उत्तर प्रदेश

स्कूलों में पैड बैंक से लेकर जागरूकता सत्र तक, छात्राओं के लिए मजबूत व्यवस्था

nidhi
9 Oct 2026 8:02 AM IST
स्कूलों में पैड बैंक से लेकर जागरूकता सत्र तक, छात्राओं के लिए मजबूत व्यवस्था
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यूपी के स्कूलों में बड़ी पहल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में छात्राओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने स्कूलों में मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत किया है। प्रदेश के 66,045 विद्यालयों में पैड बैंक स्थापित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही 68,358 स्कूलों में मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन (एमएचएम) क्लब गठित किए गए हैं। इन पहलों का उद्देश्य छात्राओं को जरूरत के समय सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना, मासिक धर्म से जुड़ी झिझक दूर करना और उन्हें बिना किसी बाधा के पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है।

66 हजार से अधिक स्कूलों में पैड बैंक
प्रदेश में स्कूल स्तर पर मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर शुरू की गई व्यवस्था के तहत छात्राओं के लिए पैड बैंक बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर छात्राओं को सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना है, ताकि अचानक माहवारी शुरू होने या जरूरी सामग्री उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े। सरकार की इस पहल में केवल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा, बल्कि छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता, स्वास्थ्य और सुरक्षित प्रबंधन के बारे में सही जानकारी देने का प्रयास भी किया जा रहा है।
68,358 स्कूलों में गठित हुए एमएचएम क्लब
माहवारी स्वास्थ्य प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश के 68,358 विद्यालयों में एमएचएम क्लब बनाए गए हैं। इन क्लबों के माध्यम से छात्राओं को मासिक धर्म से संबंधित स्वास्थ्य और स्वच्छता की जानकारी दी जा रही है। छात्राओं को यह समझाने पर जोर दिया जा रहा है कि मासिक धर्म एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है और इसे लेकर शर्म या झिझक महसूस करने की जरूरत नहीं है। स्कूलों में गठित इन क्लबों का उद्देश्य छात्राओं के बीच जागरूकता बढ़ाना और उन्हें अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके जरिए किशोरियों को सुरक्षित माहवारी प्रबंधन, साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी सावधानियों की जानकारी देने की व्यवस्था की जा रही है।
हजारों स्कूलों में चलाए गए जागरूकता सत्र
उत्तर प्रदेश में मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर बड़े स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 63,633 विद्यालयों में बच्चों के साथ जागरूकता सत्र आयोजित किए गए हैं। वहीं, 63,928 स्कूलों में शिक्षकों के साथ मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई है। इन कार्यक्रमों में छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखने, सैनिटरी पैड का सुरक्षित उपयोग करने और इस्तेमाल किए गए पैड के उचित निस्तारण के बारे में जानकारी दी जाती है। इसके साथ ही शिक्षकों को भी संवेदनशील तरीके से छात्राओं की समस्याओं को समझने और उनकी सहायता करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
मास्टर ट्रेनर्स को दिया गया प्रशिक्षण
स्कूलों में इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों और प्रशिक्षकों की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया है। राज्य परियोजना कार्यालय में 13 और 14 अगस्त 2026 को 209 मास्टर ट्रेनर्स के लिए कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इसके बाद 9 से 25 सितंबर के बीच प्रदेश में 450 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यालयों तक मासिक धर्म स्वास्थ्य से जुड़ी सही जानकारी पहुंचाना और जागरूकता कार्यक्रमों को नियमित गतिविधियों के रूप में आगे बढ़ाना है।
छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड देने की भी तैयारी
प्रदेश सरकार सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में उन किशोरियों को भी शामिल करने की योजना है, जो स्कूल नहीं जा रही हैं या बीच में पढ़ाई छोड़ चुकी हैं।
इस पहल का उद्देश्य है कि आर्थिक स्थिति या जरूरी सामग्री की अनुपलब्धता के कारण किसी भी किशोरी की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसके साथ मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े विषयों को स्कूल की नियमित शैक्षिक गतिविधियों में शामिल करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
मासिक धर्म को लेकर झिझक दूर करने पर जोर
मासिक धर्म के संबंध में जानकारी का अभाव और सामाजिक झिझक कई बार किशोरियों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। ऐसे में स्कूलों में पैड बैंक और एमएचएम क्लब स्थापित करने के साथ जागरूकता कार्यक्रम चलाना महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर है, जहां छात्राओं को जरूरत के समय स्वच्छता सामग्री मिले और वे स्वास्थ्य संबंधी सवालों पर शिक्षकों से मार्गदर्शन ले सकें। स्कूलों में स्वच्छ शौचालय, पानी और हाथ धोने की सुविधाएं भी मासिक धर्म स्वच्छता के लिए महत्वपूर्ण हैं। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश के 66,045 विद्यालयों में पैड बैंक स्थापित होना मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि छात्राओं को नियमित रूप से जरूरी सामग्री और सही जानकारी कितनी प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जाती है।
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