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उत्तर प्रदेश
सरकारी अस्पतालों के फार्मासिस्टों के लिए अहम पहल, नए पदनाम की सिफारिश
nidhi
30 Oct 2026 8:31 AM IST

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फार्मासिस्टों की पुरानी मांग पर बढ़ा कदम
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में तैनात फार्मासिस्टों के पदनाम बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक ने फार्मासिस्ट का पदनाम ‘फार्मेसी अधिकारी’ और चीफ फार्मासिस्ट का पदनाम ‘मुख्य फार्मेसी अधिकारी’ करने की संस्तुति के साथ प्रस्ताव शासन को भेजा है। फार्मासिस्ट संगठन लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था। हालांकि, उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार मामला अभी प्रस्ताव और संस्तुति के स्तर पर है; शासन की अंतिम मंजूरी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
पदनाम परिवर्तन का प्रस्ताव आगे बढ़ने से फार्मासिस्ट संवर्ग को नई पहचान मिलने की उम्मीद जगी है। डिप्लोमा फार्मासिस्ट राजपत्रित अधिकारी एसोसिएशन ने इसे संगठन के लगातार प्रयासों का परिणाम बताया है। संगठन का कहना है कि इस विषय पर शासन और महानिदेशालय स्तर पर कई बार मांग रखी गई थी। बैठकों और ज्ञापनों के माध्यम से पदनाम में बदलाव का मुद्दा उठाया जाता रहा है। अब प्रस्ताव शासन तक पहुंचने के बाद संगठन को सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा है। एसोसिएशन के प्रदेश प्रवक्ता एवं लखनऊ जिला अध्यक्ष राजीव कुमार के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष जेके सचान और प्रदेश महामंत्री प्रद्युम्न सिंह के नेतृत्व में पदनाम परिवर्तन के लिए प्रयास किए गए। उन्होंने बताया कि फार्मासिस्टों के अधिकारों, सम्मान और पदनाम से जुड़े विषयों पर संगठन लगातार अपनी बात रखता रहा है। उनके मुताबिक, प्रस्ताव को शासन की स्वीकृति मिलने पर संबंधित संवर्ग को नया पदनाम प्राप्त हो सकेगा।
प्रस्ताव में मुख्य बदलाव फार्मासिस्ट और चीफ फार्मासिस्ट के पदों के लिए सुझाया गया है। फार्मासिस्ट के स्थान पर ‘फार्मेसी अधिकारी’ तथा चीफ फार्मासिस्ट के स्थान पर ‘मुख्य फार्मेसी अधिकारी’ नाम रखने की संस्तुति की गई है। प्रकाशित विवरण में प्रभारी अधिकारी, विशेष कार्याधिकारी और उप निदेशक के फार्मेसी संबंधी पदनामों को यथावत दर्शाया गया है। इससे स्पष्ट है कि प्रस्ताव का केंद्र संवर्ग के शुरुआती दो उल्लिखित पदनामों में परिवर्तन है।
इस विषय पर समिति ने दूसरे राज्यों की व्यवस्था और भारत के राजपत्र का अध्ययन किया है। समिति के अनुसार, प्रस्तावित पदनाम परिवर्तन से विभाग पर अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पदनाम बदलने और वेतन संबंधी लाभ मिलने को एक ही निर्णय नहीं माना जा सकता। ताजा रिपोर्ट में पदनाम परिवर्तन की संस्तुति का उल्लेख है; वेतन वृद्धि, नए भत्ते या किसी आर्थिक लाभ की स्वीकृति की जानकारी नहीं दी गई है। जून में भी फार्मासिस्ट संगठन ने पदनाम और वेतनमान में संशोधन की मांग उठाई थी। उस समय प्रतिनिधिमंडल ने महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था। संगठन ने केंद्रीय राजपत्र का संदर्भ देते हुए उत्तर प्रदेश में भी बदलाव लागू करने की मांग रखी थी। अक्टूबर में सामने आए घटनाक्रम से पदनाम परिवर्तन की मांग पर प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ने की जानकारी मिली है।
फिलहाल नए पदनाम लागू होने की तारीख सामने नहीं आई है। उपलब्ध जानकारी में शासन की अंतिम स्वीकृति या लागू करने संबंधी आदेश का उल्लेख भी नहीं है। इसलिए सरकारी अस्पतालों में सभी फार्मासिस्टों का पदनाम तत्काल बदल जाने का दावा करना समयपूर्व होगा। प्रस्ताव मंजूर होने और संबंधित निर्देश जारी होने के बाद ही इसके औपचारिक क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट होगी। संगठन के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि शासन प्रस्ताव पर जल्द निर्णय लेगा। उनके लिए यह लंबे समय से उठाई जा रही मांग पर आगे बढ़ा कदम है। अब निगाहें शासन की मंजूरी पर हैं, जिसके बाद फार्मासिस्ट और चीफ फार्मासिस्ट के लिए प्रस्तावित नए पदनामों को औपचारिक पहचान मिल सकेगी।
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