उत्तर प्रदेश

अल-फलाह यूनिवर्सिटी चेयरमैन की गिरफ्तारी पर सपा विधायक जय किशन साहू का सवाल

SHIDDHANT
19 Nov 2025 9:43 PM IST
अल-फलाह यूनिवर्सिटी चेयरमैन की गिरफ्तारी पर सपा विधायक जय किशन साहू का सवाल
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UP उत्तर प्रदेश। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तेज हो गई हैं। सपा विधायक जय किशन साहू ने इस कार्रवाई पर प्रश्न खड़े करते हुए कहा कि यह कदम कई तरह के संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा, “ईडी ने गिरफ्तारी की है, लेकिन मुझे इस कार्रवाई में कुछ संदेह नजर आ रहा है। जिस तरीके से केंद्र की एजेंसियां काम कर रही हैं, उसमें निष्पक्षता दिखाई नहीं दे रही है।”
सपा विधायक ने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में केंद्रीय जांच एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक दबाव के हथियार के रूप में बढ़ा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने के लिए ऐसी कार्रवाई अक्सर देखी जाती है। साहू ने सवाल उठाया कि अगर वाकई कोई आर्थिक गड़बड़ी या भ्रष्टाचार हुआ है, तो जांच रिपोर्टों और साक्ष्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जांच एजेंसियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, लेकिन जब उनके कार्यों पर राजनीतिक प्रभाव का शक पैदा होने लगता है, तब जनता का भरोसा कमजोर होता है। साहू ने यह भी कहा कि ईडी जैसी एजेंसियों की कार्रवाई केवल विपक्षी दलों और उनसे जुड़े लोगों पर ही क्यों होती है, जबकि सत्ताधारी दल के नेताओं के खिलाफ दायर शिकायतें अक्सर लंबित नजर आती हैं।
सपा विधायक ने मांग की कि इस कार्रवाई पर विस्तृत जानकारी और जांच के आधारों को सामने लाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सिद्दीकी के खिलाफ ठोस सबूत हैं, तो कानून अपना काम करेगा, लेकिन यदि कार्रवाई दबाव बनाकर राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से की गई है, तो यह लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है।
स्थानीय स्तर पर भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े लोग इसे “अचानक और चौंकाने वाली” कार्रवाई बता रहे हैं। वहीं, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनावी माहौल में ऐसी गिरफ्तारियों के राजनीतिक निहितार्थ भी हो सकते हैं। फिलहाल, ईडी की कार्रवाई, गिरफ्तारी के कारणों और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं। सपा विधायक जय किशन साहू के बयान ने इस मामले को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है, जिससे आने वाले दिनों में बहस और तेज होने की संभावना है।
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