उत्तर प्रदेश

UP सरकार को झटका, कर्मचारियों के वेतन लाभ पर हाईकोर्ट का फैसला

Ratna Netam
23 July 2026 8:32 PM IST
UP   सरकार को झटका, कर्मचारियों के वेतन लाभ पर हाईकोर्ट का फैसला
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पशुपालन विभाग के कर्मचारियों के वेतनमान से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार की विशेष अपील खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि जब दो अलग-अलग पदों का विलय कर उन्हें एक ही संवर्ग (कैडर) में शामिल कर दिया गया है, तो पुराने पदनाम के आधार पर कर्मचारियों को अलग-अलग वेतनमान देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि संबंधित कर्मचारियों को एक जनवरी 1986 से 1350-2200 रुपये का वेतनमान सभी परिणामी लाभों के साथ दिया जाए। अदालत ने सरकार को आदेश का पालन तीन महीने के भीतर करने को कहा है।

यह आदेश राज्य सरकार की उस विशेष अपील पर सुनाया गया है, जिसमें सरकार ने 24 जुलाई 2019 को एकलपीठ द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती दी थी। एकलपीठ ने भी कर्मचारियों के पक्ष में फैसला देते हुए समान वेतनमान देने के निर्देश दिए थे।

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, वर्ष 1981 से 1986 के बीच पशुपालन विभाग में लाइव स्टॉक डेवलपमेंट असिस्टेंट, जिसे बाद में लाइव स्टॉक एक्सटेंशन इंस्पेक्टर कहा गया, और लाइव स्टॉक एक्सटेंशन ऑफिसर के पद अलग-अलग थे। हालांकि दोनों पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता और कार्य की प्रकृति लगभग समान थी।

कर्मचारियों की ओर से वेतनमान में अंतर को लेकर शिकायत की गई थी। इसके बाद मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई। समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि दोनों पदों के कार्यों में कोई वास्तविक अंतर नहीं है और दोनों पद समान जिम्मेदारियों से जुड़े हुए हैं।

समिति की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने 3 मार्च 1990 और 5 जून 1991 को शासनादेश जारी कर दोनों पदों का एक जनवरी 1986 से प्रभावी विलय कर दिया। इसके बाद दोनों पदों को एक ही संवर्ग में शामिल कर सभी कर्मचारियों को समान वेतनमान देने का निर्णय लिया गया।

हालांकि, इसके बाद 2 अप्रैल 1992 को जारी शासनादेश में केवल उन कर्मचारियों को 1350-2200 रुपये का संशोधित वेतनमान दिया गया, जो एक जनवरी 1986 से पहले लाइव स्टॉक एक्सटेंशन ऑफिसर के पद पर नियुक्त थे। वहीं, विलय के बाद उसी संवर्ग में शामिल अन्य कर्मचारियों को पुराने वेतनमान पर ही रखा गया।

इस फैसले को कर्मचारियों ने भेदभावपूर्ण बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि जब दोनों पदों का विलय कर एक ही कैडर बना दिया गया है और कार्य भी समान हैं, तो वेतनमान में अंतर रखना समानता के अधिकार के खिलाफ है।

हाईकोर्ट ने कर्मचारियों की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि एक बार पदों का विलय हो जाने के बाद कर्मचारियों के बीच केवल पुराने पदनाम के आधार पर अंतर नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि समान कार्य और समान संवर्ग में शामिल कर्मचारियों को समान वेतनमान मिलना चाहिए।

फैसले के बाद पशुपालन विभाग के संबंधित कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। अदालत के आदेश से उन कर्मचारियों को आर्थिक लाभ मिलेगा, जो लंबे समय से वेतनमान में समानता की मांग कर रहे थे।

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