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उत्तर प्रदेश:अयोध्या श्रीराम मंदिर दान पात्र विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कथित चढ़ावे में अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। यह फैसला श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की जांच तेजी से पूरी की जाएगी और टीम को शुरुआती और अंतिम रिपोर्ट जल्द से जल्द सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
गठित SIT में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत (IAS), आईजी रेंज किरण एस (IPS) और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। यह टीम मंदिर से जुड़े दान और वित्तीय लेन-देन की जांच करेगी।
इसी बीच राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। बीजेपी नेता रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि राम मंदिर ट्रस्ट के गठन से अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों को सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि भगवान राम सत्य और पारदर्शिता के प्रतीक हैं, इसलिए ट्रस्ट की कार्यप्रणाली भी पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
वहीं, राम मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि उनकी भूमिका केवल निर्माण कार्य की निगरानी तक सीमित है। उन्होंने दान से जुड़े कथित घोटाले के आरोपों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अयोध्या में दान व्यवस्था और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और सभी तथ्यों की गहराई से पड़ताल की जाएगी।





