उत्तर प्रदेश

सावा-कोदो-ज्वार-बाजरा की खेती को मिलेगा बढ़ावा, किसानों को मिलेगी मदद

Kavita2
12 July 2026 5:45 PM IST
सावा-कोदो-ज्वार-बाजरा की खेती को मिलेगा बढ़ावा, किसानों को मिलेगी मदद
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Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: जिले में पौष्टिक और कम लागत वाली श्री अन्न (मिलेट्स) की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। वर्ष 2026-27 के लिए श्री अन्न की विभिन्न फसलों के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है। विभाग का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक गेहूं और धान की खेती के साथ-साथ सावा, कोदो, ज्वार और बाजरा जैसी फसलों की ओर आकर्षित करना है।

कृषि विभाग के अनुसार, आने वाले कृषि वर्ष में सावा की खेती 700 हेक्टेयर क्षेत्र में कराने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं कोदो की फसल के लिए 800 हेक्टेयर, ज्वार की खेती के लिए 5500 हेक्टेयर और बाजरा उत्पादन के लिए 943 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है। इन फसलों के रकबे को बढ़ाने के लिए किसानों के बीच लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि श्री अन्न की फसलें किसानों के लिए कई मायनों में फायदेमंद हैं। इन फसलों को कम पानी और कम लागत में तैयार किया जा सकता है। साथ ही, बदलते मौसम और जल संकट के बीच मिलेट्स की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।

फिलहाल जिले के अधिकांश किसान परंपरागत रूप से गेहूं और धान की खेती को प्राथमिकता देते हैं। लंबे समय से चली आ रही कृषि पद्धति के कारण अन्य फसलों का उत्पादन सीमित रहा है। अब कृषि विभाग किसानों को श्री अन्न के महत्व, उत्पादन तकनीक और बाजार की संभावनाओं के बारे में जानकारी देकर उन्हें इन फसलों की खेती के लिए प्रेरित कर रहा है।

किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विभाग की ओर से निश्शुल्क किट भी उपलब्ध कराई जा रही है। इन किटों में खेती के लिए आवश्यक बीज और अन्य सामग्री शामिल है, जिससे किसानों को शुरुआती स्तर पर आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, श्री अन्न में पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है और इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। यही कारण है कि देश और दुनिया में मिलेट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। सरकार भी श्री अन्न को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है, ताकि किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को पौष्टिक खाद्य विकल्प उपलब्ध कराया जा सके।

जिले में सावा, कोदो, ज्वार और बाजरा के उत्पादन को बढ़ाने के लिए कृषि विभाग गांव-गांव जाकर किसानों से संपर्क कर रहा है। विभागीय कर्मचारियों द्वारा किसानों को फसल चयन, बीज प्रबंधन, बुवाई की तकनीक और उत्पादन के बाद बाजार उपलब्ध कराने से जुड़ी जानकारी दी जा रही है।

अधिकारियों का मानना है कि श्री अन्न की खेती बढ़ने से किसानों को अतिरिक्त आय का साधन मिलेगा। साथ ही, कृषि क्षेत्र में विविधता आएगी और केवल गेहूं-धान पर निर्भरता कम होगी।

कृषि विभाग की योजना है कि अधिक से अधिक किसानों को मिलेट्स उत्पादन से जोड़ा जाए। इसके लिए किसान गोष्ठियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों का आयोजन किया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि निर्धारित क्षेत्रफल में श्री अन्न की खेती सफलतापूर्वक कराई जाए और जिले को मिलेट्स उत्पादन के क्षेत्र में आगे बढ़ाया जाए।

विशेषज्ञों के अनुसार, कम लागत, कम पानी की जरूरत और बेहतर पोषण मूल्य के कारण आने वाले समय में श्री अन्न की खेती किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि किसानों को सही तकनीक और बाजार की सुविधा मिलती है तो यह फसलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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