उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के चयनित लाभार्थियों को मिले अनुमति पत्र

Ratna Netam
5 Aug 2026 4:53 PM IST
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के चयनित लाभार्थियों को मिले अनुमति पत्र
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मेरठ : उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास विभाग की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मेरठ के विकास भवन सभागार में दुग्धशाला विकास विभाग एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, पशुपालकों और स्वयं सहायता समूहों को आधुनिक डेयरी प्रबंधन, पशुपालन की नई तकनीकों, सरकारी योजनाओं और पशु स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) नूपुर गोयल ने की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जिले के किसान, पशुपालक, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं तथा विभागीय अधिकारी शामिल हुए। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि दुग्ध उत्पादन केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर पशुपालक अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि विभाग की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने किसानों से भी अपील की कि वे सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर उनका अधिक से अधिक लाभ उठाएं और आधुनिक डेयरी प्रबंधन को अपनाकर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाएं।
कार्यक्रम के दौरान **मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना 2026-27** के अंतर्गत ई-लॉटरी के माध्यम से चयनित लाभार्थियों को चयन पत्र एवं अनुमति पत्र वितरित किए गए। मुख्य विकास अधिकारी ने चयनित पशुपालकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह योजना स्वदेशी नस्ल की गायों के संरक्षण, संवर्धन और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने लाभार्थियों से योजना का सही उपयोग करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर दुग्ध आयुक्त कार्यालय, लखनऊ से श्रीमती धन लक्ष्मी ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास विभाग की 50 वर्षों की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विभाग ने पिछले पांच दशकों में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने तथा डेयरी क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उन्होंने भविष्य में भी विभाग की योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम में जूम लिंक के माध्यम से विभाग की 50 वर्षों की उपलब्धियों, पशु रोग नियंत्रण, टीकाकरण और आधुनिक डेयरी प्रबंधन पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया गया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से किसानों को पशुओं की बेहतर देखभाल, संतुलित आहार, स्वच्छता और समय पर टीकाकरण के महत्व से अवगत कराया गया।
क्षेत्रीय दुग्धशाला विकास अधिकारी नत्थू सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पवित्र सिंह गिल, सीआईआरसी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार वर्मा तथा सीडीटीआरआई की प्राचार्या वंदना सिंह ने पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से डेयरी संचालन की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि संतुलित चारा, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, समय पर टीकाकरण और आधुनिक प्रबंधन अपनाने से पशुओं की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है तथा रोगों की रोकथाम भी संभव है।
कार्यक्रम में नाबार्ड की जिला विकास प्रबंधक भावना जैन ने किसानों को बैंकिंग सुविधाओं, कृषि ऋण, डेयरी व्यवसाय के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता तथा किसान क्रेडिट कार्ड योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सेवाओं का सही उपयोग कर पशुपालक अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकते हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
वरिष्ठ दुग्ध निरीक्षक अविनाश गुप्ता ने उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 सहित विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण दूध के उत्पादन को प्रोत्साहित करने और पशुपालकों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है।
कार्यक्रम के समापन पर मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों और पशुपालकों को इनका लाभ मिल सके। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार, विभाग और किसानों के सामूहिक प्रयास से उत्तर प्रदेश का डेयरी क्षेत्र और अधिक मजबूत होगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
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