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देवरिया: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में शनिवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब फतेहपुर गांव के एक निजी स्कूल परिसर में स्कूल प्रबंधक की खून से लथपथ लाश मिली। मृतक की पहचान 55 वर्षीय धनंजय पाल के रूप में हुई है, जो गांव में ही स्थित डीडीएम पब्लिक स्कूल के संचालक थे। यह हत्या न केवल क्रूरता की हदें पार करती है, बल्कि इसने गांववालों को भय और आशंका में भी डाल दिया है। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाकर जांच शुरू कर दी है।
मॉर्निंग वॉक पर नहीं दिखे तो बढ़ी चिंता
घटना का खुलासा शनिवार सुबह उस वक्त हुआ जब गांव के कुछ लोग रोज़ाना की तरह मॉर्निंग वॉक पर निकले। धनंजय पाल प्रतिदिन सुबह वॉक पर निकलते थे और ग्रामीणों से मुलाकात करते थे। लेकिन शनिवार को जब वह नहीं दिखाई दिए, तो लोगों ने संदेहवश स्कूल परिसर की ओर रुख किया। वहां एक तख्त पर उनका शव खून से लथपथ पड़ा मिला और आसपास बिखरा खून भयावह मंजर पेश कर रहा था।
कुल्हाड़ी से गला काटकर हत्या
मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने जांच शुरू की और घटनास्थल के पास से हत्या में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली। पुलिस अधीक्षक विक्रांत वीर ने बताया, “धनंजय पाल की हत्या किसी धारदार हथियार, संभवतः कुल्हाड़ी से सिर और गर्दन पर किए गए वारों से हुई है। प्रारंभिक जांच में यह साफ है कि हत्या सोते समय की गई है।”
रात में स्कूल में ही सोए थे धनंजय
परिवार वालों ने बताया कि धनंजय पाल रोज़ाना की तरह शुक्रवार रात भोजन करने के बाद स्कूल परिसर में ही सोने चले गए थे। उनका घर स्कूल से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। स्कूल 8वीं कक्षा तक संचालित होता है और गांव में उनकी एक सम्मानजनक पहचान थी।
सुबह जब गांववालों ने स्कूल के खुले गेट के अंदर जाकर देखा तो तख्त पर उनका शव पड़ा था और बिस्तर खून से पूरी तरह भीगा हुआ था। हत्या इतनी बेरहमी से की गई थी कि मौके की भयावहता ने हर देखने वाले को हिला कर रख दिया।
सूचना मिलते ही गांव में मचा हड़कंप
धनंजय पाल की मौत की खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीण स्कूल परिसर में इकट्ठा हो गए। परिजन बदहवास थे, गांव के बुजुर्ग स्तब्ध थे और युवाओं में आक्रोश था। लोगों को यकीन नहीं हो रहा था कि गांव में इतने शांत स्वभाव के व्यक्ति की कोई इस तरह बेरहमी से हत्या कर सकता है।
112 पर दी गई सूचना, पुलिस ने किया मौका मुआयना
परिजनों और ग्रामीणों ने तत्काल 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। थोड़ी ही देर में रुद्रपुर थाना पुलिस, क्षेत्राधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने घटनास्थल से खून के नमूने, अंगुलियों के निशान, बिस्तर की स्थिति और हथियार को कब्जे में लिया है।
पुलिस अधीक्षक विक्रांत वीर ने प्रेस को जानकारी देते हुए कहा, “हत्या की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। परिवार वालों से पूछताछ जारी है और तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।”
दुश्मनी की कोई ठोस वजह सामने नहीं
धनंजय पाल के परिजनों का कहना है कि उन्हें किसी विशेष व्यक्ति से दुश्मनी की आशंका नहीं थी। वह समाजसेवी प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और बच्चों की शिक्षा के लिए ही उन्होंने स्कूल शुरू किया था। हालांकि पुलिस को आशंका है कि किसी पुराने विवाद या जमीन-जायदाद को लेकर रंजिश हो सकती है, या फिर किसी निजी विवाद ने इस हत्याकांड को जन्म दिया है।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच शुरू
परिजनों की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ धारा 302 (हत्या) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने गांव के कई लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है और स्कूल परिसर के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। इसके अलावा, धनंजय के मोबाइल कॉल डिटेल्स की भी जांच की जा रही है, जिससे किसी संदिग्ध की पहचान हो सके।
गांव में डर और मातम का माहौल
फतेहपुर गांव, जो अब तक शिक्षा और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए जाना जाता था, अब इस जघन्य हत्या की वजह से चर्चा में है। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय कोई आवाज़ नहीं आई, जिससे आशंका जताई जा रही है कि हत्या बड़ी चालाकी और योजना से की गई है।
एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया, “हम सभी धनंजय जी को बहुत मानते थे। उनके स्कूल में गांव के कई बच्चे पढ़ते हैं। उनकी हत्या से पूरा गांव शोक में डूब गया है।”
बेटों और बेटी के सिर से उठा पिता का साया
धनंजय पाल अपने पीछे तीन बेटे और एक बेटी को छोड़ गए हैं। उनका परिवार अब इस सदमे में है। सबसे छोटा बेटा अभी हाई स्कूल की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी इंटरमीडिएट की छात्रा है। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरा परिवार बदहवास स्थिति में है।
निष्कर्ष
धनंजय पाल की हत्या ने देवरिया के फतेहपुर गांव को झकझोर कर रख दिया है। एक शिक्षाविद, समाजसेवी और परिवार के मुखिया की हत्या केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक हानि भी है। इस प्रकार की नृशंस घटनाएं यह सवाल उठाती हैं कि क्या हमारे गांव अब भी सुरक्षित हैं? पुलिस की जांच से ही यह सामने आएगा कि आखिर कौन था वह बेरहम हत्यारा, जिसने शिक्षा के एक सिपाही को हमेशा के लिए खामोश कर दिया।





