उत्तर प्रदेश

भारत की प्रगति रोकना चाहते हैं कुछ लोग, 'कालनेमि' वाले बयान पर CM योगी का संदेश

Ratna Netam
29 July 2026 6:44 PM IST
भारत की प्रगति रोकना चाहते हैं कुछ लोग, कालनेमि वाले बयान पर CM योगी का संदेश
x

गोरखपुर : गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों से देश की एकता, सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय हितों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत आज विकास और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन कुछ शक्तियां देश की इस प्रगति को रोकने और उसकी सांस्कृतिक विरासत को कमजोर करने के लिए लगातार षड्यंत्र कर रही हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह इन साजिशों को समझे और समाज तथा राष्ट्र के हित में सतर्क रहकर अपनी भूमिका निभाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन 23 जुलाई से चल रही श्रीराम कथा के विश्राम सत्र के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री ने गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर तथा व्यासपीठ का पूजन करके की। इसके बाद उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं और संत समाज को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति, परंपराएं और आध्यात्मिक विरासत हजारों वर्षों से विश्व का मार्गदर्शन करती रही हैं। यही कारण है कि कुछ देश विरोधी ताकतें और उनके समर्थक भारत की सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने का प्रयास करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि समाज के भीतर भी कुछ ऐसे लोग मौजूद हैं जो अनजाने या जानबूझकर उन शक्तियों के प्रवक्ता बन जाते हैं, जिनका उद्देश्य भारत की प्रगति को बाधित करना है। ऐसे लोगों की पहचान करना और उनसे सावधान रहना समय की आवश्यकता है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि समाज अपने बीच छिपे ऐसे तत्वों के प्रति सतर्क नहीं रहेगा तो यह अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा। उन्होंने पौराणिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में कुछ लोग कालनेमि का रूप धारण कर भ्रम फैलाने और लोगों को गुमराह करने का प्रयास करते हैं। ऐसे लोगों के प्रभाव से बचने के लिए जागरूकता और विवेक आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति और समाज समय रहते स्वयं का परिमार्जन करते हुए सही और गलत की पहचान कर लेते हैं, वे अधिक सुरक्षित और समृद्ध रहते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र की शक्ति केवल सरकारों से नहीं, बल्कि जागरूक और संस्कारित समाज से बनती है। यदि परिवार मजबूत होगा, समाज संगठित रहेगा और लोग अपनी संस्कृति व मूल्यों के प्रति समर्पित रहेंगे तो देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने सभी नागरिकों से सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।

उन्होंने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु ही व्यक्ति को ज्ञान, संस्कार और जीवन की सही दिशा प्रदान करते हैं। गुरु परंपरा ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सदियों तक जीवित रखा है। इसलिए गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुशासन और आत्मचिंतन का भी अवसर है।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में संत, महंत, श्रद्धालु और विभिन्न क्षेत्रों से आए लोग उपस्थित रहे। श्रीराम कथा के समापन अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा का स्मरण किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारत आज नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है और यह प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए विकास की इस यात्रा में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाए। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि समाज सजग, संगठित और संस्कारित रहेगा तो भारत न केवल आर्थिक रूप से बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी विश्व का नेतृत्व करता रहेगा।

Next Story