उत्तर प्रदेश

कफ सीरप की खरीद-बिक्री पर एसटीएफ के सवाल, भूपेंद्र से रिमांड में पूछताछ

nidhi
28 Oct 2026 8:20 AM IST
कफ सीरप की खरीद-बिक्री पर एसटीएफ के सवाल, भूपेंद्र से रिमांड में पूछताछ
x
लखनऊ: कोडीनयुक्त कफ सीरप के कथित अवैध कारोबार की जांच में उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स ने आरोपित भूपेंद्र सिंह चौहान से पुलिस कस्टडी रिमांड पर पूछताछ शुरू कर दी है। दैनिक जागरण की 28 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, उसे मंगलवार सुबह दस बजे लखनऊ जेल से एसटीएफ कार्यालय लाया गया। पहले दिन करीब 70 सवाल पूछे गए। जांच का केंद्र सीरप की खरीद-बिक्री, बिलिंग, वास्तविक आपूर्ति और संबंधित लोगों की भूमिका है। भूपेंद्र की 48 घंटे की रिमांड मंगलवार, 27 अक्टूबर की सुबह दस बजे से गुरुवार, 29 अक्टूबर की सुबह दस बजे तक है। इस दौरान पूछताछ से मिलने वाली जानकारी का दस्तावेजों और पहले जुटाए गए साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है। उस पर सौ से अधिक स्टॉकिस्टों को सीरप की आपूर्ति करने का आरोप है। आरोपों की जांच जारी है।
दस्तावेज सामने रखकर पूछे गए सवाल
पूछताछ के दौरान भूपेंद्र के सामने कारोबारी दस्तावेज रखे गए। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सवालों पर उसने सहमति जताई, जबकि कई के जवाब में याद नहीं होने की बात कही। एसटीएफ संबंधित कागजात की प्रामाणिकता और उनके स्रोत को लेकर भी जानकारी जुटा रही है। ऐसी जांच में किसी जवाब को अकेले अंतिम निष्कर्ष मानना पर्याप्त नहीं होता। दस्तावेज में दर्ज तारीख, माल की मात्रा, संबंधित फर्म और भुगतान का विवरण मिलकर लेनदेन की तस्वीर स्पष्ट करते हैं। पूछताछ में बताई गई बात का इन रिकॉर्ड से मेल होना महत्वपूर्ण है। पहले दिन पूछे गए सभी सवाल और उनके विस्तृत जवाब सार्वजनिक नहीं हुए हैं। इसलिए यह दावा करना संभव नहीं कि पूछताछ में कितने आरोप स्वीकार किए गए या किस व्यक्ति के खिलाफ निर्णायक साक्ष्य मिले।
दस दिन की मांग के बाद मिली दो दिन की कस्टडी
इससे पहले एसटीएफ ने अदालत में आवेदन देकर भूपेंद्र की दस दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी थी। जनता से रिश्ता की 26 अक्टूबर की रिपोर्ट में बताया गया था कि एजेंसी आपूर्ति नेटवर्क, संबंधित व्यक्तियों और वित्तीय लेनदेन पर विस्तृत पूछताछ करना चाहती है। उस समय आवेदन पर अदालत का निर्णय लंबित था।
अब सामने आई जानकारी में 48 घंटे की रिमांड पर पूछताछ शुरू होने की बात है। रिमांड की मांग और मंजूर अवधि अलग-अलग चरण हैं। पुलिस कस्टडी का उद्देश्य जांच के लिए पूछताछ करना है; इसे आरोप सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जा सकता।
मामले में आगे की स्थिति उपलब्ध साक्ष्यों और अदालत के आदेशों से स्पष्ट होगी। फिलहाल रिमांड बढ़ने अथवा पूछताछ के आधार पर किसी नई गिरफ्तारी की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।
खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और वास्तविक आपूर्ति की पड़ताल
पहले प्रकाशित जांच संबंधी विवरण में फर्मों के बिल, स्टॉक और बैंक खातों का मिलान किए जाने की जानकारी दी गई थी। एजेंसी यह समझना चाहती है कि कागजों पर दिखाई गई खरीद-बिक्री के बाद सीरप वास्तव में कहां पहुंचा। मेडिकल स्टोर तक आपूर्ति और आगे बिक्री की दस्तावेजी कड़ी भी पड़ताल का विषय है। कारोबारी रिकॉर्ड में बिल का होना एक पहलू है, जबकि उसके अनुरूप माल की आवाजाही दूसरा। यदि दोनों में अंतर हो तो उसका कारण स्पष्ट करना जरूरी होता है। यह अंतर रिकॉर्ड की त्रुटि, अधूरी जानकारी या किसी अन्य वजह से हो सकता है। जांच पूरी होने से पहले किसी एक कारण को निश्चित नहीं माना जा सकता। फर्मों के पंजीकरण, संचालन और लाइसेंस संबंधी कागजात की भी जांच होने की जानकारी सामने आई है। इससे पंजीकृत कारोबारी और वास्तविक रूप से काम संभालने वाले लोगों की भूमिका समझने में मदद मिल सकती है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संपर्कों की भी जांच
दैनिक जागरण की 18 अक्टूबर की रिपोर्ट में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल का उल्लेख किया गया था। इनमें सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़ और बुलंदशहर शामिल बताए गए। रिपोर्ट के अनुसार, भूपेंद्र से मिली जानकारी के आधार पर संबंधित कारोबारियों और आपूर्ति व्यवस्था की जांच आगे बढ़ाई जा रही थी। इसी रिपोर्ट में अंतरराज्यीय और संभावित अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति से जुड़े इनपुट मिलने की बात कही गई थी। पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश तक खेप पहुंचाने के आरोपों की पड़ताल का भी उल्लेख था। ये जांच संबंधी दावे हैं, जिनका साक्ष्यों से सत्यापन आवश्यक है। किसी जिले या कारोबारी का नाम पूछताछ में आने भर से उसकी आपराधिक भूमिका तय नहीं होती। वास्तविक जिम्मेदारी समझने के लिए संपर्क, लेनदेन और माल की आपूर्ति के बीच संबंध स्थापित करना होगा।
भुगतान और अन्य आरोपितों की भूमिका पर नजर
जांच में सीरप की आपूर्ति के साथ भुगतान के रास्तों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। पहले की रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी यह पता लगा रही है कि कथित अवैध कारोबार से संबंधित रकम किन व्यक्तियों और फर्मों के माध्यम से पहुंची। इस पड़ताल में बैंक रिकॉर्ड और कारोबारी दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे। किसी भुगतान का होना अपने आप में अवैध गतिविधि का प्रमाण नहीं है; उसका उद्देश्य और संबंधित कारोबार से संबंध स्पष्ट करना जरूरी है।फिलहाल भूपेंद्र से पूछताछ जारी रहने की जानकारी है। उसकी ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। रिमांड के दौरान सामने आने वाली बातों का स्वतंत्र साक्ष्यों से मिलान होने के बाद ही मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।
Next Story