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Education और समाजसेवा के प्रतीक स्वामी कल्याणदेव महाराज को संतों ने किया याद, हुआ भव्य आयोजन

Shuktirtha शुकतीर्थ : शुकतीर्थ (मुजफ्फरनगर)। धार्मिक नगरी शुकतीर्थ स्थित प्रसिद्ध श्री शुकदेव आश्रम में मंगलवार को महान राष्ट्रसंत और वीतराग स्वामी कल्याणदेव महाराज की 22वीं पुण्यतिथि श्रद्धा, भक्ति और गरिमामय वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर देश और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे संतों, जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने ब्रह्मलीन स्वामी जी की समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ हुआ। समाधि स्थल पर पादुका पूजन, माल्यार्पण और विशेष हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने विश्व शांति और लोक कल्याण की कामना करते हुए यज्ञ में आहुतियां दीं। पूरे आश्रम परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने स्वामी कल्यानदेव महाराज के जीवन और समाजसेवा के कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वामी जी केवल एक संत नहीं थे, बल्कि लोक कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले महान व्यक्तित्व थे।
स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि स्वामी कल्याणदेव महाराज ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए। उन्होंने अपने जीवनकाल में करीब 366 शिक्षण संस्थाओं की स्थापना कर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाई। इन संस्थानों से शिक्षा प्राप्त कर हजारों विद्यार्थी देश-विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने शुकतीर्थ, हस्तिनापुर, कुरुक्षेत्र और पुष्कर जैसे धार्मिक स्थलों के विकास और जीर्णोद्धार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समारोह के मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि गुरु का स्थान जीवन में सबसे ऊंचा होता है। उन्होंने स्वामी कल्याणदेव महाराज के शिक्षा और समाज सुधार के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संतों का योगदान समाज को नई दिशा देता है।
मंत्री गणेश जोशी ने शुकतीर्थ में गंगा की अविरल धारा बनाए रखने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मां गंगा का प्रवाह शुकतीर्थ में निरंतर बना रहे, इसके लिए वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करेंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि स्वामी कल्याणदेव महाराज ने संत परंपरा के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का विस्तार कर समाज को मजबूत बनाया। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति के लिए ‘ऋषि और कृषि’ दोनों परंपराओं को मजबूत करना जरूरी है। ग्रामीण शिक्षा और कृषि व्यवस्था को सशक्त बनाकर ही देश आगे बढ़ सकता है।
श्रद्धांजलि सभा में सांसद हरेन्द्र मलिक ने स्वामी जी को महान शिक्षा ऋषि बताते हुए कहा कि किसी भी समाज के विकास के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने स्वामी कल्याणदेव महाराज की स्मृति को स्थायी बनाने के लिए जनपद में राजकीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग रखी।
इस अवसर पर जिला पंचायत प्रशासक डॉ. वीरपाल निर्वाल, एमएलसी वंदना वर्मा सहित कई जनप्रतिनिधियों और संतों ने स्वामी जी के आदर्शों को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में हनुमंत धाम के पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप आनंद सरस्वती महाराज, गोवर्धन दास महाराज, एसडीएम रश्मि लांबा, पूर्व सांसद सईदुज्जमा, पूर्व विधायक प्रमोद ऊंटवाल समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन ओमदत्त देव आर्य ने किया।
श्रद्धांजलि सभा के समापन के बाद आश्रम परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।





