उत्तर प्रदेश

अखिलेश यादव की हिरासत के विरोध में आगरा में सपा का प्रदर्शन, CEC के इस्तीफे की मांग

Kavita2
6 Oct 2026 2:41 PM IST
अखिलेश यादव की हिरासत के विरोध में आगरा में सपा का प्रदर्शन, CEC के इस्तीफे की मांग
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आगरा। दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को हिरासत में लिए जाने के बाद आगरा में सपा कार्यकर्ताओं ने विरोध तेज कर दिया। मंगलवार को पार्टी कार्यकर्ता अलग-अलग स्थानों पर जुटे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की। दिल्ली में भी अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग की ओर मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया था।

आगरा में सपा महानगर संगठन ने संजय प्लेस स्थित शहीद स्मारक पर प्रदर्शन किया। यहां कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की और पुतला फूंकने की कोशिश की। पुलिस ने पुतला छीन लिया, जिसके बाद कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। आखिरकार पुलिस ने पुतला नहीं फूंकने दिया।

प्रदर्शन में सपा नेता राजीव सविता के साथ महिला कार्यकर्ता और युवा भी शामिल हुए। शहीद स्मारक पर पहले सभा की गई, जिसमें वक्ताओं ने SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने पुतला फूंकने की कोशिश की, लेकिन मौके पर पहले से मौजूद पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया।

पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच इसी दौरान तीखी बहस हुई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें शांतिपूर्ण विरोध से रोका। वहीं पुलिस का कहना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक स्थान पर स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए हस्तक्षेप किया गया।

दिल्ली में मंगलवार को INDIA गठबंधन के सांसद संसद से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और SIR प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही तय करना था। पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोका, जिसके बाद विपक्षी नेताओं ने धरना दिया। अखिलेश यादव, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ'ब्रायन समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।

दिल्ली की इस कार्रवाई की खबर आगरा पहुंचते ही सपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई। पार्टी कार्यालय पर भी कार्यकर्ताओं का जुटना शुरू हो गया। कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे गिरफ्तारी देने के लिए तैयार हैं और विरोध आगे भी जारी रहेगा।

सपा नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष लंबे समय से सवाल उठा रहा है। उनका आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने और सूची में बदलाव से जुड़े गंभीर सवाल सामने आए हैं। चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा ने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज किया है।

प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर जनता का विश्वास कायम रहना चाहिए और मतदाता सूची से जुड़े सभी सवालों का पारदर्शी जवाब मिलना चाहिए।

आगरा में ज्ञानेश कुमार से जुड़ा विरोध पहले भी देखने को मिला है। हाल में उनके पैतृक आवास पर प्रदर्शन के मामले में छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस मामले में पुलिस ने गंभीर धाराओं में कार्रवाई की थी।

इसी वजह से मंगलवार के प्रदर्शन को लेकर पुलिस पहले से सतर्क थी। शहीद स्मारक और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा। जैसे ही कार्यकर्ताओं ने पुतला जलाने की तैयारी की, पुलिसकर्मियों ने उसे अपने कब्जे में ले लिया।

सपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने इस दौरान एक कार्यकर्ता को गिरा दिया और अभद्र व्यवहार किया। पुलिस और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच हुई नोकझोंक के बावजूद स्थिति को कुछ समय बाद नियंत्रित कर लिया गया।

सपा नेताओं ने कहा कि अखिलेश यादव को हिरासत में लिया जाना लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश है। वहीं दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा और प्रतिबंधित क्षेत्र में कानून-व्यवस्था के मद्देनजर रोका था। विपक्षी सांसदों के मार्च के दौरान मध्य दिल्ली में भारी सुरक्षा और बैरिकेडिंग की गई थी।

मंगलवार का आगरा प्रदर्शन केवल अखिलेश यादव की हिरासत तक सीमित नहीं रहा। कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की भूमिका, SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित बदलावों को भी मुद्दा बनाया।

पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि आने वाले दिनों में भी इस मुद्दे को लेकर धरना और प्रदर्शन जारी रह सकते हैं। दूसरी ओर पुलिस प्रशासन राजनीतिक प्रदर्शनों को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाए हुए है।

फिलहाल आगरा में प्रदर्शन के बाद स्थिति सामान्य है, लेकिन सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR के मुद्दे पर उनका आंदोलन जारी रहेगा। दिल्ली में विपक्षी नेताओं की हिरासत और आगरा में हुए विरोध ने मतदाता सूची विवाद को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

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