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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। अब ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ समेत वन्यजीव संरक्षण की विभिन्न योजनाओं में तैनात कर्मचारियों को अपने मानदेय के लिए केंद्र सरकार से बजट जारी होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। योगी आदित्यनाथ सरकार ने वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए एक समर्पित राज्य सेक्टर योजना शुरू की है। इसके लिए अनुपूरक बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार के अपने बजट से मिलने वाली इस धनराशि का इस्तेमाल वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न कार्यों के साथ-साथ वाचरों और अन्य फील्ड कर्मचारियों के मानदेय के भुगतान में भी किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य है कि संरक्षण कार्यों में लगे कर्मचारियों को समय पर भुगतान मिले और बजट की उपलब्धता को लेकर काम प्रभावित न हो।
केंद्र से बजट आने में देरी से होती थी परेशानी
वन्यजीव संरक्षण की कई योजनाएं केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से संचालित होती हैं। इनमें बाघ, हाथी और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए चलाए जाने वाले कार्यक्रम शामिल हैं। इन योजनाओं में बड़ी संख्या में फील्ड कर्मचारी, वाचर और अन्य संविदा या मानदेय आधारित कर्मचारी तैनात रहते हैं।
इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। वे जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों में गश्त करने, वन्यजीवों की निगरानी करने, अवैध शिकार पर नजर रखने और वन क्षेत्रों की सुरक्षा जैसे काम करते हैं। ऐसे में इनके मानदेय का समय पर भुगतान जरूरी है।
केंद्र से संबंधित योजनाओं के लिए बजट जारी होने में यदि किसी कारण से देरी होती है, तो इसका असर फील्ड कर्मचारियों के भुगतान पर भी पड़ सकता है। राज्य सरकार की नई पहल का उद्देश्य इसी तरह की स्थिति से बचना है।
100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान
राज्य सरकार ने वन्यजीव संरक्षण के लिए शुरू की गई राज्य सेक्टर योजना के तहत अनुपूरक बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह राशि राज्य के अपने बजट से उपलब्ध कराई जाएगी।
इस व्यवस्था से वन्यजीव संरक्षण से संबंधित गतिविधियों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। खास तौर पर उन कर्मचारियों के मानदेय भुगतान में आसानी होगी, जो सीधे जंगलों और वन्यजीव क्षेत्रों में काम करते हैं।
सरकार का मानना है कि फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की भूमिका संरक्षण व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक है। यदि उन्हें समय पर मानदेय मिलता रहे तो वे अधिक प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे।
वाचरों की भूमिका बेहद अहम
वन क्षेत्रों में तैनात वाचर और अन्य फील्ड कर्मचारी वन्यजीव संरक्षण की जमीनी व्यवस्था संभालते हैं। इन कर्मचारियों को जंगलों में नियमित गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने जैसे कार्य करने होते हैं।
बाघ और अन्य संरक्षित वन्यजीवों वाले क्षेत्रों में इनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने और समय रहते सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में भी फील्ड स्टाफ महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नई राज्य सेक्टर योजना से ऐसे कर्मचारियों के मानदेय भुगतान में नियमितता आने की उम्मीद है।
संरक्षण कार्यों को भी मिलेगा फायदा
राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली राशि केवल मानदेय भुगतान तक सीमित नहीं होगी। इसका इस्तेमाल वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में भी किया जा सकेगा।
संरक्षित क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था मजबूत करना, वन्यजीवों की सुरक्षा से संबंधित गतिविधियां चलाना और फील्ड स्तर पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना जैसे कार्यों में भी इस बजट का उपयोग किया जा सकता है।
सरकार की इस पहल से वन्यजीव संरक्षण की योजनाओं को वित्तीय स्थिरता देने में मदद मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर ऐसी योजनाओं में जहां लगातार फील्ड गतिविधियों की जरूरत होती है, वहां समय पर धन उपलब्ध होना महत्वपूर्ण माना जाता है।
‘प्रोजेक्ट टाइगर’ जैसे कार्यक्रमों को मजबूती
उत्तर प्रदेश में बाघ संरक्षण के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ जैसे कार्यक्रमों के तहत बाघों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा पर जोर दिया जाता है। ऐसे कार्यक्रमों की सफलता के लिए प्रशिक्षित और नियमित रूप से सक्रिय फील्ड स्टाफ जरूरी है।
राज्य सरकार की नई वित्तीय व्यवस्था से इन कर्मचारियों को भुगतान में होने वाली संभावित देरी को कम किया जा सकेगा। इससे संरक्षण कार्यों की निरंतरता बनाए रखने में भी सहायता मिल सकती है।
राज्य के बजट से आत्मनिर्भर व्यवस्था
नई योजना की सबसे अहम विशेषता यह है कि इसके लिए राज्य सरकार अपने बजट से धन उपलब्ध कराएगी। इससे वन्यजीव संरक्षण के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता को लेकर राज्य की निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
केंद्र और राज्य के बीच चलने वाली योजनाओं में अलग-अलग स्तर पर बजट और मंजूरी की प्रक्रिया होती है। ऐसे में राज्य की अपनी योजना होने से तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय विकल्प उपलब्ध रहेगा।
संरक्षण के साथ कर्मचारियों की सुरक्षा और मनोबल पर जोर
वन्यजीव संरक्षण केवल जंगल और जानवरों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसमें काम करने वाले कर्मचारियों की आर्थिक स्थिरता और मनोबल भी महत्वपूर्ण है। कठिन परिस्थितियों में जंगलों में काम करने वाले वाचरों और फील्ड कर्मचारियों को समय पर मानदेय मिलने से उनके काम के प्रति भरोसा और स्थिरता बढ़ सकती है।
योगी सरकार की यह पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 100 करोड़ रुपये के प्रावधान से जहां संरक्षण गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है, वहीं फील्ड कर्मचारियों के भुगतान की व्यवस्था भी अधिक सुचारु हो सकती है।
कुल मिलाकर, राज्य सेक्टर योजना के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वन्यजीव संरक्षण के लिए एक वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब केंद्र से बजट आने में देरी होने की स्थिति में भी राज्य अपने संसाधनों से संरक्षण कार्यों और कर्मचारियों के मानदेय भुगतान को जारी रखने में सक्षम होगा।





