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उत्तर प्रदेश
पुलिस हिरासत में दलित युवक की मौत पर यूपी सरकार पर बरसे संजय सिंह
Ratna Netam
30 Aug 2026 6:36 PM IST

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बदायूं : उत्तर प्रदेश के बदायूं में पुलिस हिरासत में एक दलित युवक की मौत का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस घटना को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में जिन पुलिसकर्मियों पर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वही कई बार अत्याचार का कारण बन रहे हैं।
संजय सिंह ने कहा कि पुलिस कस्टडी में किसी व्यक्ति की मौत बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम नागरिक अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस के पास जाता है, तो अगर वही व्यवस्था सवालों के घेरे में आ जाए तो न्याय की उम्मीद कैसे पूरी होगी। उन्होंने इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
पुलिस हिरासत में मौत पर उठे सवाल
बदायूं में पुलिस हिरासत में दलित युवक की मौत की खबर सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। परिवार की ओर से आरोप लगाए गए कि युवक के साथ पुलिस ने गलत व्यवहार किया। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर नाराजगी भी देखने को मिली।
हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से मामले की जांच की बात कही गई है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
संजय सिंह ने भाजपा सरकार को घेरा
आप सांसद संजय सिंह ने इस घटना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन पुलिस हिरासत में मौत जैसी घटनाएं उन दावों पर सवाल खड़े करती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में दलित, गरीब और कमजोर वर्गों के लोगों को न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना चाहिए।
दलित सुरक्षा का मुद्दा फिर गरमाया
बदायूं की घटना के बाद दलित सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार भाजपा सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि प्रदेश में कमजोर वर्गों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
विपक्ष का कहना है कि पुलिस और प्रशासन को जनता के विश्वास का प्रतीक होना चाहिए, लेकिन अगर हिरासत में ही मौत हो जाती है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
भाजपा सरकार का जवाब
वहीं भाजपा की ओर से विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया जाता रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि योगी सरकार में कानून व्यवस्था को मजबूत किया गया है और किसी भी अपराध या पुलिसकर्मी की गलती पर कार्रवाई की जाती है।
सरकार का कहना है कि किसी भी घटना में दोषियों को बचाया नहीं जाता और जांच के आधार पर उचित कदम उठाए जाते हैं।
पुलिस सुधार और जवाबदेही पर चर्चा
पुलिस हिरासत में मौत के मामले अक्सर पुलिस व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करना पुलिस की जिम्मेदारी है।
ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच, सीसीटीवी निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
परिवार के लिए न्याय की मांग
मृतक के परिवार की मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय मिलना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
वहीं प्रशासन की ओर से मामले की जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल
बदायूं की घटना को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इसे कानून व्यवस्था और दलित सुरक्षा से जोड़कर सरकार को घेर रहा है, जबकि भाजपा सरकार अपने स्तर पर कार्रवाई और जांच की बात कर रही है।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कानून व्यवस्था हमेशा चुनावी और राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा रही है। ऐसे में पुलिस हिरासत से जुड़ी कोई भी घटना तुरंत राजनीतिक चर्चा का विषय बन जाती है।
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