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उत्तर प्रदेश
युवाओं के लिए 1,725 करोड़ की योजना, CM योगी करेंगे शुभारंभ
Rajeshwari Nishad
30 Oct 2026 10:33 PM IST

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती और राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश की महत्वाकांक्षी 'सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना' का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन राजधानी लखनऊ स्थित लोक भवन सभागार में प्रस्तावित है। इस योजना के तहत अगले तीन वर्षों में लगभग 1,725 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। प्रदेश सरकार ने सभी 75 जिलों को नौ जोन में बांटकर कौशल प्रशिक्षण और रोजगार का एकीकृत नेटवर्क विकसित करने की योजना बनाई है। पहले चरण में लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, गौतमबुद्ध नगर और झांसी में आधुनिक प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण देकर देश और विदेश में रोजगार के अवसरों से जोड़ना है।
राष्ट्रीय एकता दिवस पर युवाओं के लिए विशेष पहल
31 अक्टूबर को देशभर में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है।इस वर्ष उनकी 151वीं जयंती मनाई जाएगी। इसी अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं के कौशल विकास और रोजगार से जुड़ी नई योजना शुरू करने जा रही है।प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ के लोक भवन सभागार से योजना की औपचारिक शुरुआत करेंगे।सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रखकर उन्हें रोजगार के अवसरों से भी जोड़ना है।इसके लिए कौशल प्रशिक्षण केंद्रों, औद्योगिक संस्थानों और रोजगार उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा।
1,725 करोड़ रुपये का है पूरा प्रोजेक्ट
इस महत्वाकांक्षी योजना पर अगले तीन वर्षों में लगभग 1,725 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में नौ अक्टूबर को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई थी।योजना के तहत आधुनिक प्रशिक्षण केंद्रों का विकास, तकनीकी सुविधाओं का विस्तार और रोजगार से संबंधित व्यवस्थाएं तैयार की जाएंगी।इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्रों में उद्योगों की मांग के अनुसार पाठ्यक्रम संचालित करने की योजना है।सरकार सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी से परियोजना को आगे बढ़ाएगी।यह राशि तीन वर्षों के लिए प्रस्तावित कुल व्यय है। इसे एक ही दिन में खर्च की जाने वाली रकम या युवाओं को सीधे बांटी जाने वाली सहायता राशि नहीं समझना चाहिए।
प्रदेश के सभी 75 जिले होंगे शामिल
योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसका दायरा प्रदेश के सभी 75 जिलों तक होगा।इसके लिए उत्तर प्रदेश को नौ भौगोलिक जोन में विभाजित किया जाएगा।हर जोन में स्थानीय उद्योगों की जरूरत, उपलब्ध संसाधनों और रोजगार की संभावनाओं के अनुसार प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित होगी।उदाहरण के लिए, जिन क्षेत्रों में विनिर्माण उद्योगों का विस्तार है, वहां तकनीकी कौशल से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर जोर दिया जा सकता है।इसी तरह सेवा क्षेत्र, व्यापार और अन्य गतिविधियों की मांग के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे।सरकार का लक्ष्य प्रशिक्षण और रोजगार की उपलब्धता के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।
पहले चरण में पांच शहरों में खुलेंगे केंद्र
योजना के पहले चरण में प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों को चुना गया है।इनमें लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, गौतमबुद्ध नगर और झांसी शामिल हैं।इन शहरों में आधुनिक कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे।कानपुर के चकेरी क्षेत्र में केंद्र के लिए भूमि चिह्नित की गई है।लखनऊ में वरुण विहार क्षेत्र में भूमि उपलब्ध कराए जाने की जानकारी है।गोरखपुर में गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण और झांसी में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूमि चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।गौतमबुद्ध नगर में संबंधित औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के स्तर पर भूमि चयन किया जा रहा है।प्रत्येक केंद्र के लिए लगभग 10 से 25 एकड़ भूमि की व्यवस्था का प्रावधान है।
तकनीकी और गैर-तकनीकी युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण
इस योजना का लाभ केवल तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं तक सीमित रखने की योजना नहीं है।आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके युवाओं को उनके क्षेत्र से संबंधित आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।इसके अतिरिक्त मानविकी, वाणिज्य और अन्य शैक्षिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए भी प्रशिक्षण की व्यवस्था प्रस्तावित है।इसका उद्देश्य युवाओं को उनकी योग्यता और रुचि के अनुसार नए कौशल सीखने का अवसर उपलब्ध कराना है।औद्योगिक जरूरतों के आधार पर पाठ्यक्रमों में समय-समय पर बदलाव भी किए जा सकेंगे।हालांकि, योजना में प्रवेश की न्यूनतम योग्यता, उम्र सीमा और आवेदन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी संबंधित दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
