उत्तर प्रदेश

स्नैपचैट चैट से खुला सौरभ हत्याकांड का राज, मुस्कान-साहिल की प्लानिंग आई सामने

nidhi
4 Oct 2026 9:57 AM IST
स्नैपचैट चैट से खुला सौरभ हत्याकांड का राज, मुस्कान-साहिल की प्लानिंग आई सामने
x
सौरभ हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा

मेरठ : सौरभ हत्याकांड में जांच के दौरान चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। मामले में आरोपी मुस्कान और साहिल पर आरोप है कि दोनों ने सौरभ की हत्या की योजना बनाने के लिए स्नैपचैट का इस्तेमाल किया था। जांच में डिजिटल बातचीत से जुड़े सुरागों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरोप है कि हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए नीले ड्रम का इस्तेमाल किया गया और उसे छिपाने की कोशिश की गई।

जांच एजेंसियां मामले में आरोपियों की डिजिटल गतिविधियों को खंगाल रही हैं। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और दोनों के बीच हुई बातचीत से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हत्या की योजना कब बनी और इसे किस तरह अंजाम दिया गया। स्नैपचैट से जुड़ी कथित बातचीत भी जांच के दायरे में है।
पुलिस के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों से हत्या से पहले और बाद की गतिविधियों की कड़ियां जोड़ने में मदद मिल सकती है। आरोपियों के बीच किस समय बातचीत हुई, किन स्थानों पर उनकी मौजूदगी रही और वारदात के बाद उन्होंने किससे संपर्क किया, इन सभी पहलुओं को जांच में शामिल किया जा रहा है।
इस हत्याकांड का सबसे सनसनीखेज पहलू शव को नीले ड्रम में छिपाने का आरोप रहा है। जांच में सामने आए दावों के मुताबिक वारदात के बाद शव को ड्रम में रखा गया। इसके बाद उसे छिपाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए गए। ड्रम के ऊपर पौधा लगाने की बात भी सामने आई है। जांच अधिकारी इससे जुड़े भौतिक और फोरेंसिक साक्ष्यों का मिलान कर रहे हैं। मामले में मुस्कान और साहिल की भूमिका की जांच के साथ पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वारदात की तैयारी कितने समय पहले शुरू हुई थी। क्या दोनों ने पहले से हत्या की योजना बनाई थी या घटनाक्रम के दौरान परिस्थितियां बदलीं, यह जांच और न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगा।
डिजिटल साक्ष्य इस केस की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हुई बातचीत, फोन की लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी जानकारियों का इस्तेमाल घटनाक्रम की समयरेखा तैयार करने में किया जा सकता है। फोरेंसिक जांच से मिले निष्कर्षों को भी अन्य सबूतों और बयानों के साथ जोड़ा जाएगा। हत्या जैसे गंभीर मामलों में केवल किसी एक डिजिटल चैट के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय सभी साक्ष्यों की पुष्टि जरूरी होती है। इसलिए जांच एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के साथ घटनास्थल से मिले साक्ष्य और अन्य गवाहियों का भी मिलान कर रही है।
सौरभ हत्याकांड पहले से ही शव को छिपाने के कथित तरीके के कारण चर्चा में रहा है। अब स्नैपचैट पर हत्या की कथित प्लानिंग की बात सामने आने से मामले में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। फिलहाल मुस्कान और साहिल पर लगे आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगा। जांच में सामने आने वाली डिजिटल और फोरेंसिक रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि कथित साजिश किस तरह तैयार की गई और वारदात से जुड़े घटनाक्रम में दोनों की क्या भूमिका रही।
Next Story