उत्तर प्रदेश

Saharanpur प्रशासन का बड़ा कदम, मतदान व्यवस्था में सुधार

Ratna Netam
5 July 2026 4:55 PM IST
Saharanpur  प्रशासन का बड़ा कदम, मतदान व्यवस्था में सुधार
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Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश : सहारनपुर जनपद में मतदाताओं को बेहतर मतदान सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मतदेय स्थलों का पुनर्गठन किया गया है। इस प्रक्रिया के तहत 1200 से अधिक मतदाताओं वाले मतदान केंद्रों और बूथों में आवश्यक बदलाव किए गए हैं।

जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि पुनर्गठन के बाद जिले में मतदान केंद्रों और बूथों की संख्या में मामूली बदलाव हुआ है। पहले जहां जनपद में 1312 मतदान केंद्र थे, अब यह संख्या घटकर 1311 रह गई है। इसी तरह मतदेय स्थलों (बूथों) की संख्या 3018 से घटकर 2991 हो गई है, यानी कुल 27 बूथ कम किए गए हैं।उन्होंने बताया कि यह बदलाव मतदाताओं की सुविधा और मतदान प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से किया गया है, ताकि किसी भी बूथ पर अत्यधिक भीड़ की स्थिति न बने और मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो सके।

सहारनपुर की सातों विधानसभा क्षेत्रों में भी बूथों और मतदान केंद्रों का पुनर्वितरण किया गया है। बेहट विधानसभा सीट पर अब 214 मतदान केंद्र और 441 बूथ होंगे। नकुड़ विधानसभा क्षेत्र में 228 मतदान केंद्र और 435 बूथ निर्धारित किए गए हैं।सहारनपुर नगर विधानसभा क्षेत्र में 110 मतदान केंद्र और 495 बूथ बनाए गए हैं। वहीं सहारनपुर ग्रामीण क्षेत्र में 191 मतदान केंद्र और 416 बूथ रहेंगे। देवबंद विधानसभा क्षेत्र में 177 मतदान केंद्र और 398 बूथ निर्धारित किए गए हैं।

रामपुर मनिहारान विधानसभा क्षेत्र में अब 178 मतदान केंद्र और 362 बूथ रहेंगे, जबकि गंगोह विधानसभा क्षेत्र में 213 मतदान केंद्र और 444 बूथ तय किए गए हैं।जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने बताया कि इस पूरी पुनर्गठन सूची को विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों को भेजा जा रहा है, ताकि सभी को इसकी जानकारी उपलब्ध हो सके और किसी प्रकार की आपत्ति या सुझाव होने पर उसे समय रहते देखा जा सके।

प्रशासन का कहना है कि यह कदम चुनावी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे मतदान केंद्रों पर भीड़ कम होगी और मतदाताओं को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।कुल मिलाकर, सहारनपुर प्रशासन द्वारा किया गया यह पुनर्गठन आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए एक प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य मतदाता सुविधा और मतदान प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाना है।

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