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गोरखपुर में सरयू-राप्ती का बढ़ता जलस्तर, दर्जनों गांव बाढ़ से घिरे

उत्तर प्रदेश : गोरखपुर में सरयू और राप्ती नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर ने बड़हलगंज विकासखंड के कछार और देवार क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। नदियों का पानी तेजी से आसपास के इलाकों में फैल रहा है, जिसके चलते दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। कई संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने से सड़क संपर्क प्रभावित हो गया है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चों को भी आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। खेतों और रास्तों में पानी पहुंचने के बाद ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा के कामकाज के लिए बाहर निकलना चुनौती बन गया है। कई स्थानों पर सड़कें पानी में डूबने से गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क प्रभावित हुआ है।
गांवों के आसपास तेजी से फैल रहा पानी
सरयू और राप्ती के जलस्तर में वृद्धि का सबसे अधिक असर बड़हलगंज विकासखंड के कछार और देवार क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। नदी के आसपास बसे गांवों में पानी तेजी से फैल रहा है। कई गांवों के चारों तरफ बाढ़ का पानी जमा होने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है।
निचले इलाकों में पानी पहुंचने के बाद लोगों को अपने दैनिक कामों के लिए भी सावधानी बरतनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदियों का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। बाढ़ के पानी के कारण खेतों में भी पानी पहुंचने लगा है, जिससे फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
संपर्क मार्ग डूबे, आवागमन प्रभावित
बाढ़ का पानी कई संपर्क मार्गों तक पहुंच गया है। कुछ स्थानों पर सड़क के ऊपर पानी बहने लगा है, जिससे पैदल और दोपहिया वाहनों से आवागमन मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
जहां सड़क मार्ग पूरी तरह प्रभावित हो गया है, वहां नाव ही आवागमन का प्रमुख साधन बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी बढ़ने के साथ नावों की जरूरत भी बढ़ती जा रही है। बच्चों को स्कूल भेजना भी अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
नाव से स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
बाढ़ प्रभावित इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। संपर्क मार्गों पर पानी भरने के कारण कई बच्चे नाव के जरिए स्कूल पहुंच रहे हैं। रोजाना नाव से नदी या बाढ़ के पानी को पार कर स्कूल जाना उनके लिए जोखिम भरा है।
अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही है। तेज बहाव वाले पानी में नाव से सफर करना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में ग्रामीण प्रशासन से सुरक्षित आवागमन और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, यह जरूरी है, लेकिन बाढ़ की स्थिति में उनकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। पानी का स्तर बढ़ने पर कई रास्ते और अधिक प्रभावित हो सकते हैं, जिससे स्कूल तक पहुंचना और मुश्किल हो जाएगा।
खेतों में पानी घुसने से किसानों की चिंता
बाढ़ के पानी का असर ग्रामीण इलाकों की खेती पर भी पड़ने की आशंका है। निचले क्षेत्रों में खेतों तक पानी पहुंचने लगा है। लंबे समय तक पानी जमा रहने की स्थिति में फसलों को नुकसान हो सकता है।
किसानों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का जलस्तर जल्द नहीं घटा तो खेतों में खड़ी फसल प्रभावित हो सकती है। पशुओं के लिए चारे और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था भी चुनौती बन सकती है।
ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत
लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोग नदी के किनारे और जलभराव वाले इलाकों में जाने से बच रहे हैं। ग्रामीणों की नजर लगातार नदी के जलस्तर पर बनी हुई है।
स्थानीय स्तर पर लोग एक-दूसरे की मदद भी कर रहे हैं। जिन इलाकों में सड़क मार्ग प्रभावित हुआ है, वहां नावों के जरिए जरूरी सामान और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की जरूरत बढ़ गई है।
प्रशासन की तैयारियों की भी परीक्षा
सरयू और राप्ती के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन के सामने भी चुनौती खड़ी कर दी है। बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत और बचाव की तैयारियां महत्वपूर्ण हो गई हैं। ग्रामीणों को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी, नावों की उपलब्धता और जरूरत पड़ने पर राहत सामग्री की व्यवस्था जरूरी है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन गांवों तक पहुंच बनाए रखना है, जहां संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं। यदि जलस्तर और बढ़ता है तो प्रभावित इलाकों की संख्या भी बढ़ सकती है।
फिलहाल बड़हलगंज के कछार और देवार क्षेत्र में सरयू और राप्ती के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दर्जनों गांव पानी से घिरे हैं, संपर्क मार्ग प्रभावित हैं और बच्चों समेत ग्रामीणों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में नदियों का जलस्तर किस दिशा में जाता है, इसी पर इलाके की स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी। स्थानीय लोगों की निगाहें अब प्रशासन की राहत एवं बचाव तैयारियों के साथ-साथ नदियों के जलस्तर पर टिकी हुई हैं।





