उत्तर प्रदेश

यूपी में ‘पूजा घी’ की बिक्री पर रोक

Ashish verma
11 Oct 2026 12:19 AM IST
यूपी में ‘पूजा घी’ की बिक्री पर रोक
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Puja Ghee’ banned in UP : पूजा, हवन और दीपक जलाने के लिए बनाए जाने वाले अखाद्य वसा उत्पाद अब ‘पूजा घी’ के नाम से नहीं बेचे जा सकेंगे। इनके पैकेट पर ‘घी’ शब्द लिखने पर रोक लगा दी गई है। साथ ही पैकेट पर काले रंग का क्रॉस निशान लगाना और हिंदी तथा अंग्रेजी में ‘खाने के लिए नहीं’ लिखना अनिवार्य होगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने प्रदेश की सभी संबंधित इकाइयों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों का केंद्र ऐसे वसा उत्पाद हैं, जिन्हें खाने के बजाय धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल के लिए बनाया जाता है। पूजा, हवन और दीपक जलाने में उपयोग होने वाले इन अखाद्य उत्पादों की पहचान पैकेट पर स्पष्ट करनी होगी। इन्हें ‘पूजा घी’ लिखकर बेचने की अनुमति नहीं होगी। पैकेट पर प्रयुक्त नाम और चेतावनी से उपभोक्ता को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उत्पाद खाने के लिए नहीं है।
नई व्यवस्था में नाम, संकेत और लिखित चेतावनी, तीनों पर ध्यान दिया गया है। पहला निर्देश पैकेट पर ‘घी’ शब्द के इस्तेमाल को रोकता है। दूसरा, काले रंग का क्रॉस निशान लगाना जरूरी करता है। तीसरा, हिंदी और अंग्रेजी में उत्पाद के अखाद्य होने की चेतावनी लिखना अनिवार्य बनाता है। संबंधित इकाइयों को इन निर्देशों के अनुसार पैकेट पर जानकारी देनी होगी। केवल पूजा में उपयोग का उल्लेख करना निर्धारित चेतावनी का विकल्प नहीं होगा।
‘पूजा घी’ नाम पर रोक का संबंध अखाद्य वसा उत्पादों से है। निर्देश में पूजा, हवन और दीपक जलाने के लिए तैयार किए जाने वाले उत्पादों का स्पष्ट उल्लेख है। इसलिए इस आदेश को सभी प्रकार के घी की बिक्री पर रोक के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। सामने आए निर्देश ऐसे उत्पादों की पैकेजिंग और बिक्री के नाम से संबंधित हैं, जो खाने योग्य नहीं हैं और धार्मिक उपयोग के लिए बनाए जाते हैं।
पैकेट पर ‘घी’ शब्द नहीं लिखा जा सकेगा। इसके साथ उत्पाद की अखाद्य प्रकृति बताने के लिए अलग से चेतावनी देनी होगी। हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में यह जानकारी लिखना अनिवार्य किया गया है। इससे पैकेट पढ़ने वाले व्यक्ति को उत्पाद के उपयोग की सीमा स्पष्ट रूप से बताई जाएगी। निर्देश में किसी एक भाषा में चेतावनी देने की छूट का उल्लेख नहीं है। दोनों भाषाओं में जानकारी देना आवश्यक होगा।
काले रंग का क्रॉस निशान भी पैकेट की पहचान का हिस्सा बनेगा। लिखित चेतावनी के साथ यह संकेत लगाने का निर्देश दिया गया है। हालांकि निशान का आकार, पैकेट पर उसकी निश्चित जगह और चेतावनी के अक्षरों का आकार उपलब्ध विवरण में नहीं बताया गया है। इसलिए इन तकनीकी पहलुओं के बारे में अतिरिक्त दावा नहीं किया जा सकता। स्पष्ट निर्देश काले क्रॉस और हिंदी-अंग्रेजी चेतावनी की अनिवार्यता से संबंधित है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने प्रदेश की सभी संबंधित इकाइयों को निर्देश दिए हैं। इससे आदेश का दायरा किसी एक इकाई तक सीमित नहीं है। धार्मिक उपयोग के लिए बनाए जाने वाले संबंधित अखाद्य वसा उत्पादों के पैकेट पर निर्धारित जानकारी देनी होगी। उत्पाद को ‘पूजा घी’ नाम से बेचने और पैकेट पर ‘घी’ लिखने की व्यवस्था बदलनी होगी। निर्देशों में उत्पाद की सही पहचान पर जोर है।
उपभोक्ताओं के लिए पैकेट पर लिखा नाम किसी उत्पाद को पहचानने का प्रमुख आधार होता है। ऐसे में अखाद्य उत्पाद पर ‘घी’ शब्द लिखे होने से उसकी प्रकृति स्पष्ट नहीं रहती। जारी निर्देश में इसी पहचान को स्पष्ट करने वाली शर्तें रखी गई हैं। पैकेट पर ‘खाने के लिए नहीं’ लिखे होने से उपयोगकर्ता को उत्पाद के बारे में सीधी जानकारी मिलेगी। यह चेतावनी धार्मिक उपयोग और खाने के उपयोग के बीच अंतर बताएगी।
इन उत्पादों का उल्लेख पूजा, हवन और दीपक जलाने के संदर्भ में किया गया है। निर्देश उनके धार्मिक उपयोग को प्रतिबंधित करने के बजाय बिक्री के नाम और पैकेट पर दी जाने वाली जानकारी तय करते हैं। उपलब्ध विवरण में उत्पादन बंद करने अथवा इनका हर तरह का उपयोग रोकने का आदेश नहीं है। मुख्य बदलाव यह है कि अखाद्य वसा उत्पाद को ‘घी’ के नाम से प्रस्तुत नहीं किया जा सकेगा और उसकी प्रकृति पैकेट पर बतानी होगी।
निर्देशों के उल्लंघन पर किस प्रकार की कार्रवाई होगी, जुर्माना कितना होगा अथवा अनुपालन के लिए अलग समयसीमा क्या है, इसका विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए किसी दंड या अंतिम तारीख का उल्लेख नहीं किया जा सकता। इसी तरह पहले से बाजार में मौजूद पैकेटों के संबंध में अलग प्रक्रिया की जानकारी भी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल संबंधित इकाइयों के लिए नाम और लेबल से जुड़े स्पष्ट निर्देश सामने आए हैं।
जारी आदेश के अनुसार, पूजा और हवन के लिए तैयार अखाद्य वसा उत्पादों के पैकेट पर अब ‘घी’ नहीं लिखा जाएगा। काले रंग का क्रॉस निशान और हिंदी-अंग्रेजी में ‘खाने के लिए नहीं’ की चेतावनी अनिवार्य होगी। आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने सभी संबंधित इकाइयों को इन निर्देशों का पालन करने के लिए कहा है।
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