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उत्तर प्रदेश
UP की राजनीति में हलचल, रालोद प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने दिया इस्तीफा
Ratna Netam
7 Aug 2026 4:05 PM IST

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) रामाशीष राय ने अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। माना जा रहा है कि आगामी चुनावों से पहले यह घटनाक्रम रालोद की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर असर डाल सकता है।
रामाशीष राय ने अपने इस्तीफे में सीधे तौर पर किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने पार्टी की दिशा और देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लोकतंत्र, संविधान, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए संकेत दिया कि वे मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से संतुष्ट नहीं हैं। उनके इस्तीफे के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि वह जल्द ही समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। कुछ राजनीतिक हलकों में उनके कांग्रेस में जाने की भी अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि उन्होंने अभी तक किसी दल में शामिल होने की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
अपने इस्तीफे में रामाशीष राय ने लिखा कि उन्होंने राजनीति की शुरुआत लोकनायक जयप्रकाश नारायण के ‘संपूर्ण क्रांति’ आंदोलन से प्रेरित होकर की थी। उनके अनुसार उस दौर में भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती जैसे मुद्दे राष्ट्रीय चिंता के केंद्र में थे। उनका कहना है कि व्यवस्था परिवर्तन का जो सपना उस समय देखा गया था, वह आज भी अधूरा नजर आता है।
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के प्रभाव में सिमटता दिखाई दे रहा है। समाज में जाति और संप्रदाय के आधार पर विभाजन की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक समरसता के लिए चिंताजनक है। उनके अनुसार किसान आज भी अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि नौजवान बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बढ़ती निराशा लोगों के भीतर असंतोष पैदा कर रही है।
रामाशीष राय ने अपने पत्र में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अटल जी ने वर्षों पहले राजनीति में बढ़ते धनबल और चुनावी व्यवस्था पर इसके प्रभाव को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया था। आज उनकी आशंकाएं काफी हद तक सही साबित होती दिखाई दे रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में वैचारिक प्रतिबद्धता की जगह आर्थिक ताकत और परिवारवाद का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंच रहा है।
उन्होंने सामाजिक समरसता पर भी चिंता जताई और कहा कि देश के महापुरुषों ने हमेशा “जाति तोड़ो, समाज जोड़ो” का संदेश दिया था, लेकिन आज सार्वजनिक जीवन में ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़ रहा है जो समाज को विभाजित करने का काम कर रहे हैं। यह प्रवृत्ति लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता दोनों के लिए नुकसानदायक है।
अपने इस्तीफे के अंत में रामाशीष राय ने लिखा कि संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हो रहे प्रहार से लोकतंत्र खतरे में है। उन्होंने कहा कि उनके लिए व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश है। इन्हीं नैतिक और वैचारिक कारणों से उन्होंने रालोद के प्रदेश अध्यक्ष पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले रालोद के एक वरिष्ठ नेता का इस्तीफा पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है। हाल ही में पार्टी ने अनुपम मिश्रा को कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष बनाया था, जिसके बाद से संगठन में बदलाव की चर्चाएं तेज थीं। अब रामाशीष राय के इस्तीफे ने इन चर्चाओं को और बल दे दिया है।
सूत्रों के अनुसार रामाशीष राय पूर्वांचल की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं और देवरिया क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। यदि वे किसी अन्य दल में शामिल होते हैं तो पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक समीकरणों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर उनके अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि चुनावी माहौल में उनका फैसला कई दलों की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।
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