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स्कूली बच्चों को मिड-डे मील के साथ मिलेगा हलवा और उपमा, 1.80 लाख विद्यार्थियों को लाभ

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने के लिए शासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन के अतिरिक्त सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन यानी पूरक पोषण के रूप में सूजी से बना मीठा हलवा और उपमा (नमकीन हलवा) परोसा जाएगा। प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत लागू होने वाली इस व्यवस्था से वाराणसी जिले के लगभग 1.80 लाख विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। शासन की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रधानमंत्री पोषण योजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। आदेश के बाद मंडलीय सहायक निदेशक बेसिक ने वाराणसी, जौनपुर, चंदौली और गाजीपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारियों से योजना के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत कार्ययोजना मांगी है।
मिड-डे मील के साथ मिलेगा अतिरिक्त पोषण
प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों को पहले से मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाता है। अब शासन ने इस भोजन के अतिरिक्त पूरक पोषण देने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।
इसके तहत बच्चों को सूजी से तैयार मीठा हलवा और उपमा परोसा जाएगा। उपमा को नमकीन हलवे के रूप में भी जाना जाता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए अतिरिक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि हलवा और उपमा मध्याह्न भोजन के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उसके अतिरिक्त पूरक पोषण के तौर पर दिए जाएंगे।
हालांकि, सप्ताह में कितने दिन हलवा या उपमा परोसा जाएगा और प्रत्येक बच्चे को कितनी मात्रा दी जाएगी, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
वाराणसी के 1.80 लाख विद्यार्थियों को लाभ
शासन के इस निर्णय से वाराणसी जिले के लगभग एक लाख 80 हजार विद्यार्थियों को लाभ मिलने की जानकारी सामने आई है।
इनमें प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे शामिल होंगे।
विद्यालयों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में पूरक पोषण की नई व्यवस्था से बच्चों के भोजन में अतिरिक्त खाद्य पदार्थ शामिल होंगे।
वाराणसी में इस योजना के क्रियान्वयन के लिए संबंधित शिक्षा अधिकारियों को कार्ययोजना तैयार करनी होगी।
हालांकि, जिले के कितने विद्यालयों में यह व्यवस्था लागू होगी और विद्यालयवार लाभार्थियों की संख्या कितनी है, इसका विस्तृत विवरण अभी उपलब्ध नहीं है।
अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को भेजा आदेश
बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत यह आदेश जारी किया है।
आदेश वाराणसी समेत उत्तर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को भेजा गया है।
इससे स्पष्ट है कि पूरक पोषण की यह व्यवस्था केवल वाराणसी तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश स्तर पर इसे लागू करने की तैयारी की जा रही है।
आदेश के अनुसार, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन के अतिरिक्त सूजी से बने खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जाएंगे।
अब संबंधित जिलों में इस निर्देश के आधार पर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
चार जिलों से मांगी गई विस्तृत कार्ययोजना
शासन का आदेश जारी होने के बाद मंडलीय स्तर पर भी कार्रवाई शुरू हो गई है।
मंडलीय सहायक निदेशक बेसिक ने वाराणसी, जौनपुर, चंदौली और गाजीपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारियों से विस्तृत कार्ययोजना मांगी है।
इन चारों जिलों में योजना को लागू करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं का विवरण तैयार किया जाएगा।
कार्ययोजना में विद्यार्थियों की संख्या, विद्यालयों की जरूरत और पूरक पोषण उपलब्ध कराने की व्यवस्थाओं जैसे पहलुओं पर ध्यान देना उपयोगी होगा।
हालांकि, कार्ययोजना में किन-किन बिंदुओं को अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
इसी तरह कार्ययोजना जमा करने की अंतिम तारीख के बारे में भी कोई स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।
प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत नई व्यवस्था
प्रधानमंत्री पोषण योजना का उद्देश्य सरकारी और पात्र सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुसार भोजन उपलब्ध कराना है।
इस योजना के माध्यम से बच्चों के पोषण में सहायता करने और विद्यालयों में उनकी उपस्थिति तथा शिक्षा से जुड़ाव को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है।
अब इसी योजना के अंतर्गत पूरक पोषण के रूप में सूजी से बने हलवे और उपमा को शामिल करने का निर्देश दिया गया है।
यह व्यवस्था बच्चों के नियमित मध्याह्न भोजन के अतिरिक्त होगी।
हालांकि, इस नई व्यवस्था के लिए अलग से कितना बजट निर्धारित किया गया है और खाद्य सामग्री की आपूर्ति किस प्रकार होगी, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
मीठा हलवा और उपमा क्यों हैं उपयोगी?
सूजी गेहूं से तैयार होने वाला खाद्य पदार्थ है। इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाने में किया जाता है।
सूजी से मीठा हलवा और नमकीन उपमा दोनों तैयार किए जा सकते हैं। इन व्यंजनों की पोषण गुणवत्ता उनमें इस्तेमाल की जाने वाली अन्य सामग्री और उनकी मात्रा पर भी निर्भर करती है।
हलवे में सामान्यतः सूजी के साथ पानी या दूध, चीनी और घी जैसी सामग्री का उपयोग किया जाता है। वहीं, उपमा में सूजी के साथ सब्जियां और अन्य सामग्री मिलाई जा सकती हैं।
हालांकि, शासन द्वारा निर्धारित व्यंजनों की वास्तविक रेसिपी, पोषण मानक और सामग्री की मात्रा के बारे में उपलब्ध आदेश के विवरण में जानकारी नहीं दी गई है।
इसलिए विद्यालयों में इन्हें किस तरीके से तैयार किया जाएगा, यह संबंधित दिशा-निर्देशों से स्पष्ट होगा।
भोजन की गुणवत्ता पर भी देना होगा ध्यान
विद्यालयों में बच्चों को अतिरिक्त भोजन उपलब्ध कराने के साथ उसकी गुणवत्ता और स्वच्छता का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।
खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण, स्वच्छ पानी के उपयोग और भोजन को सही तरीके से तैयार करने जैसी व्यवस्थाएं बच्चों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़ी होती हैं।
इसके अलावा विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार भोजन तैयार करना और निर्धारित मात्रा में वितरण सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
पूरक पोषण की नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विद्यालय स्तर पर आवश्यक तैयारियां महत्वपूर्ण होंगी।
हालांकि, भोजन की गुणवत्ता की निगरानी के लिए कोई नई व्यवस्था बनाई गई है या नहीं, इसकी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
योजना शुरू होने की तारीख का इंतजार
शासन की ओर से आदेश जारी होने और चार जिलों से कार्ययोजना मांगे जाने के बाद अब योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
वाराणसी, जौनपुर, चंदौली और गाजीपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारियों से विस्तृत कार्ययोजना मांगी गई है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि विद्यार्थियों को हलवा और उपमा परोसने की शुरुआत किस तारीख से होगी।
इसके अलावा पूरक पोषण कितनी बार दिया जाएगा और इसके लिए विद्यालयों को किस प्रकार संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, इस संबंध में भी विस्तृत दिशा-निर्देशों की जानकारी सामने आना बाकी है।
विद्यार्थियों के पोषण पर शासन का जोर
उत्तर प्रदेश सरकार के इस निर्णय से प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन के अतिरिक्त पूरक पोषण उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।
वाराणसी के लगभग 1.80 लाख विद्यार्थियों को इस व्यवस्था का सीधा लाभ मिलने की जानकारी दी गई है।
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी किए जाने के बाद मंडलीय स्तर पर कार्ययोजना तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
अब संबंधित जिलों में योजना लागू होने की तारीख, भोजन वितरण की व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक निर्देशों का इंतजार रहेगा।





