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Sitapur: एनकाउंटर में खत्म हुई राघवेंद्र हत्याकांड के दो सगे भाइयों की कहानी

सीतापुर: उत्तर प्रदेश के सीतापुर में पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी हत्याकांड के दो वांछित शूटरों को गुरुवार सुबह एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त मुठभेड़ में मार गिराया गया। दोनों शूटरों की पहचान अटवा गांव, थाना मिश्रिख निवासी राजू उर्फ रिजवान और संजय उर्फ अकील खान के रूप में हुई है, जो सगे भाई थे।
एसपी अंकुर अग्रवाल के मुताबिक, एसटीएफ और पुलिस को दोनों आरोपियों की मूवमेंट की सूचना मिली थी। गुरुवार सुबह पिसावां क्षेत्र में चेकिंग के दौरान दो युवक बाइक से आते दिखाई दिए। टीम ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों घायल हो गए। उन्हें तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
दोनों पर था 1-1 लाख का इनाम
राजू और संजय पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। दोनों ने 8 मार्च को महोली कस्बे के पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की हत्या की थी। उन्होंने लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे पर हेमपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास ओवरब्रिज पर राघवेंद्र की बाइक रोककर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी थीं। तीन गोलियां कंधे और सीने में लगने से पत्रकार की मौके पर ही मौत हो गई थी।
पुजारी ने करवाई थी सुपारी से हत्या
इस सनसनीखेज हत्याकांड की साजिश कारेदेव बाबा मंदिर के पुजारी शिवानंद बाबा उर्फ विकास राठौर ने रची थी। जानकारी के मुताबिक, पत्रकार राघवेंद्र ने पुजारी को मंदिर परिसर में किसी महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया था। पुजारी को डर था कि राघवेंद्र यह बात उजागर कर देगा, इसलिए उसने शूटरों को सुपारी देकर उसकी हत्या करवा दी।
इस मामले में पुलिस पहले ही मुख्य साजिशकर्ता पुजारी समेत तीन आरोपियों को जेल भेज चुकी है। राघवेंद्र बाजपेयी एक राष्ट्रीय अखबार के लिए महोली तहसील में पत्रकारिता करते थे और हत्या के दिन ड्यूटी से घर लौट रहे थे।
एनकाउंटर में दोनों शूटरों के मारे जाने से पुलिस को बड़ी सफलता मिली है, वहीं पत्रकार संगठनों ने भी इस कार्रवाई पर संतोष जताया है।





