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संसद में साधु बनकर प्रदर्शन करना पड़ा भारी, तीन सांसदों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला

वाराणसी : संसद भवन परिसर में हुए एक प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, सांसद पप्पू यादव और सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ वाराणसी में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला संसद परिसर में किए गए एक नुक्कड़ नाटक और प्रदर्शन को लेकर दर्ज कराया गया है। आरोप है कि इस प्रदर्शन में धार्मिक प्रतीकों और साधु वेश का इस्तेमाल किया गया, जिससे सनातन धर्म से जुड़े लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।
जानकारी के अनुसार, संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान एक प्रतीकात्मक नुक्कड़ नाटक भी किया गया था, जिसमें सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर साधु के वेश में नजर आए थे। उनके हाथ में एक दान पात्र भी दिखाया गया था। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने उस दान पात्र में कुछ पैसे डाले थे। इसके बाद पप्पू यादव को वहां से भागते हुए दिखाया गया था।
इस नाटक के जरिए राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मुद्दे को उठाने का प्रयास किया गया था। हालांकि, इस प्रदर्शन के बाद धार्मिक संगठनों और संत समाज ने इसका विरोध शुरू कर दिया। वाराणसी में संत समाज ने इसे धार्मिक भावनाओं और साधु परंपरा का अपमान बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई।
शनिवार को पातालपुरी मठ के महंत बालक दास के नेतृत्व में बनारस के कई संत डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल से मिले। संतों ने इस मामले में शिकायत पत्र सौंपते हुए राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
संत समाज का आरोप है कि संसद जैसे संवैधानिक स्थान पर साधु के वेश का इस्तेमाल राजनीतिक प्रदर्शन के लिए करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि संतों की वेशभूषा और धार्मिक प्रतीकों का सम्मान किया जाना चाहिए। महंत बालक दास ने कहा कि साधु-संतों की परंपरा सनातन संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसका किसी राजनीतिक प्रदर्शन में उपयोग करना करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक प्रतीकों को लेकर राजनीति करने से समाज में गलत संदेश जाता है। संत समाज ने मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। विपक्षी दलों की ओर से राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े सवालों को उठाने को जनहित का मुद्दा बताया जा रहा है, जबकि विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि किसी भी मुद्दे को उठाने के लिए धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल संसद में हुए इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर बहस जारी है।
इस विवाद ने एक बार फिर धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल और राजनीतिक प्रदर्शनों की मर्यादा को लेकर चर्चा तेज कर दी है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर मामले की दिशा स्पष्ट होगी।





