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Khatauli में गूंजा आध्यात्मिक संदेश, जिनवाणी से दूर होगा अज्ञान का अंधकार

Khatauli खतौली : कस्बे के ऐतिहासिक श्री दिगम्बर जैन मंदिर, जक्की वाला में गुरुवार की सुबह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण से भरपूर रही। मंदिर परिसर में आयोजित भव्य धर्मसभा में जैन मुनि 108 अनुपम सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन में स्वाध्याय के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि स्वाध्याय केवल धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री 108 अनुपम सागर महाराज ने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं को जुटाने में लगातार प्रयास करता रहता है, लेकिन अपनी आत्मा के विकास और शांति के लिए समय नहीं निकाल पाता। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार आत्मा के उत्थान के लिए जिनवाणी और धार्मिक ज्ञान का अध्ययन जरूरी है।
उन्होंने कहा कि स्वाध्याय के अभाव में मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप और जीवन के उद्देश्य को समझ नहीं पाता। नियमित रूप से धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने से मन में सकारात्मक विचारों का विकास होता है और व्यक्ति मोह, अहंकार तथा अज्ञानता से दूर होकर विवेक के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
मुनि श्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार दीपक अपने प्रकाश से अंधकार को समाप्त करता है, उसी प्रकार जिनवाणी का अध्ययन मनुष्य के भीतर मौजूद अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे केवल धार्मिक पुस्तकों को घर या मंदिर में सुरक्षित रखने तक सीमित न रहें, बल्कि उनमें दिए गए संदेशों और सिद्धांतों को अपने व्यवहार और जीवन में अपनाएं।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने मुनि श्री के प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना। वातावरण में धार्मिक आस्था और भक्ति का भाव देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के विचारों को जीवन में अपनाने का संकल्प भी लिया।
मुनि अनुपम सागर महाराज ने कहा कि स्वाध्याय व्यक्ति को आत्मनिरीक्षण की प्रेरणा देता है। जब मनुष्य अपने विचारों और कर्मों का मूल्यांकन करता है, तभी वह जीवन में सुधार कर सकता है। उन्होंने कहा कि आत्मज्ञान और सदाचार के मार्ग पर चलकर ही मनुष्य वास्तविक सुख और शांति प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने युवाओं को भी नियमित रूप से अच्छे साहित्य और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने की प्रेरणा दी। मुनि श्री ने कहा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में मानसिक तनाव बढ़ रहा है, ऐसे समय में स्वाध्याय मन को स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
धर्मसभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने मुनि श्री से आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंधन की ओर से कार्यक्रम की व्यवस्थाएं सुचारु रूप से की गई थीं। जैन समाज के लोगों ने बताया कि मंदिर में समय-समय पर ऐसे धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया जाता है, जिससे समाज में आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा मिल सके।





