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UP की दलित राजनीति में हलचल, चंद्रशेखर आजाद ने बढ़ाया दबाव

Saharanpur सहारनपुर : सहारनपुर, 12 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में एक बार फिर नए सियासी समीकरण बनने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और तीन बार प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती के सामने अब भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के संस्थापक तथा नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता चुनौती बनती नजर आ रही है। चंद्रशेखर की लगातार बढ़ती लोकप्रियता और दलित मुद्दों पर उनकी आक्रामक राजनीति ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।
2024 के लोकसभा चुनाव में चंद्रशेखर आजाद की सक्रियता और बसपा के कमजोर प्रदर्शन ने दलित वोट बैंक के बदलते रुझान को सामने ला दिया था। वहीं, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन ने दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग को साधने के लिए अपनी रणनीति को मजबूत किया और बड़ी सफलता हासिल की। इसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण पर फोकस बढ़ाया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दलित वोट बैंक में सेंधमारी की संभावना ने बसपा को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है। मायावती ने हाल ही में चंद्रशेखर आजाद पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह दलित उत्पीड़न और शोषण जैसे मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करते हैं। मायावती का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले वह चंद्रशेखर को लेकर अपेक्षाकृत शांत रुख अपनाती रही हैं।
सहारनपुर के छुटमलपुर क्षेत्र से निकलकर प्रदेश की राजनीति में पहचान बनाने वाले चंद्रशेखर आजाद अब दलित युवाओं के बीच अपनी अलग पकड़ बनाने में जुटे हैं। उनकी पार्टी आजाद समाज पार्टी लगातार संगठन विस्तार पर काम कर रही है। हालांकि, विपक्षी दलों के कुछ नेताओं की ओर से यह आरोप भी लगाए जाते रहे हैं कि सत्तारूढ़ भाजपा चंद्रशेखर की सक्रियता को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देती है, ताकि दलित वोटों का बंटवारा हो सके। हालांकि भाजपा की ओर से इन आरोपों को खारिज किया जाता रहा है।
इसी बीच मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर चंद्रशेखर आजाद की सक्रियता ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। चंद्रशेखर अपने समर्थकों के साथ पीड़ित परिवार से मिलने मेरठ जा रहे थे। इस दौरान सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस ने कई समर्थकों को उनके घरों पर ही रोक दिया। कुछ कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट किए जाने की भी जानकारी सामने आई।
देवबंद-मुजफ्फरनगर मार्ग स्थित टोल प्लाजा के पास चंद्रशेखर के काफिले में शामिल वाहनों को रोके जाने को लेकर पुलिस अधिकारियों और उनके बीच बहस भी हुई। आजाद समाज पार्टी के पदाधिकारी टिंकू कपिल सहित कई कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा रोके जाने पर पार्टी नेताओं ने नाराजगी जताई।
मेरठ पहुंचने के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि दलित छात्रा के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित लाठीचार्ज की आलोचना करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की।
इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा है। वहीं, पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दलों ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा था।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में दलित वोटों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। चंद्रशेकर आजाद की बढ़ती सक्रियता से बसपा और सपा दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है। वहीं, यदि दलित वोटों में बंटवारा होता है तो इसका असर प्रदेश की चुनावी राजनीति पर भी पड़ सकता है। आने वाले समय में चंद्रशेखर आजाद की रणनीति और गठबंधन की संभावनाएं उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।





