उत्तर प्रदेश

शाहबुद्दीन रज़वी का बयान – बाबरी मस्जिद के नाम पर मस्जिद निर्माण पर संविधान की आज़ादी का जिक्र

SHIDDHANT
21 Nov 2025 11:55 PM IST
शाहबुद्दीन रज़वी का बयान – बाबरी मस्जिद के नाम पर मस्जिद निर्माण पर संविधान की आज़ादी का जिक्र
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Bareilly बरैली : भारतीय इस्लामिक विद्वान शाहबुद्दीन रज़वी ने पश्चिम बंगाल के मुरशिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर मस्जिद बनाने की टीएमसी विधायक हुमायूँ कबीर की योजना पर बयान दिया। रज़वी ने कहा कि हुमायूँ कबीर अगर मस्जिद बनाना चाहते हैं, तो उन्हें इसे अच्छे ढंग से बनाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, मंदिर और अन्य धार्मिक स्थल बनाने की अनुमति सभी को है, बशर्ते कि यह कानून की सीमा में हो।
रज़वी ने अपने बयान में संविधान की इस खूबसूरती को उजागर किया कि स्वतंत्र भारत में प्रत्येक व्यक्ति धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार रखता है। उन्होंने कहा, "हमारे संविधान की खूबसूरती यही है कि यहां हर व्यक्ति स्वतंत्र है, मुसलमान स्वतंत्र हैं, और समाज भी पूरी तरह स्वतंत्र है।" उनका यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि भारत में धर्म निर्माण और पूजा स्थलों के निर्माण पर किसी प्रकार की रोक नहीं है, जब तक कि वह कानूनी दायरे में किया जा रहा हो।
उन्होंने कहा कि धर्म निर्माण के अधिकार को किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति से जोड़कर विवादित बनाने की आवश्यकता नहीं है। "कानून के दायरे में किसी भी धार्मिक स्थल का निर्माण किसी भी धर्म के अनुयायी कर सकते हैं। यही लोकतंत्र और संविधान की सच्ची ताकत है। इस अवसर पर रज़वी ने सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों के निर्माण को समाज में विवाद का कारण नहीं बनाना चाहिए, बल्कि इसे धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाना चाहिए।
विशेष रूप से, रज़वी ने टीएमसी विधायक की पहल का समर्थन करते हुए कहा कि धार्मिक स्थल निर्माण के मामले में सभी समुदायों के लिए समान अवसर और अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में निहित स्वतंत्रता का मतलब यही है कि हर नागरिक अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार कार्य कर सकता है, बशर्ते वह कानूनी और सामाजिक सीमाओं का पालन करता हो।
शाहबुद्दीन रज़वी का यह बयान पश्चिम बंगाल में धार्मिक स्थलों के निर्माण और संविधान में निहित धार्मिक स्वतंत्रता पर व्यापक चर्चा का केंद्र बन गया है। उनके विचारों में यह स्पष्ट किया गया कि भारत में धर्म और कानून के बीच संतुलन बना रहना चाहिए, और किसी भी समुदाय के धार्मिक अधिकारों को चुनौती नहीं दी जानी चाहिए।
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