उत्तर प्रदेश

बदनौली पहुंचे सपा सांसद रामजी लाल सुमन को पुलिस ने गांव के बाहर रोका

Kavita2
23 Sept 2026 9:12 AM IST
बदनौली पहुंचे सपा सांसद रामजी लाल सुमन को पुलिस ने गांव के बाहर रोका
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हापुड़। समाजवादी पार्टी के सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामजी लाल सुमन मंगलवार दोपहर बदनौली प्रकरण को लेकर दूसरी बार हापुड़ के ग्राम बदनौली पहुंचे। हालांकि पुलिस ने उन्हें गांव में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया। गांव के बाहर पुलिस ने बैरियर लगाकर सुरक्षा व्यवस्था की थी। सांसद ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से भेजी गई आर्थिक सहायता पीड़ित परिवार तक पहुंचाने जा रहे हैं, लेकिन पुलिस ने धारा 144 का हवाला देते हुए उन्हें गांव के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी।

इस दौरान सांसद और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। रामजी लाल सुमन गांव के अंदर जाकर पीड़ित परिवार से मिलने की बात पर अड़े रहे, जबकि पुलिस अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था और लागू प्रतिबंधों का हवाला देकर उन्हें आगे जाने से रोक दिया। काफी देर तक बातचीत और बहस के बाद पुलिस ने सांसद को समझाया। इसके बाद पीड़ित परिवार को गांव से बाहर बुलाया गया, जहां सांसद ने समाजवादी पार्टी की ओर से परिवार को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की।

गांव के बाहर लगाया गया था बैरियर

जानकारी के मुताबिक, सपा सांसद रामजी लाल सुमन के बदनौली पहुंचने की सूचना पुलिस को पहले ही मिल गई थी। इसके बाद गांव के बाहर बैरियर लगाकर पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। मंगलवार दोपहर सांसद अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ वहां पहुंचे तो पुलिस ने उनके काफिले को बैरियर पर रोक लिया।

सांसद ने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों से गांव के अंदर जाने की अनुमति मांगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पीड़ित परिवार से मिलना और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से भेजी गई आर्थिक सहायता देना है। इसके बावजूद पुलिस अधिकारियों ने उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी।

धारा 144 का हवाला देकर रोका

पुलिस अधिकारियों ने सांसद को बताया कि क्षेत्र में धारा 144 लागू होने के कारण उन्हें गांव में जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस पर सांसद ने नाराजगी जताई। दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बातचीत होती रही और स्थिति नोकझोंक तक पहुंच गई।

रामजी लाल सुमन ने पुलिस के सामने सवाल उठाया कि जब उनका उद्देश्य केवल पीड़ित परिवार से मिलना और आर्थिक मदद देना है तो उन्हें गांव में जाने से क्यों रोका जा रहा है। वहीं पुलिस अपनी ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लागू प्रतिबंधों का पालन कराने की बात कहती रही।

पुलिस से हुई तीखी नोकझोंक

बैरियर पर रोके जाने के बाद सांसद और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस तेज हो गई। सांसद गांव में प्रवेश करने की अनुमति देने की मांग करते रहे। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया और स्थिति को शांत कराने में जुटे रहे।

मौके पर मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी सांसद को रोके जाने पर नाराजगी जाहिर की। इस दौरान पुलिस बल सतर्क रहा और किसी को भी बैरियर से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। काफी देर तक चले घटनाक्रम के बाद सांसद और पुलिस के बीच इस बात पर सहमति बनी कि पीड़ित परिवार को गांव से बाहर बुलाकर आर्थिक सहायता सौंप दी जाए।

पीड़ित परिवार को दिए दो लाख रुपये

इसके बाद पुलिस ने पीड़ित परिवार के सदस्यों को मौके पर बुलवाया। सांसद रामजी लाल सुमन ने परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और समाजवादी पार्टी की ओर से दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। सांसद के अनुसार यह सहायता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से परिवार के लिए भेजी गई थी।

आर्थिक सहायता सौंपने के दौरान सांसद ने परिवार के सदस्यों से बातचीत भी की। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। इसके बाद सांसद और उनके साथ पहुंचे पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन की ओर से गांव में प्रवेश नहीं दिए जाने पर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई।

दूसरी बार बदनौली पहुंचे सांसद

बताया जा रहा है कि रामजी लाल सुमन बदनौली प्रकरण के सिलसिले में दूसरी बार गांव पहुंचे थे। इस बार उनका मुख्य उद्देश्य पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देना था। हालांकि पुलिस की ओर से गांव के बाहर ही उन्हें रोक दिए जाने के कारण वह परिवार के घर तक नहीं पहुंच सके।

सांसद के पहुंचने के मद्देनजर गांव और आसपास सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। पुलिस ने बैरियर लगाकर आवाजाही पर निगरानी रखी। अधिकारियों का जोर किसी भी ऐसी स्थिति से बचने पर था जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी।

राजनीतिक हलचल भी हुई तेज

बदनौली प्रकरण को लेकर सपा नेताओं की सक्रियता के बीच सांसद को गांव में प्रवेश से रोके जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो सकती है। सपा सांसद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि पुलिस ने लागू प्रतिबंधात्मक आदेश और कानून-व्यवस्था को अपने कदम का आधार बताया।

फिलहाल सांसद गांव के अंदर नहीं जा सके, लेकिन पीड़ित परिवार को मौके पर बुलाकर दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता सौंप दी गई। पूरे घटनाक्रम के दौरान गांव के बाहर पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति पर नजर रखी गई।

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