विदेशी भाषाओं का भी मिलेगा प्रशिक्षण
योजना के तहत युवाओं को देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों में उपलब्ध रोजगार अवसरों के लिए भी तैयार करने की योजना है।इसके लिए मांग के अनुसार भारतीय और विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।सरकार का मानना है कि तकनीकी दक्षता के साथ भाषा संबंधी जानकारी होने से युवाओं को अंतरराष्ट्रीय कार्यस्थलों के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।विदेशों में रोजगार के अवसरों तक पहुंचने के लिए केवल तकनीकी प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं होता। संबंधित देश के भाषा कौशल और व्यावसायिक मानकों की जानकारी भी आवश्यक हो सकती है।हालांकि, विदेशी भाषा प्रशिक्षण मिलने का अर्थ विदेश में नौकरी की गारंटी नहीं है।वास्तविक रोजगार उपलब्धता संबंधित कंपनियों की मांग, चयन प्रक्रिया और अन्य शर्तों पर निर्भर करेगी।
छात्रावास और प्लेसमेंट सेल की सुविधा
प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों में युवाओं के लिए छात्रावास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।इससे दूरदराज के जिलों से आने वाले विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्राप्त करने में सुविधा मिल सकती है।इसके अतिरिक्त केंद्रों में सेवायोजन कार्यालय और प्लेसमेंट सेल स्थापित किए जाएंगे।इनके माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को रोजगार संबंधी जानकारी और कंपनियों की भर्ती प्रक्रियाओं से जोड़ा जाएगा।नियोजकों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया जाएगा।इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार तलाशने में सहायता उपलब्ध कराना है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित होंगे केंद्र
योजना के क्रियान्वयन में निजी विकासकर्ताओं और प्रशिक्षण प्रदाताओं की भागीदारी भी प्रस्तावित है।केंद्रों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल के माध्यम से विकसित किया जा सकता है।इसके लिए परियोजना की आवश्यकता के अनुसार विशेष प्रयोजन संस्था बनाई जा सकती है।निर्धारित शर्तों के तहत विकासकर्ताओं को भूमि उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है।परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए आवश्यकता पड़ने पर वायबिलिटी गैप फंडिंग की सुविधा दी जा सकेगी।इस व्यवस्था के जरिए सरकार और निजी क्षेत्र के संसाधनों का उपयोग करके प्रशिक्षण संबंधी आधारभूत संरचना विकसित करने का प्रयास होगा।
डिजिटल तकनीक और AI से होगी निगरानी
प्रदेश सरकार ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए डिजिटल निगरानी पर भी जोर दिया है।प्रशिक्षण की गुणवत्ता, रोजगार से संबंधित गतिविधियों और परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी के लिए डिजिटल तकनीकों का उपयोग करने की योजना है।इसके अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आधारित उपकरणों का उपयोग भी किया जा सकता है।सरकार राज्य, जिला और परियोजना स्तर पर समन्वय व्यवस्था विकसित करेगी।इससे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रगति और रोजगार संबंधी परिणामों का मूल्यांकन करने में मदद मिल सकती है।हालांकि, इन तकनीकों के वास्तविक उपयोग और उनकी प्रभावशीलता का आकलन योजना लागू होने के बाद ही किया जा सकेगा।
एमएसएमई उद्योगों को भी मिलेगी मदद
उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की बड़ी संख्या है।उपलब्ध सरकारी विवरणों के अनुसार, राज्य में लगभग 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं।इन उद्योगों को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।सरकार का उद्देश्य कौशल प्रशिक्षण को औद्योगिक जरूरतों से जोड़ना है, ताकि युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और कंपनियों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।इससे स्थानीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार संबंधी अवसरों के विस्तार की संभावनाएं बन सकती हैं।
रोजगार योजना का लाभ कब से मिलेगा?
योजना का औपचारिक शुभारंभ 31 अक्टूबर को प्रस्तावित है, लेकिन प्रशिक्षण केंद्रों के निर्माण और संचालन की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी।पहले चरण के पांच केंद्रों के बाद अन्य क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण नेटवर्क विकसित किया जाएगा।युवाओं के लिए आवेदन, प्रशिक्षण की शुरुआत, पाठ्यक्रमों की सूची और चयन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी अलग से जारी होने की संभावना है।फिलहाल सरकार ने योजना का ढांचा और प्रस्तावित निवेश निर्धारित किया है।ऐसे में युवाओं को किसी भी अनधिकृत वेबसाइट या व्यक्ति के माध्यम से आवेदन शुल्क जमा करने से बचना चाहिए।आधिकारिक अधिसूचना आने के बाद ही पंजीकरण संबंधी जानकारी पर भरोसा करना उचित होगा।
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