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गोरखपुर में भाजपा विधायकों का रिपोर्ट कार्ड सामने, विनोद तावड़े ने गिनाईं खामियां

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने अपने विधायकों और संगठन की जमीनी स्थिति की समीक्षा तेज कर दी है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने शुक्रवार को गोरखपुर में पार्टी के विधायकों, जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इस दौरान पार्टी द्वारा विभिन्न चरणों में कराए गए आंतरिक सर्वे के आधार पर विधायकों के कामकाज और जनता के बीच उनकी सक्रियता पर चर्चा हुई।
बैठक में तावड़े ने विधानसभा क्षेत्रवार फीडबैक पर चर्चा की। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने विधायकों को जनता के बीच उनकी मौजूदगी, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और व्यवहार सहित विभिन्न बिंदुओं पर मिले फीडबैक से अवगत कराया। जहां कमियां सामने आईं, वहां उन्हें सुधार के लिए जरूरी सुझाव भी दिए गए। तावड़े ने जनप्रतिनिधियों से जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच लगातार सक्रिय रहने तथा सरकार के कामकाज के साथ अपनी सार्वजनिक छवि पर भी ध्यान देने को कहा।
बैठक में जब विधानसभा क्षेत्रों से मिले फीडबैक और उदाहरणों के आधार पर चर्चा शुरू हुई तो मौजूदा विधायकों के साथ आगामी चुनाव में टिकट की दावेदारी करने वाले नेताओं के बीच भी रिपोर्ट कार्ड को लेकर चर्चा तेज हो गई। हालांकि किस विधायक के बारे में सर्वे में क्या निष्कर्ष सामने आया, इसकी आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। मीडिया रिपोर्टों में आंतरिक सर्वे और कुछ विधायकों के प्रदर्शन को लेकर दावे किए गए हैं।
गोरखपुर क्षेत्र में कुल 62 विधानसभा सीटों को लेकर भाजपा संगठन अपनी तैयारियों की समीक्षा कर रहा है। तावड़े के प्रवास के दौरान इन विधानसभा क्षेत्रों से मिले फीडबैक को चुनावी और संगठनात्मक गतिविधियों की दिशा तय करने के आधार के रूप में देखा गया। पार्टी का विशेष जोर बूथ स्तर के संगठन को सक्रिय रखने और जनता से नियमित संवाद कायम करने पर है।
बैठक में उन क्षेत्रों पर भी मंथन हुआ जहां पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आजमगढ़ और बस्ती मंडल जैसे क्षेत्रों की राजनीतिक और संगठनात्मक परिस्थितियों पर विशेष चर्चा हुई। पार्टी स्थानीय परिस्थितियों और विधानसभा क्षेत्रवार फीडबैक के आधार पर अपनी आगे की रणनीति तैयार करने में जुटी है।
विनोद तावड़े ने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि चुनाव नजदीक आने का इंतजार करने के बजाय अभी से जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाई जाए। उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन की गतिविधियों को मजबूत करने और मतदाताओं से संवाद बढ़ाने पर जोर दिया। शुक्रवार को गोरखपुर के रानीडीहा स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में अलग-अलग सत्रों में पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं तथा मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े पदाधिकारियों के साथ बैठकें हुईं।
भाजपा नेतृत्व के लिए संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय भी समीक्षा का प्रमुख विषय रहा। तावड़े के दौरे के कार्यक्रम में सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के साथ-साथ पूर्व जनप्रतिनिधियों तथा वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से संवाद को भी शामिल किया गया। इसके जरिए वर्तमान संगठन के साथ अनुभवी नेताओं से भी क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर फीडबैक लेने की कोशिश की गई।
पार्टी की रणनीति में बूथ को चुनावी तैयारी की अहम इकाई माना जा रहा है। इसी वजह से बैठक में बूथों की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय स्तर पर जनता के साथ संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया गया। तावड़े ने क्षेत्र से मिले फीडबैक को संगठनात्मक गतिविधियों की दिशा तय करने का आधार बताया और स्थानीय मुद्दों के अनुसार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की बात कही।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की यह कवायद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी विधानसभा स्तर पर संगठन और जनप्रतिनिधियों के कामकाज की समीक्षा कर रही है। मीडिया रिपोर्टों में आंतरिक सर्वे के आधार पर कुछ मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन को लेकर असंतोष के दावे किए गए हैं, लेकिन टिकट वितरण को लेकर पार्टी की ओर से अभी कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में सर्वे रिपोर्ट को सीधे टिकट कटने या मिलने का अंतिम आधार मानना फिलहाल उचित नहीं होगा।
गोरखपुर प्रवास के दौरान हुई बैठकों से इतना स्पष्ट है कि भाजपा ने 2027 की तैयारी में विधानसभा क्षेत्रवार फीडबैक, बूथ संगठन, जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल को प्राथमिकता दी है। आने वाले महीनों में इन समीक्षाओं के आधार पर संगठनात्मक स्तर पर बदलाव या जिम्मेदारियों में फेरबदल जैसे कदम सामने आ सकते हैं, लेकिन ऐसे किसी निर्णय की आधिकारिक घोषणा होने तक इसे संभावित रणनीति के रूप में ही देखा जाना चाहिए।





