उत्तर प्रदेश

राहुल गांधी पर संबित पात्रा का हमला, SIR को लेकर कांग्रेस को घेरा

Kavita2
2 Nov 2026 2:21 PM IST
राहुल गांधी पर संबित पात्रा का हमला, SIR को लेकर कांग्रेस को घेरा
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वाराणसी। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस तथा विपक्षी दलों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोमवार को सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस वर्ष 2014 से 19 फरवरी 2025 तक 56 चुनाव हार चुकी है। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ये 56 हार उसके माथे पर 56 टिकुली की तरह लगी हुई हैं और राहुल गांधी तथा कांग्रेस नेता इन्हें लेकर घूम रहे हैं। पात्रा ने कहा कि कांग्रेस चुनाव SIR की वजह से नहीं, बल्कि अपने कर्मों और कुकर्मों की वजह से हार रही है।

56 चुनावों में हार का दावा, कांग्रेस पर साधा निशाना

संबित पात्रा ने अपने संबोधन में कांग्रेस की चुनावी स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद से कांग्रेस लगातार चुनावी चुनौतियों का सामना कर रही है।

उन्होंने कहा कि 19 फरवरी 2025 तक कांग्रेस के खाते में 56 चुनावी हार दर्ज हो चुकी थीं। इसी संख्या को लेकर उन्होंने '56 टिकुली' वाला राजनीतिक तंज कसा।

पात्रा ने कहा कि कांग्रेस इन चुनावी पराजयों का जिम्मेदार चुनाव आयोग और SIR जैसी प्रक्रियाओं को ठहराने की कोशिश कर रही है, जबकि पार्टी को अपनी हार के वास्तविक कारणों पर आत्ममंथन करना चाहिए।

हालांकि, 56 चुनावों की इस संख्या में किन-किन चुनावों को शामिल किया गया है और हार की गणना किस आधार पर की गई है, इसका विस्तृत ब्योरा उन्होंने बातचीत में स्पष्ट नहीं किया। इसलिए यह आंकड़ा भाजपा प्रवक्ता का राजनीतिक दावा है।

कई राज्यों में कांग्रेस की सत्ता से दूरी का किया जिक्र

भाजपा सांसद ने देश के विभिन्न राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस कई प्रदेशों में पिछले 10 से 40 वर्षों तक सत्ता से बाहर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि चुनाव आयोग की प्रक्रिया ही कांग्रेस की हार का कारण होती, तो अलग-अलग समय और परिस्थितियों में पार्टी को लगातार चुनावी नुकसान नहीं उठाना पड़ता।

पात्रा ने कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक कमजोरियों को स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का उद्देश्य SIR को लेकर भ्रम, झूठ और अराजकता का वातावरण बनाना है। पात्रा ने कहा कि कांग्रेस देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करके 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन का वातावरण तैयार करना चाहती है। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं।

12 SIR और कांग्रेस के कार्यकाल का किया उल्लेख

संबित पात्रा ने अपने बयान में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के पुराने इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि देश में अब तक 12 बार SIR की प्रक्रिया हो चुकी है और इनमें से 10 बार यह कांग्रेस के शासनकाल में आयोजित की गई थी।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस के शासनकाल में भी मतदाता सूचियों का गहन पुनरीक्षण कराया गया था, तब पार्टी ने इसका विरोध क्यों नहीं किया? अब वही प्रक्रिया लागू होने पर कांग्रेस इसे लोकतंत्र के लिए खतरा क्यों बता रही है?

पात्रा ने कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन रखना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं के नामों की जांच करना एक नियमित प्रशासनिक आवश्यकता है।

हालांकि, SIR के ऐतिहासिक आंकड़ों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में गणना का आधार अलग है। इंडियन एक्सप्रेस की ऐतिहासिक समीक्षा के अनुसार, 1952 से 2004 के बीच अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में गहन पुनरीक्षण के कई चरण आयोजित हुए। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त ने नवंबर 2025 में मौजूदा प्रक्रिया को आजादी के बाद का नौवां SIR बताया था। इसलिए पात्रा द्वारा बताए गए 12 और उनमें से 10 कांग्रेस शासनकाल वाले आंकड़े को उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

ज्ञानेश कुमार के बचाव में भाजपा का तर्क

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर भी संबित पात्रा ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज पर राजनीतिक लाभ-हानि के आधार पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

पात्रा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार से पहले भी देश में कई चुनाव हुए हैं और उस समय भी कांग्रेस को चुनावी हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में हर हार के लिए वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त को जिम्मेदार बताना राजनीतिक आरोपों से अधिक कुछ नहीं है।

उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि जब ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे, तब हुए चुनावों में पार्टी को हार क्यों मिली? उनके अनुसार, कांग्रेस को अपनी संगठनात्मक स्थिति और चुनावी रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।

गौरतलब है कि ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला था। इससे पहले वह चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यरत थे।

विपक्ष की महारैली और CEC के खिलाफ अभियान पर भी निशाना

संबित पात्रा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब इंडिया गठबंधन ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट चोरी' और SIR के विरोध में महारैली आयोजित की थी। इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और कई विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने भाग लिया था।

इससे पहले विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक प्रतीकात्मक महाभियोग कार्यक्रम भी आयोजित किया था। इसमें 19 विपक्षी दलों के 250 से अधिक सांसदों ने हिस्सा लिया था। विपक्ष ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची में नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।

विपक्ष का कहना है कि SIR के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है और चुनाव आयोग को इस प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता बरतनी चाहिए। वहीं, भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है और विपक्ष इस प्रक्रिया को राजनीतिक मुद्दा बना रहा है।

चुनाव आयोग की भूमिका पर जारी है राजनीतिक बहस

SIR को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच जारी विवाद अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें चुनाव आयोग की निष्पक्षता, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए हैं।

भाजपा का तर्क है कि चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने देना चाहिए और मतदाता सूची की जांच का विरोध नहीं होना चाहिए। वहीं विपक्ष का कहना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी पात्र नागरिक का मताधिकार प्रभावित न हो।

फिलहाल संबित पात्रा के '56 टिकुली' वाले बयान ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। भाजपा ने कांग्रेस की चुनावी हार को उसके राजनीतिक प्रदर्शन से जोड़ते हुए SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। दूसरी ओर, विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर अपनी मांगों पर कायम है।

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