उत्तर प्रदेश

राहुल गांधी के लिए राहत भरी खबर, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Ratna Netam
5 Nov 2026 2:10 PM IST
राहुल गांधी के लिए राहत भरी खबर, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
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प्रयागराज। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सिख समुदाय को लेकर अमेरिका यात्रा के दौरान दिए गए कथित विवादित बयान के मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। इससे पहले 16 अक्टूबर को अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी कर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अब 5 नवंबर को आए फैसले से राहुल गांधी को इस कानूनी मामले में राहत मिली है।यह मामला सितंबर 2024 में राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा के दौरान सिख समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर दिए गए बयान से जुड़ा है। उनके बयान पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि कांग्रेस नेता की टिप्पणी से देश की छवि प्रभावित हुई और समुदायों के बीच गलत संदेश जाने की आशंका पैदा हुई।
दरअसल, राहुल गांधी ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान सिख समुदाय के धार्मिक अधिकारों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने पगड़ी पहनने, कड़ा धारण करने और गुरुद्वारे जाने की स्वतंत्रता का उल्लेख करते हुए देश में धार्मिक अधिकारों को लेकर सवाल उठाए थे। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में यह भी कहा था कि यह मुद्दा केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी धर्मों के लोगों की स्वतंत्रता और अधिकारों से जुड़ा हुआ है।हालांकि, उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। विरोधियों ने उनकी टिप्पणी पर आपत्ति जताई और इसे देश की धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत करने वाला बयान बताया। वहीं, राहुल गांधी की ओर से यह पक्ष रखा गया कि उनके बयान का उद्देश्य किसी समुदाय को भड़काना नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के महत्व को रेखांकित करना था।
मामले में शिकायतकर्ता नागेश्वर मिश्रा ने वाराणसी के सारनाथ थाने में राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की थी। शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद मामला विभिन्न न्यायिक प्रक्रियाओं से गुजरते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा।इससे पहले 28 नवंबर 2024 को वाराणसी की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी थी। उस समय अदालत ने कहा था कि संबंधित बयान अमेरिका में दिया गया था, इसलिए क्षेत्राधिकार से जुड़ा प्रश्न सामने आता है। निचली अदालत के इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने आगे कानूनी चुनौती दी।मामले की सुनवाई के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों और कथित बयान के आधार पर आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की वैधानिक स्थिति को लेकर भी बहस हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के समक्ष कथित टिप्पणी की गंभीरता का उल्लेख करते हुए एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच कराने की आवश्यकता बताई।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अपनी दलीलों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 का भी उल्लेख किया। यह धारा भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कुछ कृत्यों से संबंधित है। शिकायतकर्ता का पक्ष था कि राहुल गांधी के कथित बयान की कानूनी दृष्टि से जांच होनी चाहिए।याचिकाकर्ता की ओर से यह दावा भी किया गया कि राहुल गांधी के बयान के अगले दिन खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने उनकी टिप्पणी का समर्थन किया था। हालांकि, यह शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत दलील थी। किसी अन्य व्यक्ति द्वारा बयान का समर्थन किए जाने से अपने आप राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक आरोप सिद्ध नहीं होते।दूसरी ओर, राहुल गांधी ने अपने पक्ष में कहा था कि उन्होंने सिख समुदाय को किसी प्रकार के विद्रोह या हिंसक गतिविधि के लिए उकसाया नहीं था। उनका कहना था कि किसी भाषण के एक हिस्से को पूरे संदर्भ से अलग करके उसके पीछे आपराधिक मंशा नहीं मानी जा सकती।राहुल गांधी की ओर से यह भी कहा गया था कि वह सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान करते हैं। उन्होंने अपने खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था। उनके पक्ष का मुख्य तर्क यह था कि धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठाना अपने आप में आपराधिक गतिविधि नहीं है।
16 अक्टूबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामले पर सुनवाई हुई थी। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ के समक्ष दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें प्रस्तुत की थीं। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पक्ष रखा था। लगभग एक घंटे तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।अब हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, फैसले के विस्तृत लिखित आदेश में अदालत ने किन कानूनी आधारों को निर्णायक माना है, इसकी पूरी जानकारी सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राहुल गांधी के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए बयान को लेकर लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक विवाद चल रहा था। इस मामले में उनकी टिप्पणी की मंशा, उसके संदर्भ और आपराधिक कार्रवाई की मांग को लेकर अलग-अलग पक्ष सामने आए थे।फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट के ताजा निर्णय से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग स्वीकार नहीं की है। अब विस्तृत न्यायिक आदेश से यह स्पष्ट होगा कि अदालत ने शिकायतकर्ता की दलीलों और संबंधित कानूनी प्रावधानों का किस प्रकार मूल्यांकन किया है।
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