उत्तर प्रदेश

सात बहनों ने छोड़ी मोह-माया, लंदन का करियर और CA की नौकरी छोड़ चुनी दीक्षा की राह

Kavita2
1 Nov 2026 9:29 AM IST
सात बहनों ने छोड़ी मोह-माया, लंदन का करियर और CA की नौकरी छोड़ चुनी दीक्षा की राह
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सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में सात युवतियों ने सांसारिक सुख-सुविधाओं और सफल करियर की संभावनाओं से आगे बढ़कर संयम, साधना और आत्मकल्याण का मार्ग अपनाने का संकल्प लिया है। इन सात बहनों के फैसले ने समाज के लोगों को भावुक कर दिया। इनमें एक युवती लंदन में न्यायिक क्षेत्र में प्रतिष्ठित पद हासिल करने की दहलीज तक पहुंच चुकी थीं, जबकि दूसरी कोलकाता में करीब दस वर्षों तक चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में काम कर चुकी हैं। इसके बावजूद उन्होंने सांसारिक उपलब्धियों के बजाय आध्यात्मिक जीवन को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया। सहारनपुर में आयोजित भव्य बिनौली यात्रा और गोद भराई समारोह के दौरान सातों बहनों के संकल्प का धार्मिक परंपराओं के साथ सम्मान किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में समाज के लोग और परिजन शामिल हुए। इस दौरान कई लोगों की आंखें नम हो गईं।

जानकारी के अनुसार, सातों बहनों ने जीवन की सामान्य अपेक्षाओं से अलग रास्ता चुनते हुए आत्मकल्याण के लिए संयम और साधना का जीवन अपनाने का फैसला किया है। जिस उम्र में अधिकांश युवा उच्च शिक्षा, अच्छी नौकरी, प्रतिष्ठा और आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रयास करते हैं, उसी उम्र में इन युवतियों ने आध्यात्मिक साधना को अपना लक्ष्य बनाया है। उनके इस निर्णय को धार्मिक समाज में विशेष महत्व दिया जा रहा है।

सातों बहनों के सम्मान में सहारनपुर में बिनौली यात्रा का आयोजन किया गया। इस यात्रा के दौरान धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन किया गया। समाज के लोगों ने बहनों के निर्णय का सम्मान करते हुए उनके भावी आध्यात्मिक जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। आयोजन में श्रद्धा, उत्साह और भावुकता का वातावरण देखने को मिला।

लंदन में न्यायिक करियर की दहलीज तक पहुंची युवती ने चुना साधना का मार्ग

इन सात बहनों में शामिल एक युवती ने विदेश में अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए थे। वह लंदन में न्यायिक क्षेत्र में प्रतिष्ठित पद हासिल करने की दहलीज तक पहुंच चुकी थीं। उनके सामने पेशेवर जीवन में आगे बढ़ने की संभावनाएं थीं, लेकिन उन्होंने अलग रास्ता चुनने का निर्णय लिया।

उनका यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि विदेश में न्यायिक क्षेत्र में करियर बनाना एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है। इसके लिए उच्च शिक्षा, कठिन परिश्रम और लंबे समय तक तैयारी की आवश्यकता होती है। हालांकि, युवती की शैक्षणिक योग्यता और संबंधित पद के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

दस साल तक CA के रूप में काम करने के बाद लिया फैसला

सात बहनों में शामिल दूसरी युवती ने कोलकाता में चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में करीब दस वर्षों तक काम किया। वित्तीय क्षेत्र में लंबे अनुभव और पेशेवर पहचान के बावजूद उन्होंने आध्यात्मिक जीवन अपनाने का संकल्प लिया।

चार्टर्ड अकाउंटेंसी एक प्रतिष्ठित पेशा है, जिसमें आर्थिक प्रबंधन, लेखांकन, कर व्यवस्था और वित्तीय मामलों से जुड़ी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। लगभग एक दशक तक इस क्षेत्र में काम करने के बाद जीवन की दिशा बदलने का उनका निर्णय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

इस निर्णय से यह भी सामने आता है कि आध्यात्मिक जीवन की ओर आकर्षण केवल किसी एक उम्र या पेशे तक सीमित नहीं है। अलग-अलग शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि वाले लोग भी अपनी व्यक्तिगत आस्था के अनुसार जीवन का मार्ग चुन सकते हैं।

बिनौली यात्रा में दिखा धार्मिक उत्साह

सहारनपुर में आयोजित बिनौली यात्रा के दौरान सातों बहनों के संकल्प का सम्मान किया गया। जैन धार्मिक परंपरा में बिनौली यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है। दीक्षा से पहले आयोजित होने वाले ऐसे समारोहों में दीक्षा लेने का संकल्प करने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया जाता है।

इस दौरान परिवार और समाज के लोग धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अपनी शुभकामनाएं देते हैं। सहारनपुर में आयोजित समारोह में भी ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। एक ओर परिवार के सदस्यों की आंखों में अपनों से अलग होने की भावुकता थी, तो दूसरी ओर सातों बहनों के चेहरों पर अपने निर्णय को लेकर दृढ़ता दिखाई दी।

गोद भराई समारोह में भी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया। परिजनों और समाज के लोगों ने बहनों के संकल्प का सम्मान किया। आयोजन ने परिवार और आध्यात्मिक जीवन के बीच भावनात्मक संबंधों को भी सामने रखा।

संयम और साधना का जीवन अपनाने की तैयारी

जैन परंपरा में दीक्षा का विशेष धार्मिक महत्व है। दीक्षा लेने वाले व्यक्ति सांसारिक जीवन से अलग होकर धार्मिक अनुशासन, अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं। साधु-साध्वियों का जीवन सामान्य गृहस्थ जीवन से काफी अलग होता है।

इस जीवन में व्यक्तिगत सुविधाओं और भौतिक इच्छाओं को सीमित करने के साथ धार्मिक नियमों का पालन करना होता है। साधना, स्वाध्याय और आत्मचिंतन को विशेष महत्व दिया जाता है। यही कारण है कि दीक्षा लेने का निर्णय धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि, सातों बहनों की औपचारिक दीक्षा कब और कहां होगी, इस संबंध में उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। बिनौली यात्रा और गोद भराई समारोह उनके संकल्प के सम्मान में आयोजित किए गए हैं।

परिजनों की आंखें हुईं नम

समारोह के दौरान सबसे भावुक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब परिवार के सदस्यों ने सातों बहनों को उनके नए जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। परिजनों के लिए यह क्षण खुशी और भावुकता दोनों से भरा रहा।

जिन बेटियों को परिवार ने पढ़ाया-लिखाया और जीवन में आगे बढ़ते देखा, उनके आध्यात्मिक जीवन अपनाने के निर्णय ने परिवार के लोगों को भावुक कर दिया। हालांकि, बहनों के चेहरों पर अपने संकल्प को लेकर दृढ़ता दिखाई दी।

सातों बहनों का यह निर्णय व्यक्तिगत आस्था, आध्यात्मिक प्राथमिकताओं और जीवन के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है। उनके लिए आत्मकल्याण और साधना का मार्ग सांसारिक उपलब्धियों से अधिक महत्वपूर्ण बन गया है।

सहारनपुर में आयोजित यह समारोह अब धार्मिक समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है। सातों बहनों के संकल्प ने यह संदेश दिया है कि जीवन में सफलता और संतुष्टि की परिभाषा प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है। किसी के लिए करियर और प्रतिष्ठा महत्वपूर्ण हैं, तो किसी के लिए आध्यात्मिक साधना और आत्मकल्याण जीवन का प्रमुख उद्देश्य बन सकते हैं।

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