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उत्तर प्रदेश
कफ सीरप नेटवर्क की कड़ियां जोड़ेगी एसटीएफ, रिमांड के लिए अर्जी
nidhi
26 Oct 2026 10:15 AM IST

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कोडीन सीरप मामले में फर्मों और वित्तीय लेनदेन की होगी जांच
लखनऊ: कोडीनयुक्त कफ सीरप के कथित अवैध कारोबार की जांच में उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने आरोपी भूपेंद्र सिंह चौहान से विस्तृत पूछताछ की तैयारी की है। एसटीएफ ने लखनऊ की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर उसकी 10 दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है। जांच एजेंसी आरोपी से आपूर्ति नेटवर्क, संबंधित लोगों और वित्तीय लेनदेन के बारे में जानकारी जुटाना चाहती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रिमांड आवेदन पर सोमवार या मंगलवार को सुनवाई संभावित है। रिमांड मंजूर करने और उसकी अवधि का निर्णय अदालत करेगी।
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह समझना है कि कफ सीरप की खरीद से लेकर आगे उसकी आपूर्ति तक किन लोगों और फर्मों की भूमिका रही। एसटीएफ पूछताछ में सामने आने वाली जानकारी को पहले से उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य आरोपियों के बयानों से मिलाना चाहती है। फिलहाल रिमांड के लिए आवेदन किया गया है; इसे मंजूरी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले की पहले की पड़ताल में सहारनपुर के दवा कारोबारी भूपेंद्र सिंह चौहान की गिरफ्तारी सामने आई थी। कार्रवाई लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दर्ज मुकदमे से संबंधित बताई गई है। जांच में विभिन्न फर्मों के माध्यम से कोडीनयुक्त कफ सीरप की खरीद-बिक्री और कथित अवैध आपूर्ति के आरोपों की पड़ताल की जा रही है। अब प्रस्तावित पूछताछ से कारोबारी रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों के बीच संबंध स्पष्ट करने का प्रयास होगा।
खरीद-बिक्री के दस्तावेजों का होगा मिलान
व्यापक जांच में एसटीएफ का ध्यान कागजों पर दिखाई गई बिक्री और वास्तविक आपूर्ति के बीच संबंध पर है। संबंधित फर्मों के बिल, स्टॉक और बैंक खातों के विवरण का मिलान किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि जिन फर्मों के बीच कारोबार दिखाया गया, उनके बाद सीरप कहां पहुंचा और उसकी खपत का क्या रिकॉर्ड उपलब्ध है।
पहले सामने आई जानकारी के अनुसार, बिलिंग की तीन स्तरों वाली व्यवस्था के बाद वैध बिक्री की पूरी दस्तावेजी कड़ी जांच एजेंसी को नहीं मिली थी। फर्मों के बीच खरीद-बिक्री का विवरण मौजूद होने के बावजूद मेडिकल स्टोर तक आपूर्ति और मरीजों को बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल जारी थी। इसलिए जांच में केवल बिल मौजूद होना पर्याप्त नहीं माना जा रहा; वास्तविक माल की आवाजाही से उसका मिलान भी महत्वपूर्ण है। इससे जांच का केंद्र आपूर्ति शृंखला में मौजूद अंतर को समझना है। किस स्तर तक दस्तावेज उपलब्ध हैं और उसके आगे रिकॉर्ड कहां अधूरा है, यह स्पष्ट होने पर संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल आगे बढ़ सकती है। भूपेंद्र से पूछताछ की मांग इसी व्यापक जांच के बीच की गई है।
फर्मों के पंजीकरण और संचालन पर भी नजर
इस प्रकरण में पहले सामने आई जांच संबंधी जानकारी के मुताबिक, कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत फर्मों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एसटीएफ फर्मों के दस्तावेजों के साथ उनके माध्यम से दिखाई गई खरीद-बिक्री तथा भुगतान के रास्तों की जानकारी जुटा रही है। कुछ स्टॉकिस्टों के मेडिकल लाइसेंस, आवेदन और पंजीकरण संबंधी दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि संबंधित कारोबार किस आधार पर संचालित हुआ और उसमें नियमों का पालन हुआ या नहीं। फर्म का पंजीकृत नाम, उसके कारोबार का रिकॉर्ड और वास्तविक संचालन से संबंधित जानकारी का मिलान इस जांच का हिस्सा है।
गिरफ्तारी के बाद आगे की पूछताछ की तैयारी
भूपेंद्र को एसटीएफ की लखनऊ इकाई ने विभूतिखंड थाना क्षेत्र में शहीद पथ तिराहे के पास से पकड़ा था। गिरफ्तारी के समय उसके पास से तीन मोबाइल फोन और 2,300 रुपये नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें दो एंड्रॉयड फोन और एक आईफोन बताया गया था। अब रिमांड आवेदन के माध्यम से जांच एजेंसी उससे नेटवर्क से संबंधित प्रश्नों पर पूछताछ करना चाहती है। हालांकि, गिरफ्तारी के समय हुई बरामदगी और वर्तमान आवेदन अलग-अलग चरणों की कार्रवाई हैं। वर्तमान स्थिति में अदालत के आदेश के बाद ही प्रस्तावित पुलिस कस्टडी और उसकी अवधि स्पष्ट होगी।
दस्तावेज और बयानों से स्पष्ट होगी भूमिका
पूरे मामले में जांच की दिशा संबंधित फर्मों, सीरप की वास्तविक आपूर्ति और भुगतान के बीच संबंध स्थापित करने पर केंद्रित है। बिलिंग का रिकॉर्ड कारोबार की एक तस्वीर प्रस्तुत करता है, जबकि स्टॉक तथा आगे की बिक्री का विवरण उसकी पुष्टि में मदद करता है। इन रिकॉर्ड में अंतर होने की स्थिति में उसका कारण समझना जरूरी होगा। अभी भूपेंद्र सिंह चौहान पर लगे आरोपों की जांच जारी है। रिमांड की मांग को आरोप सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जा सकता। पूछताछ से प्राप्त जानकारी, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल अगला महत्वपूर्ण कदम रिमांड आवेदन पर अदालत का निर्णय है।
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