उत्तर प्रदेश

उटंगन नदी में उफान से बढ़ी परेशानी, फतेहाबाद-बाह रोड का पुल बंद, 650 बीघा फसल जलमग्न

Kavita2
9 Sept 2026 12:19 PM IST
उटंगन नदी में उफान से बढ़ी परेशानी, फतेहाबाद-बाह रोड का पुल बंद, 650 बीघा फसल जलमग्न
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आगरा। लगातार बारिश के बाद उटंगन नदी में जलस्तर बढ़ने से आसपास के इलाकों में मुश्किलें बढ़ गई हैं। नदी में आए उफान के कारण फतेहाबाद-बाह रोड पर बने पुल पर करीब तीन फीट तक पानी भर गया, जिसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया है।

पुल पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि कोई भी व्यक्ति जोखिम उठाकर पानी के बीच से गुजरने की कोशिश न करे। वहीं, फतेहाबाद और खेरागढ़ तहसील प्रशासन ने आसपास के गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील की है।

पुल पर बढ़ा पानी, यातायात रोका गया

उटंगन नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने फतेहाबाद-बाह मार्ग पर बने पुल को बंद करने का फैसला लिया। पुल पर पानी का बहाव बढ़ने के कारण किसी भी समय खतरा पैदा हो सकता था।

प्रशासन ने पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी है और लोगों से अपील की गई है कि वे नदी और पुल के आसपास जाने से बचें।

अधिकारियों का कहना है कि पानी कम होने और स्थिति सामान्य होने के बाद ही आवागमन शुरू किया जाएगा।

गांवों में कराई गई मुनादी

बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए फतेहाबाद और खेरागढ़ तहसील प्रशासन सक्रिय हो गया है। अधिकारियों ने प्रभावित और संभावित प्रभावित गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया।

ग्रामीणों से कहा गया है कि वे नदी के किनारे न जाएं और बच्चों को भी पानी वाले क्षेत्रों से दूर रखें।

प्रशासन लगातार नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है।

650 बीघा फसलें पानी में डूबीं

उटंगन नदी के उफान का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। दोनों तहसीलों में अब तक करीब 650 बीघा फसलें जलमग्न हो चुकी हैं।

पानी भरने से बाजरा, तिलहन, दलहन और हरी सब्जियों की फसल को नुकसान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि मेहनत से तैयार की गई फसलें बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।

प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन कराया जा सकता है, जिसके आधार पर आगे राहत और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू होगी।

50 गांवों के लोगों की बढ़ी परेशानी

नदी के बढ़े जलस्तर के कारण करीब 50 गांवों के हजारों लोगों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है।

पुल बंद होने से ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों को अपने जरूरी कामों के लिए वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में उटंगन नदी का जलस्तर बढ़ने से हर साल ऐसी स्थिति बनती है।

राजस्थान की अरावली से निकलती है नदी

उटंगन नदी एक बरसाती नदी है, जो राजस्थान के करौली जिले में अरावली की पहाड़ियों से निकलती है। बारिश के दौरान इसमें पानी का प्रवाह तेजी से बढ़ जाता है।

अधिक बारिश होने पर नदी आसपास के क्षेत्रों को प्रभावित करती है। इस बार भी जलस्तर बढ़ने के कारण नदी किनारे बसे गांवों में चिंता का माहौल है।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों को लगातार क्षेत्र का निरीक्षण करने और ग्रामीणों की समस्याओं पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी तैयारियां रखी जा रही हैं।

किसानों ने मांगी राहत

फसल नुकसान के बाद किसानों ने प्रशासन से मदद की मांग की है। उनका कहना है कि जलभराव के कारण फसलें खराब हो रही हैं और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों ने नुकसान का सर्वे कराकर जल्द राहत उपलब्ध कराने की मांग की है।

जलस्तर कम होने का इंतजार

फिलहाल प्रशासन और ग्रामीणों की नजर नदी के जलस्तर पर बनी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि बारिश कम होने के बाद पानी धीरे-धीरे कम होगा और हालात सामान्य हो सकेंगे।

उटंगन नदी के उफान ने एक बार फिर बरसाती नदियों के किनारे बसे गांवों की चुनौतियों को सामने ला दिया है। प्रशासन सतर्क है, लेकिन प्रभावित लोगों को अभी भी राहत और सुरक्षित आवागमन की उम्मीद है।

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