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लखनऊ: राजधानी के बहुचर्चित एप्पल एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की मौत के मामले में दोषी ठहराए गए बर्खास्त सिपाही प्रशांत कुमार चौधरी को अदालत ने 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। प्रशांत करीब आठ साल से जेल में है। अदालत ने उसे हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या का दोषी माना था।
सजा के प्रश्न पर सुनवाई के दौरान प्रशांत कुमार चौधरी ने अदालत से नरमी बरतने की गुहार लगाई। उसने अपने वृद्ध माता-पिता, अविवाहित भाई और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला दिया। प्रशांत ने कहा कि वह करीब आठ साल से जेल में है और उसका इससे पहले कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा है। उसने अदालत से जेल में बिताई गई अवधि को ही पर्याप्त सजा मानकर राहत देने की मांग की।
प्रशांत ने अदालत के सामने अपनी उम्र का भी हवाला दिया। उसने बताया कि उसकी उम्र 36 वर्ष है और इस मुकदमे के कारण उसका पारिवारिक जीवन भी प्रभावित हुआ है। उसके मुताबिक उसकी पत्नी ने वर्ष 2023 में उसे तलाक दे दिया था। घर में वृद्ध माता-पिता हैं और भाई की भी शादी नहीं हुई है। इन परिस्थितियों को आधार बनाते हुए उसने अदालत से कम सजा देने की अपील की।
दूसरी ओर विवेक तिवारी के परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता प्रांशु अग्रवाल ने दोषी की गुहार का विरोध किया। उन्होंने अदालत के समक्ष अधिकतम दंड की मांग की। पीड़ित परिवार भी फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है और मामले में आगे कानूनी विकल्प अपनाने की बात सामने आई है।
जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद प्रशांत चौधरी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 पार्ट-2 के तहत गैर इरादतन हत्या का दोषी माना था। इस प्रावधान में ऐसे कृत्य को शामिल किया जाता है जिसमें आरोपी को यह जानकारी होती है कि उसके कृत्य से किसी व्यक्ति की मौत हो सकती है, लेकिन हत्या करने का इरादा साबित नहीं होता। सह-आरोपी सिपाही संदीप कुमार को अदालत ने बरी कर दिया था।
यह मामला 29 सितंबर 2018 का है। एप्पल कंपनी में कार्यरत 38 वर्षीय विवेक तिवारी देर रात अपनी सहकर्मी को घर छोड़ने जा रहे थे। इसी दौरान लखनऊ में पुलिस गश्त के दौरान उनकी कार को रोकने की कोशिश की गई। इसी घटनाक्रम में तत्कालीन सिपाही प्रशांत चौधरी ने गोली चला दी, जो विवेक तिवारी को लगी। गोली लगने के बाद उनकी कार भी दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। बाद में विवेक की मौत हो गई। इस घटना ने उस समय पूरे प्रदेश में व्यापक चर्चा और विरोध को जन्म दिया था।
मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। विवेक तिवारी के परिवार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। घटना के बाद प्रशांत चौधरी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई और लंबी न्यायिक प्रक्रिया चली। करीब आठ साल बाद अदालत ने उसे गैर इरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
अदालत के फैसले के अनुसार प्रशांत को 10 साल की सजा मिली है, जबकि वह करीब आठ साल की अवधि पहले ही जेल में गुजार चुका है। कानूनी जानकारों के मुताबिक जेल में पहले बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किए जाने पर उसे शेष अवधि जेल में बितानी पड़ सकती है। हालांकि दोषी के पास फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने का कानूनी विकल्प मौजूद है।
विवेक तिवारी का परिवार अदालत के फैसले के बाद भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। परिवार की आपत्ति मुख्य रूप से प्रशांत को हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराए जाने और दूसरे आरोपी के बरी होने को लेकर सामने आई है। परिवार की ओर से विस्तृत फैसले का अध्ययन करने के बाद उच्च न्यायालय का रुख करने की बात कही गई है।
करीब आठ साल तक चले इस मामले में अदालत के फैसले के साथ एक महत्वपूर्ण न्यायिक चरण पूरा हुआ है। सजा सुनाए जाने से पहले दोषी ने पारिवारिक परिस्थितियों और जेल में बिताए वर्षों का हवाला देकर राहत मांगी, जबकि पीड़ित पक्ष ने कड़ी सजा की मांग की। अंततः अदालत ने प्रशांत चौधरी को 10 साल के कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया।





