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म्यूचुअल फंड में भी निवेश की खबर
प्रयागराज: नवाबगंज थाना क्षेत्र के बरईपुर रामनगर गांव में राजेश यादव उर्फ बबलू के मकान से जमीन में दबे तीन नीले ड्रमों में मिली नकदी की गिनती पूरी होने के बाद जांच संपत्तियों और निवेश तक पहुंच गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ड्रमों से कुल तीन करोड़ 20 लाख 93 हजार रुपये बरामद हुए हैं। राजेश और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर म्यूचुअल फंड, शेयर तथा एलआईसी में निवेश की जानकारी भी सामने आने की खबर है। इन निवेशों की कुल राशि और धन के स्रोत पर अंतिम निष्कर्ष अभी स्पष्ट नहीं है।
मामले की शुरुआत 28 अक्टूबर की शाम हुई थी, जब पुलिस ने मकान में जमीन के नीचे दबे ड्रम बरामद किए। इनमें 500 रुपये के नोटों के बंडल रखे थे। सूचना मिलने के बाद आयकर विभाग की टीम जांच में शामिल हुई। मशीनों की मदद से शनिवार को गिनती पूरी की गई और रकम सील कर दी गई। मकान के अन्य हिस्सों में भी तलाशी और खुदाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में प्रयागराज और प्रतापगढ़ में जमीन खरीद से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा वाहनों, आभूषणों और वित्तीय निवेश की भी पड़ताल की जा रही है। डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार के हवाले से बताया गया है कि राजेश और उसके भाई राकेश यादव से पूछताछ जारी है। नवाबगंज थाना प्रभारी पंकज अवस्थी ने मामले की स्थिति आयकर जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होने की बात कही है।
प्रयागराज-लखनऊ राजमार्ग पर प्रतापगढ़ जिले में महंगी जमीन खरीदे जाने का दावा भी सामने आया है। हालांकि, जमीन की कीमत और निवेश संबंधी विवरण अभी जांच से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। संबंधित अधिकारियों की विस्तृत सार्वजनिक पुष्टि के बिना इन्हें अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
इससे पहले लल्लनटॉप की रिपोर्ट में बताया गया था कि पुलिस को मकान में नकदी दबाकर रखे जाने की सूचना मिली थी। तलाशी के दौरान बरामद रकम के बारे में आयकर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों को जानकारी दी गई। रिपोर्ट में ग्रामीणों के हवाले से दोनों भाइयों के पहले पुणे की एक कंपनी में काम करने का उल्लेख है। हालांकि, बरामद रकम का उस कंपनी या किसी अन्य व्यक्ति से संबंध स्थापित होने की पुष्टि नहीं हुई है। अब प्रमुख सवाल नकदी के स्वामित्व, उसके स्रोत और संपत्ति खरीद में इस्तेमाल धन से जुड़े हैं। म्यूचुअल फंड, शेयर या बीमा में निवेश होना अपने आप में अवैध गतिविधि का प्रमाण नहीं है। इस मामले में संबंधित रकम और लेनदेन की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी। फिलहाल बरामदगी और पूछताछ के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।
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