उत्तर प्रदेश

मिट्टी घोटाला: लाखों रुपए का गबन, पहले जांच टीम ने दी क्लीन चीट

SHIDDHANT
18 Sept 2025 11:38 PM IST
मिट्टी घोटाला: लाखों रुपए का गबन, पहले जांच टीम ने दी क्लीन चीट
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अंबेडकरनगर, उत्तर प्रदेश। अंबेडकरनगर जिले के कटेहरी ब्लॉक के सरखने किशुनी पुर गांव से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जहां तालाब की खुदाई और मिट्टी डालने के नाम पर करीब 5 लाख 41 हजार रुपये का गबन हुआ। इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि पहले जांच करने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। गांव के निवासी राजीव कुमार दुबे ने 11 अगस्त को डीएम अनुपम शुक्ला को पत्र भेजकर शिकायत की थी कि तालाब की खुदाई और मिट्टी डालने के लिए 6 लाख 50 हजार रुपये निकाले गए, लेकिन काम बहुत कम हुआ। इस शिकायत के बाद डीएम ने डीसी मनरेगा विजय अस्थाना के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच टीम का गठन किया।
पहली जांच टीम में ब्लॉक के एपीओ, जेई और युवा कल्याण के वीओ शामिल थे। इस टीम ने मात्र एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट पेश की और आरोपियों को क्लीन चीट दे दी। हालांकि, शिकायतकर्ता ने इस फैसले के बाद फिर से डीएम से शिकायत की। इसके बाद सीडीओ आनंद शुक्ला और पीडब्ल्यूडी के जेई ने मामले की दोबारा जांच की, जिसमें बड़े पैमाने पर मिट्टी घोटाला सामने आया। जांच में पाया गया कि तालाब की खुदाई और मिट्टी डालने के नाम पर कुल 5 लाख 41 हजार रुपये की धनराशि का गबन किया गया। सीडीओ आनंद शुक्ला के निर्देश पर कटेहरी बीडीओ हौसिला प्रसाद ने ग्राम प्रधान रीता देवी, तकनीकी सहायक ब्रह्मदेव त्रिपाठी और ग्राम पंचायत अधिकारी सरिता शुक्ला के खिलाफ महरुआ थाना में मुकदमा दर्ज कराया।
सीडीओ ने बताया कि पहले जांच करने वाली चार अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। इसके अतिरिक्त, एपीओ और टीओ के सेवा समाप्ति के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। प्रधान के खिलाफ 95 जी पंचायत राज अधिनियम के तहत नोटिस जारी किया गया और मुकदमा दर्ज कराया गया। वसूली की कार्रवाई भी जारी है। यह मामला स्थानीय प्रशासन और भ्रष्टाचार नियंत्रण की गंभीरता को दर्शाता है। पहले जांच टीम द्वारा क्लीन चीट देने की घटना ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए थे। सीडीओ और
पीडब्ल्यूडी
के जेई की दोबारा जांच ने पूरे घोटाले का पर्दाफाश किया और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार की रोकथाम और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता आवश्यक है। साथ ही, शिकायतकर्ता की सतर्कता और प्रशासनिक पुनः जांच ने इस मामले को सार्वजनिक और न्यायसंगत दिशा में ले जाने में मदद की। अब इस घोटाले में शामिल आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।
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