवल संबंधित व्यक्ति के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर सकती है।
ऐसे में आवेदन करने वाले नागरिकों को सही तथ्यों के आधार पर ही आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। वहीं, निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक मामले की जांच निष्पक्षता और निर्धारित नियमों के अनुरूप करें। इससे मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाने और योग्य नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा करने में मदद मिल सकती है।
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