उत्तर प्रदेश

राम मंदिर दान चोरी प्रकरण में SIT की जांच खत्म, चंपत राय से 7 बार पूछताछ

nidhi
16 July 2026 7:14 AM IST
राम मंदिर दान चोरी प्रकरण में SIT की जांच खत्म, चंपत राय से 7 बार पूछताछ
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चंपत राय से 7 बार हुई पूछताछ, SIT की जांच पूरी, जल्द दाखिल हो सकती है चार्जशीट

Uttar Pradesh: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच पूरी कर ली है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से कुल सात बार पूछताछ की गई। जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल करने के बाद अपनी रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है और अब जल्द ही अदालत में चार्जशीट दाखिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

यह मामला सामने आने के बाद न केवल अयोध्या बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था, क्योंकि यह देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक राम मंदिर से जुड़ा हुआ है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल का गठन किया था।
क्या है पूरा मामला?
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब राम मंदिर में चढ़ावे और दान के प्रबंधन को लेकर अनियमितताओं के आरोप सामने आए। जांच के दौरान आरोप लगा कि मंदिर में प्राप्त नकदी और अन्य चढ़ावे के प्रबंधन में गड़बड़ी हुई तथा कुछ धनराशि और कीमती वस्तुओं के गायब होने की शिकायत मिली।
जांच के दौरान पुलिस ने मंदिर से जुड़े कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों, ट्रस्ट के अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में कई दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज, बैंक रिकॉर्ड, कैश हैंडलिंग से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों को भी खंगाला गया।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव होने के नाते चंपत राय मंदिर प्रशासन और वित्तीय व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर हैं। इसी कारण SIT ने उनसे सात अलग-अलग चरणों में पूछताछ की।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी ली गई—
मंदिर में प्राप्त चढ़ावे की गिनती और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया।
दान राशि के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था।
संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारियां।
कथित चोरी के समय की प्रशासनिक स्थिति।
सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली।
ट्रस्ट द्वारा अपनाई गई वित्तीय पारदर्शिता।
जांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों पर स्पष्टीकरण।
बताया जा रहा है कि हर दौर की पूछताछ कई घंटों तक चली और SIT ने उनसे दस्तावेजों के आधार पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
SIT ने किन-किन पहलुओं की जांच की?
विशेष जांच दल ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए बहुआयामी जांच की। इसमें केवल कथित चोरी की घटना ही नहीं बल्कि पूरे दान प्रबंधन तंत्र की समीक्षा भी शामिल रही।
जांच के दौरान निम्न पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया—
मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग।
नकदी गिनने की प्रक्रिया।
चढ़ावे के संग्रह और जमा करने की प्रणाली।
संबंधित कर्मचारियों के बयान।
बैंक लेनदेन और लेखा अभिलेख।
डिजिटल रिकॉर्ड और लॉगबुक।
सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट।
SIT ने तकनीकी विशेषज्ञों की भी मदद ली ताकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण किया जा सके।
मुख्य आरोपी और जांच का दायरा
मामले में पहले ही कई लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। जांच एजेंसी ने मंदिर प्रशासन से जुड़े विभिन्न कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए। जिन लोगों पर संदेह व्यक्त किया गया, उनके वित्तीय लेनदेन, मोबाइल रिकॉर्ड और गतिविधियों की भी जांच की गई।
सूत्रों के अनुसार, कुछ आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ भी की गई ताकि बयानों में मौजूद विरोधाभासों को दूर किया जा सके।
दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों पर रहा जोर
SIT ने जांच के दौरान केवल मौखिक बयानों पर निर्भर रहने के बजाय दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों को प्राथमिकता दी। मंदिर के वित्तीय रिकॉर्ड, कैश बुक, प्राप्ति रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा का मिलान किया गया।
विशेषज्ञों ने डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच भी की ताकि किसी प्रकार की छेड़छाड़ या डेटा में बदलाव की संभावना का पता लगाया जा सके।
जांच पूरी, रिपोर्ट तैयार
सूत्रों के अनुसार SIT ने लगभग सभी आवश्यक गवाहों के बयान दर्ज कर लिए हैं। तकनीकी रिपोर्ट, दस्तावेजी साक्ष्य और फॉरेंसिक विश्लेषण भी जांच फाइल का हिस्सा बनाए जा चुके हैं।
अब जांच एजेंसी अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर चुकी है। रिपोर्ट में किन लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं और किन्हें क्लीन चिट दी गई है, इसका खुलासा चार्जशीट दाखिल होने के बाद ही हो सकेगा।
क्या जल्द दाखिल होगी चार्जशीट?
जांच पूरी होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण चरण अदालत में चार्जशीट दाखिल करने का है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद SIT संबंधित अदालत में आरोपपत्र प्रस्तुत करेगी। इसके बाद अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की न्यायिक कार्रवाई तय करेगी।
यदि किसी आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पाए जाते हैं, तो उसके विरुद्ध मुकदमे की सुनवाई शुरू हो सकती है। वहीं जिन लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं होंगे, उन्हें राहत मिल सकती है।
ट्रस्ट और प्रशासन का रुख
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से पहले भी कहा गया है कि वह जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रहा है। ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर की दान व्यवस्था पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जाती है और यदि कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश पुलिस और SIT ने भी जांच के दौरान किसी प्रकार की जल्दबाजी से बचते हुए सभी तथ्यों का सत्यापन किया। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर की गई है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर पहलू की गहन जांच की गई।
मंदिर सुरक्षा और दान प्रबंधन पर उठे सवाल
इस मामले ने देशभर में धार्मिक स्थलों पर दान प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि करोड़ों रुपये के चढ़ावे वाले बड़े धार्मिक संस्थानों में आधुनिक डिजिटल लेखा प्रणाली, ऑटोमेटेड कैश मैनेजमेंट, बेहतर निगरानी व्यवस्था और नियमित ऑडिट की आवश्यकता है।
कई धार्मिक संस्थानों ने भी इस घटना के बाद अपनी सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय प्रक्रियाओं की समीक्षा शुरू कर दी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
आगे क्या?
अब सभी की नजर अदालत में दाखिल होने वाली चार्जशीट पर टिकी है। चार्जशीट से यह स्पष्ट होगा कि जांच एजेंसी ने किन लोगों की भूमिका संदिग्ध मानी है, किसके खिलाफ कौन-कौन से साक्ष्य जुटाए गए हैं और आगे मुकदमे की दिशा क्या होगी।
राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच न केवल न्यायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए भी अत्यंत आवश्यक मानी जा रही है। जांच पूरी होने के बाद अब कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण का इंतजार है, जिससे इस चर्चित मामले की वास्तविक स्थिति न्यायालय के समक्ष स्पष्ट हो सकेगी।
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