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सोनभद्र में श्रम योजना का पंजीकरण धीमा, बलिया बना नंबर-1

सोनभद्र। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना को जिले में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। योजना शुरू हुए करीब सात साल बीत चुके हैं, लेकिन सोनभद्र में अब तक पंजीकृत श्रमिकों की संख्या सात हजार का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी है। जिले में अभी तक केवल 6,995 श्रमिकों ने ही इस योजना के तहत अपना पंजीकरण कराया है। वहीं, पूर्वांचल के कई जिले इस मामले में सोनभद्र से काफी आगे हैं।
भारत सरकार ने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का उद्देश्य ऐसे श्रमिकों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है, जिनके पास नियमित पेंशन की कोई व्यवस्था नहीं होती। योजना के तहत 18 से 40 वर्ष की आयु के ऐसे असंगठित श्रमिक पात्र होते हैं, जिनकी मासिक आय 15 हजार रुपये या उससे कम होती है। निर्धारित अंशदान जमा करने के बाद 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को न्यूनतम 3 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन देने का प्रावधान है।
योजना के पात्र श्रमिकों में घरेलू कामगार, रेहड़ी-पटरी विक्रेता, रिक्शा चालक, दर्जी, मोची, कृषि श्रमिक और अन्य असंगठित क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हैं। इसके बावजूद सोनभद्र जैसे श्रमिक बहुल और आदिवासी बाहुल्य जिले में योजना के प्रति लोगों की भागीदारी काफी कम दिखाई दे रही है।
पूर्वांचल के जिलों की स्थिति पर नजर डालें तो बलिया सबसे आगे है। बलिया में 17,534 श्रमिकों ने योजना के तहत पंजीकरण कराया है। वहीं वाराणसी 16,748 पंजीकरण के साथ दूसरे स्थान पर है। आजमगढ़ में 15,213, जौनपुर में 12,713 और गाजीपुर में 11,243 श्रमिक इस योजना से जुड़े हैं। इसके मुकाबले सोनभद्र में 6,995 पंजीकरण ही हुए हैं। भदोही की स्थिति सबसे खराब है, जहां केवल 4,165 श्रमिकों का पंजीकरण दर्ज किया गया है।
जानकारों का मानना है कि सोनभद्र में योजना की धीमी प्रगति के पीछे सबसे बड़ी वजह जागरूकता की कमी है। जिले में बड़ी संख्या में श्रमिक ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहते हैं, जिन्हें सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती। इसके अलावा पंजीकरण प्रक्रिया और योजना के लाभों को लेकर भी कई श्रमिकों में भ्रम बना हुआ है।
सोनभद्र आदिवासी बाहुल्य जिला होने के कारण यहां बड़ी संख्या में लोग मजदूरी और असंगठित क्षेत्र के कार्यों पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए और गांव-गांव तक योजना की जानकारी पहुंचाई जाए तो बड़ी संख्या में श्रमिक इससे जुड़ सकते हैं।
अधिकारियों का मानना है कि पंचायत स्तर पर अभियान चलाकर पात्र श्रमिकों को योजना से जोड़ने की जरूरत है। श्रमिकों को यह समझाने की आवश्यकता है कि छोटी-छोटी मासिक राशि जमा करके वे अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं। डिजिटल माध्यमों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर शिविर लगाकर भी पंजीकरण बढ़ाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बन सकती है। लेकिन सोनभद्र में कम पंजीकरण यह संकेत देता है कि योजना की जानकारी और पहुंच बढ़ाने के लिए अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। यदि प्रशासन और संबंधित विभाग सक्रिय होकर अभियान चलाते हैं तो आने वाले समय में जिले के हजारों और श्रमिक इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।





