उत्तर प्रदेश

करीबियों और रिश्तेदारों को बचाने के चक्कर में अनदेखा किया गया एसबीआई का अलर्ट

Saba Naaz
29 Jun 2026 6:58 PM IST
करीबियों और रिश्तेदारों को बचाने के चक्कर में अनदेखा किया गया एसबीआई का अलर्ट
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अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर की दान पेटियों से करोड़ों रुपये की चढ़ावा राशि चोरी होने के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस और एसआईटी (SIT) की जांच में यह सामने आया है कि देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को करीब तीन महीने पहले ही दान राशि की गिनती में बड़ी हेराफेरी का अंदेशा हो गया था। बैंक ने इस संबंध में नोट गिनने वाले कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाने की सिफारिश भी की थी, लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ तत्कालीन प्रभावशाली पदाधिकारियों और लोगों के हस्तक्षेप (दबाव) के कारण उस समय कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।

आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए हुई थी आरोपियों की बहाली

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले भारी-भरकम कैश (नकदी) को गिनने और उसे बैंक में जमा करने का जिम्मा एसबीआई के माध्यम से एक निजी आउटसोर्सिंग एजेंसी को दिया गया था। इसी एजेंसी के माध्यम से अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, रमाशंकर मिश्रा, अवनीश और करुणेश शुक्ला जैसे कर्मचारियों की नियुक्ति नोटों की गिनती के काम में की गई थी। एसबीआई को जब इनके कामकाज और दान राशि के मिलान में अंतर दिखा, तो उन्होंने अलर्ट जारी किया था। जांच एजेंसियां अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि बैंक की चेतावनी के बाद भी इन दागी कर्मचारियों को किसका संरक्षण प्राप्त था। यह भी जांचा जा रहा है कि क्या इन आरोपियों का ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ लोगों के साथ कोई व्यक्तिगत या पारिवारिक संबंध था, जिसके कारण इन्हें बचाया जा रहा था।

चंपत राय का बयान दर्ज, कई पूर्व ट्रस्टी रडार पर

चढ़ावा चोरी के इस हाई-प्रोफाइल मामले के तार अब मंदिर ट्रस्ट के पूर्व शीर्ष अधिकारियों से जुड़ते दिख रहे हैं। पुलिस ने इस सिलसिले में राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का आधिकारिक बयान दर्ज कर लिया है। इसके अलावा, सूत्रों के मुताबिक जांच की आंच पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव तक भी पहुंच गई है, जिन्हें जल्द ही पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया जा सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा पहले ही ट्रस्ट के पदों से अलग हो चुके हैं। इस पूरे सिंडिकेट में बैंक के अंदरूनी लोगों की भूमिका भी संदिग्ध है। पुलिस इस मामले में बैंक से जुड़े दो कर्मचारियों—रत्नेश और गगनदीप की भूमिका की गहनता से जांच कर रही है, जिनकी मौजूदगी में दान राशि की गिनती की प्रक्रिया पूरी की जाती थी।

अब तक 8 गिरफ्तार, वित्तीय प्रवाह खंगाल रही SIT

इस बहुचर्चित घोटाले में पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) अब तक मुख्य सरगना टिन्नू यादव समेत कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जांच का दायरा केवल चोरी तक सीमित नहीं है; एसआईटी अब आरोपियों और उनके मददगारों के बैंक खातों, संपत्तियों, अवैध धन के प्रवाह (मनी ट्रेल) और अन्य वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि चोरी की गई इस पवित्र राशि को कहां-कहां खपाया गया। इस खुलासे के बाद अयोध्या से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हड़कंप मच गया है।

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