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गन्ना किसानों के लिए राहत, उन्नत बीज से लेकर दवाओं तक मिलेगी मदद

लखीमपुर। चीनी के बढ़े मूल्य और गन्ने को मिल रहे बेहतर बाजार संकेतों के बीच जिले में गन्ना उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। किसानों को गन्ने की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही उन्नत प्रजातियों के प्रमाणित बीज, कीट एवं रोग नियंत्रण की दवाएं और रेड राट जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
जिले में संचालित छह चीनी मिलों की ओर से किसानों को समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान किए जाने से भी खेती को लेकर सकारात्मक माहौल बन रहा है। अधिकारियों और चीनी मिल प्रबंधन को उम्मीद है कि समय पर भुगतान तथा बेहतर बाजार परिस्थितियों का असर अगले फसल चक्र में दिखाई देगा और किसान गन्ने का रकबा बढ़ाने की ओर आकर्षित होंगे।
समय पर भुगतान से किसानों का बढ़ रहा भरोसा
गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में फसल का समय पर भुगतान शामिल रहता है। फसल तैयार करने में बीज, खाद, सिंचाई, दवा और मजदूरी सहित कई मदों पर बड़ी रकम खर्च होती है। ऐसे में चीनी मिलों से समय पर भुगतान मिलने पर किसान अगली फसल के लिए आसानी से तैयारी कर सकते हैं।
जिले की छह चीनी मिलों द्वारा किसानों को समय से गन्ना मूल्य का भुगतान किए जाने से किसानों को आर्थिक सहूलियत मिलने की बात कही जा रही है। इसका सीधा प्रभाव अगली फसल की बुवाई पर पड़ने की संभावना है। गन्ना विभाग को उम्मीद है कि भुगतान व्यवस्था बेहतर रहने से अधिक किसान इस नकदी फसल की ओर आकर्षित होंगे।
उन्नत प्रजातियों के बीज उपलब्ध कराने की तैयारी
गन्ने का उत्पादन बढ़ाने के लिए केवल रकबा बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में वृद्धि भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों को रिसर्च स्टेशन से प्राप्त उन्नतशील प्रजातियों के प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
पुरानी और कम उत्पादन देने वाली गन्ना प्रजातियों की जगह किसानों को नई और बेहतर किस्में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्नत किस्मों का चयन क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और रोग प्रतिरोधक क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रमाणित बीज मिलने से किसानों को गुणवत्तापूर्ण फसल तैयार करने में सहायता मिल सकती है। साथ ही बेहतर प्रजातियों से प्रति इकाई क्षेत्र में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की संभावना बढ़ती है।
बीज के साथ यातायात खर्च में भी अनुदान
किसानों को उन्नत प्रजातियों के बीज उपलब्ध कराने के साथ आर्थिक सहायता देने की भी तैयारी है। किसानों को बीज मूल्य के अलावा बीज को खेत तक लाने में होने वाले यातायात व्यय में भी अनुदान दिया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों पर शुरुआती लागत का बोझ कम करना और उन्हें प्रमाणित बीज अपनाने के लिए प्रेरित करना है। कई बार दूर स्थित रिसर्च स्टेशन या अधिकृत केंद्र से बीज लाने में परिवहन पर अतिरिक्त खर्च होता है। अनुदान मिलने से यह खर्च कम हो सकेगा।
इसके जरिए विभाग का प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा किसान परंपरागत और कम उत्पादक प्रजातियों को छोड़कर उन्नत किस्मों की खेती शुरू करें।
रेड राट से बचाव पर विशेष फोकस
गन्ने की खेती में रेड राट यानी लाल सड़न रोग को गंभीर चुनौती माना जाता है। यह रोग फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकता है। संक्रमण फैलने की स्थिति में किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इसी कारण गन्ना उत्पादन बढ़ाने की योजना में रेड राट से बचाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसानों को रोग के लक्षणों की पहचान, संक्रमित पौधों से बचाव और आवश्यक उपचार की जानकारी उपलब्ध कराने की तैयारी है।
इसके अलावा कीट और अन्य रोगों के नियंत्रण के लिए जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर रहेगा। किसानों को समय रहते बीमारी की पहचान और नियंत्रण के तरीके बताए जाने से फसल नुकसान को कम किया जा सकता है।
उत्पादकता बढ़ाना बड़ी प्राथमिकता
गन्ना विकास से जुड़े प्रयासों का उद्देश्य केवल खेती का क्षेत्रफल बढ़ाना नहीं, बल्कि मौजूदा खेतों से अधिक और बेहतर गुणवत्ता वाला उत्पादन हासिल करना भी है। इसके लिए उन्नत बीज, वैज्ञानिक खेती, उचित खाद प्रबंधन, समय पर सिंचाई और कीट-रोग नियंत्रण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करने से उत्पादन लागत और उपज के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकता है। अधिक उत्पादक किस्मों के इस्तेमाल से समान क्षेत्र में ज्यादा गन्ना पैदा होने पर किसान की आय में भी वृद्धि की संभावना रहती है।
चीनी मिलों को भी मिलेगा फायदा
गन्ने का उत्पादन बढ़ने से किसानों के साथ चीनी मिलों को भी फायदा होगा। पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध होने पर मिलों को पेराई के लिए नियमित कच्चा माल मिल सकेगा। इससे पेराई सत्र को सुचारू रखने में मदद मिल सकती है।
वहीं किसानों के लिए मिलों की ओर से समय पर भुगतान जारी रहना बेहद महत्वपूर्ण होगा। भुगतान, उन्नत बीज और तकनीकी सहायता के बीच बेहतर तालमेल से जिले में गन्ना उत्पादन को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
चीनी के मौजूदा बाजार संकेतों के बीच किसानों के लिए गन्ने की खेती आकर्षक बनी रहती है तो आगामी फसल में गन्ने का रकबा बढ़ सकता है। अब विभाग का फोकस किसानों को उन्नत प्रजातियों की ओर ले जाने, रोगों से फसल को सुरक्षित रखने और प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने पर रहेगा।





