उत्तर प्रदेश

राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव की हलचल

Kavita2
23 Sept 2026 10:10 AM IST
राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव की हलचल
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच अक्टूबर में दो महत्वपूर्ण चुनाव होने जा रहे हैं। एक तरफ प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होगा, वहीं दूसरी तरफ शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 विधान परिषद सीटों के लिए भी चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। चुनाव कार्यक्रम सामने आने के बाद भाजपा और समाजवादी पार्टी सहित अन्य राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

विधान परिषद चुनाव में समाजवादी पार्टी सभी 11 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। भाजपा ने अभी पांच सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं, जबकि छह सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान बाकी है। इन छह सीटों के लिए भाजपा के भीतर टिकट के दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है।

10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा। इनमें नौ सीटें मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने के कारण खाली हो रही हैं, जबकि एक सीट पूर्व सांसद दिनेश शर्मा के इस्तीफे के बाद पहले ही रिक्त हो चुकी है। शर्मा को अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है।

वर्तमान में इन 10 सीटों में आठ भाजपा, एक समाजवादी पार्टी और एक बहुजन समाज पार्टी के पास है। मौजूदा विधानसभा संख्या बल के आधार पर भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन आठ और सपा-कांग्रेस खेमे को दो सीटें मिलने का गणित बनता है। हालांकि मतदान की स्थिति में क्रॉस वोटिंग या अनुपस्थिति जैसे कारक अंतिम परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

विधानसभा में क्या है संख्या का गणित?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा के 256 विधायक हैं। सहयोगी दलों को मिलाकर भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की संख्या 292 है। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो विधायकों के समर्थन को भी जोड़ें तो यह संख्या 294 तक पहुंचती है। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के 101 विधायक हैं और कांग्रेस के दो विधायकों के साथ सपा-कांग्रेस खेमे की संख्या 103 है।

इसी संख्या बल के आधार पर राज्यसभा की सीटों का गणित तैयार किया जा रहा है। हालांकि उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा और नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुकाबले की वास्तविक तस्वीर ज्यादा स्पष्ट होगी।

विधान परिषद की 11 सीटों पर भी मुकाबला

राज्यसभा चुनाव के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर भी राजनीतिक मुकाबला देखने को मिलेगा। ये सीटें शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़ी हैं। पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी हैं। वहीं छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद हैं।

विधान परिषद चुनाव के लिए 29 सितंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होने की रिपोर्ट है। मतदान 23 अक्टूबर को और मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।

सपा ने सभी सीटों पर घोषित किए प्रत्याशी

समाजवादी पार्टी विधान परिषद चुनाव को लेकर भाजपा से पहले अपने उम्मीदवारों की सूची पूरी कर चुकी है। पार्टी ने चरणबद्ध तरीके से प्रत्याशियों के नाम घोषित किए और अब सभी 11 शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उसके उम्मीदवार तय हो चुके हैं।

इसके विपरीत भाजपा ने अब तक पांच प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं। बाकी छह सीटों पर उम्मीदवारों का फैसला होना बाकी है। इन्हीं सीटों पर अब पार्टी के भीतर दावेदारी बढ़ी है और अलग-अलग क्षेत्रों से कई नाम चर्चा में हैं।

भाजपा में छह टिकटों को लेकर बढ़ी दावेदारी

भाजपा की ओर से छह उम्मीदवारों की घोषणा बाकी होने के कारण टिकट के इच्छुक नेताओं और संगठनों से जुड़े दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता आधार सामान्य विधानसभा क्षेत्र से अलग होता है। ऐसे में राजनीतिक दल उम्मीदवार के स्थानीय संपर्क, संगठनात्मक पकड़ और संबंधित मतदाता वर्ग के बीच सक्रियता जैसे पहलुओं पर भी विचार करते हैं।

पार्टी की अंतिम सूची सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि भाजपा किन चेहरों को सपा के घोषित प्रत्याशियों के मुकाबले मैदान में उतारती है।

राज्यसभा चुनाव में BSP पर भी नजर

राज्यसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी की स्थिति भी चर्चा में है। BSP के राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। मौजूदा उत्तर प्रदेश विधानसभा में BSP का कोई विधायक नहीं है, इसलिए अपने संख्या बल पर राज्यसभा उम्मीदवार को निर्वाचित कराना संभव नहीं दिखता।

BSP का लोकसभा में भी कोई सदस्य नहीं है। ऐसे में रामजी गौतम का कार्यकाल पूरा होने और पार्टी की ओर से नया सदस्य नहीं चुने जाने की स्थिति में संसद के दोनों सदनों में BSP का प्रतिनिधित्व समाप्त हो जाएगा।

विधानसभा चुनाव से पहले अहम राजनीतिक गतिविधियां

राज्यसभा और विधान परिषद के चुनाव ऐसे समय हो रहे हैं जब उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इस वजह से अक्टूबर का चुनावी कार्यक्रम राजनीतिक दलों के लिए उम्मीदवार चयन, संगठनात्मक तैयारी और विधायकों तथा स्थानीय समर्थक समूहों के साथ तालमेल का अवसर भी बनेगा।

राज्यसभा चुनाव में विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, जबकि शिक्षक और स्नातक कोटे के विधान परिषद चुनाव का मतदाता आधार अलग है। इसलिए दोनों चुनावों में पार्टियों की रणनीति भी अलग-अलग दिखाई देगी।

फिलहाल सबसे अधिक नजर भाजपा के बाकी छह विधान परिषद प्रत्याशियों और राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची पर है। समाजवादी पार्टी विधान परिषद की सभी 11 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। आने वाले दिनों में भाजपा की बाकी सूची सामने आने के साथ ही मुकाबले की तस्वीर और साफ हो जाएगी।

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