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42 तेंदुओं का रेस्क्यू बढ़ी चिंता
Pilibhit पीलीभीत: रुहेलखंड क्षेत्र में तेंदुओं की बढ़ती आवाजाही ने ग्रामीणों के साथ वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जंगलों और गन्ने के खेतों से निकलकर तेंदुए लगातार आबादी वाले इलाकों के आसपास दिखाई दे रहे हैं। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक जुलाई से 15 सितंबर के बीच रुहेलखंड जोन और बहराइच क्षेत्र में कुल 42 तेंदुओं को रेस्क्यू किया गया। इनमें आठ तेंदुओं को चिड़ियाघरों और अन्य सुरक्षित केंद्रों में भेजा गया है जबकि सात तेंदुओं को दूसरी जगह भेजने की अनुमति का इंतजार है। रुहेलखंड के बरेली और मुरादाबाद मंडल से जुड़े जिलों में तेंदुओं की संख्या करीब 800 होने का अनुमान है। इनमें सबसे अधिक करीब 444 तेंदुए बिजनौर जिले में बताए गए हैं। इसके अलावा मुरादाबाद, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बरेली और रामपुर सहित आसपास के इलाकों में भी तेंदुओं की मौजूदगी है।
वन विभाग के लिए बारिश का मौसम सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। जंगलों के निचले हिस्सों, तराई और गन्ने के खेतों में पानी भरने के कारण तेंदुए सूखे और ऊंचे स्थानों की तलाश में आबादी के करीब पहुंच रहे हैं। इसी वजह से कई गांवों में तेंदुओं की गतिविधियां बढ़ी हैं। ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीमें अलग-अलग स्थानों पर पिंजरे लगाकर उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़ने की कोशिश कर रही हैं।
आंकड़ों के अनुसार बिजनौर में सबसे अधिक 21 तेंदुए पकड़े गए हैं। मुरादाबाद में 13, कतर्नियाघाट-बहराइच में सात और शाहजहांपुर में एक तेंदुए को रेस्क्यू किया गया। पकड़े गए कुल 42 तेंदुओं में से 25 को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद दोबारा जंगल में छोड़ा गया है। आठ तेंदुओं को चिड़ियाघरों या अन्य सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। सात तेंदुए फिलहाल स्थानांतरण की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। एक तेंदुए की पकड़े जाने के बाद मौत होने की जानकारी भी सामने आई है। रेस्क्यू किए गए तेंदुओं को इटावा लायन सफारी, लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान, कानपुर प्राणी उद्यान, रानीपुर टाइगर रिजर्व चित्रकूट और अमानगढ़ वन क्षेत्र जैसे स्थानों पर भेजा गया है। किसी तेंदुए को जंगल में छोड़ने से पहले उसके पंजों, दांतों और पूरे शरीर की जांच की जाती है। स्वस्थ पाए जाने के बाद ही उसे उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाता है।
दूसरी ओर तेंदुओं को पकड़ने के लिए लगाए जा रहे पिंजरों को लेकर भी वन विभाग को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसी स्थान पर कई दिनों तक तेंदुए की गतिविधि नहीं मिलने पर वनकर्मी पिंजरे की जगह बदलना चाहते हैं, लेकिन कई गांवों में लोग इसका विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि पिंजरा हटाए जाने के बाद तेंदुआ दोबारा गांव में आ सकता है। लगातार हो रहे रेस्क्यू से साफ है कि रुहेलखंड में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ती नजदीकी वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। ऐसे में विभाग की प्राथमिकता तेंदुओं और ग्रामीणों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए संघर्ष की घटनाओं को रोकना है।
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