उत्तर प्रदेश

राज्यसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार उतारेगी सपा, राम गोपाल यादव फिर जाएंगे उच्च सदन

Kavita2
30 Sept 2026 9:10 AM IST
राज्यसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार उतारेगी सपा, राम गोपाल यादव फिर जाएंगे उच्च सदन
x

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। पार्टी इस बार तीन उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी में है। इनमें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव प्रो. राम गोपाल यादव का नाम लगभग तय माना जा रहा है। वह बुधवार को सुबह 11 बजे समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल करेंगे। वहीं, शेष दो उम्मीदवारों के नामों की घोषणा 3 या 4 अक्टूबर को किए जाने की संभावना है।

राज्यसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के भीतर पिछले कुछ दिनों से लगातार मंथन चल रहा है। पार्टी नेतृत्व विधायकों की संख्या के साथ ही चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के नाम तय करने में जुटा है। इस बीच प्रो. राम गोपाल यादव को एक बार फिर राज्यसभा भेजने का निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह लंबे समय से समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाते रहे हैं और पार्टी के रणनीतिक मामलों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होना है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर तय की गई है। नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी, जबकि उम्मीदवार 9 अक्टूबर तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान के बाद 16 अक्टूबर को ही मतगणना होगी।

राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की ओर से तीन प्रत्याशी उतारने की तैयारी ने राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। उपलब्ध संख्या के आधार पर पार्टी के दो उम्मीदवारों की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही है, जबकि तीसरे उम्मीदवार को लेकर रणनीतिक स्तर पर मंथन जारी है। यही कारण है कि पार्टी तीसरे नाम पर जल्दबाजी में फैसला करने के बजाय सभी राजनीतिक समीकरणों पर विचार कर रही है।

प्रो. राम गोपाल यादव समाजवादी पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं में शामिल हैं। वह लंबे समय से राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनका मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल भी समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व ने उन्हें एक बार फिर उच्च सदन भेजने की तैयारी की है।

दूसरे उम्मीदवार के तौर पर पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के नाम की चर्चा तेज है। आलोक रंजन उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में लंबे समय तक अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद भी वह समाजवादी पार्टी की रणनीति और नीतिगत मामलों से जुड़े रहे हैं। इससे पहले भी समाजवादी पार्टी उन्हें राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी बना चुकी है। फिलहाल पार्टी की ओर से उनके नाम की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

समाजवादी पार्टी के सबसे ज्यादा राजनीतिक मंथन का केंद्र तीसरा उम्मीदवार बना हुआ है। इस सीट के लिए पार्टी के भीतर कई नामों को लेकर चर्चा चल रही है। नेतृत्व ऐसा प्रत्याशी तलाश रहा है, जिसके जरिए चुनावी समीकरण साधने के साथ ही आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए भी संदेश दिया जा सके। माना जा रहा है कि तीसरे उम्मीदवार का चयन सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

राज्यसभा चुनाव के जरिए समाजवादी पार्टी केवल उच्च सदन में अपनी संख्या बढ़ाने की कोशिश नहीं कर रही है, बल्कि इसे आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रणनीति के अहम हिस्से के रूप में भी देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व उम्मीदवारों के चयन के जरिए विभिन्न सामाजिक वर्गों को साधने और संगठन के भीतर संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर सकता है।

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की जिन 10 सीटों पर चुनाव होना है, उनमें वर्तमान में आठ सीटें भाजपा के पास हैं, जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के पास एक-एक सीट है। इन सीटों के लिए चुनावी कार्यक्रम घोषित होने के बाद प्रदेश में राजनीतिक दलों की गतिविधियां बढ़ गई हैं।

राज्यसभा चुनाव में विधायक मतदान करते हैं और चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली तथा एकल संक्रमणीय मत पद्धति से होता है। ऐसे में प्रत्येक दल के लिए विधानसभा में अपने विधायकों की संख्या बेहद महत्वपूर्ण होती है। अतिरिक्त प्रत्याशी उतारने की स्थिति में दूसरे दलों और निर्दलीय विधायकों के रुख पर भी नजर रहती है।

समाजवादी पार्टी का तीन उम्मीदवार उतारने का फैसला इस चुनाव को और दिलचस्प बना सकता है। फिलहाल पार्टी ने प्रो. राम गोपाल यादव के नाम को आगे बढ़ा दिया है, जबकि आलोक रंजन का नाम दूसरे संभावित प्रत्याशी के रूप में चर्चा में बना हुआ है। तीसरे उम्मीदवार को लेकर स्थिति 3 या 4 अक्टूबर तक साफ होने की संभावना है।

अब नजर समाजवादी पार्टी की अगली घोषणा पर है। तीसरे प्रत्याशी के नाम से यह संकेत भी मिल सकता है कि पार्टी राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए किस तरह का सामाजिक और राजनीतिक समीकरण तैयार करना चाहती है। नामांकन प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल और तेज होने की उम्मीद है।

Next Story