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सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का निधन, अखिलेश यादव ने दी श्रद्धांजलि

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS) में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
सपा के मीडिया प्रभारी सुशील पांडेय ने बताया कि राम गोविंद चौधरी ने शुक्रवार रात करीब नौ बजे एसजीपीजीआई में अंतिम सांस ली। वह पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे और करीब दो सप्ताह पहले उन्हें एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था। इससे पहले भी उनका अलग-अलग अस्पतालों में इलाज हुआ था।
एसजीपीजीआई के निदेशक डॉ. आरके धीमान ने भी उनके निधन की पुष्टि की। अस्पताल से जुड़ी जानकारी के मुताबिक राम गोविंद चौधरी कई दिनों से पोस्टऑपरेटिव आईसीयू में भर्ती थे और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। शुक्रवार रात उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने के बाद उनका निधन हो गया।
सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का निधन, अखिलेश यादव ने दी श्रद्धांजलि
राम गोविंद चौधरी के निधन पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गहरा दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने शोक संदेश में उनके निधन को अत्यंत दुखद बताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति मिलने की प्रार्थना की। उन्होंने राम गोविंद चौधरी को भावभीनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्री राम गोविंद चौधरी जी का निधन, अत्यंत दुःखद !
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) September 25, 2026
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल प्राप्त हो।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि ! pic.twitter.com/8GeCP8UcpT
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पूर्व नेता प्रतिपक्ष के निधन पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने राम गोविंद चौधरी के निधन को दुखद बताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में संबल मिलने की कामना की। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी वरिष्ठ समाजवादी नेता के निधन पर शोक जताया।
राम गोविंद चौधरी उत्तर प्रदेश की समाजवादी राजनीति के पुराने और प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उनका राजनीतिक सफर करीब पांच दशकों तक फैला रहा। उन्होंने छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और बाद में समाजवादी आंदोलन से जुड़ गए। जयप्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की समाजवादी विचारधारा का उनके राजनीतिक जीवन पर गहरा प्रभाव रहा।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में राम गोविंद चौधरी की पहचान एक प्रभावशाली वक्ता के रूप में भी रही। सदन में वह सरकार को घेरने के लिए तथ्यों, आंकड़ों और राजनीतिक तर्कों का इस्तेमाल करते थे। लंबे विधायी अनुभव के कारण उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति और विधानसभा की कार्यवाही की गहरी समझ रखने वाले नेताओं में गिना जाता था।
बलिया की राजनीति में राम गोविंद चौधरी का लंबे समय तक प्रभाव रहा। वह आठ बार विधायक चुने गए और बांसडीह समेत क्षेत्र की विधानसभा सीटों का प्रतिनिधित्व किया। समाजवादी पार्टी की सरकारों में उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी भी मिली। अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने बेसिक शिक्षा तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली थी।
वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद राम गोविंद चौधरी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। उन्होंने 2017 से 2022 तक यह जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान विधानसभा में सरकार और विपक्ष के बीच होने वाली बहसों में वह समाजवादी पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे।
राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक जीवन अलग-अलग समाजवादी नेताओं के साथ काम करते हुए आगे बढ़ा। उन्होंने जयप्रकाश नारायण और चंद्रशेखर के साथ काम किया था और बाद के वर्षों में समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के करीबी सहयोगियों में शामिल रहे। अखिलेश यादव के नेतृत्व में भी वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में बने रहे।
उनके निधन की खबर शुक्रवार रात जैसे ही बलिया पहुंची, समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में शोक फैल गया। बलिया और खासकर बांसडीह क्षेत्र में उनका लंबा राजनीतिक जुड़ाव रहा था। स्थानीय राजनीति से शुरुआत करने के बाद उन्होंने प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान बनाई और कई दशकों तक विधानसभा की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
राम गोविंद चौधरी को सदन में उनकी भाषण शैली के लिए भी जाना जाता था। राजनीतिक विरोधियों पर तीखे हमले करने के साथ वह संसदीय बहस में उदाहरण और आंकड़ों का इस्तेमाल करते थे। उनके लंबे राजनीतिक जीवन में सत्ता और विपक्ष दोनों भूमिकाओं का अनुभव शामिल था। मंत्री रहने के बाद नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने विधानसभा में सपा का नेतृत्व किया।
उनके निधन से समाजवादी पार्टी ने अपने एक पुराने और अनुभवी नेता को खो दिया है। उत्तर प्रदेश में पार्टी की कई पीढ़ियों के नेताओं के साथ काम कर चुके राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक सफर समाजवादी आंदोलन से शुरू होकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी तक पहुंचा।
अखिलेश यादव की श्रद्धांजलि के साथ सपा के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें याद किया। वहीं दूसरे राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से भी संवेदनाएं सामने आई हैं। लंबे समय तक उत्तर प्रदेश की राजनीति और विधानसभा में सक्रिय रहे राम गोविंद चौधरी के निधन के बाद उनके समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों के बीच शोक का माहौल है।





