उत्तर प्रदेश

यूपी में ब्लड बैंकों की पोल खुली, 14 सेंटर बंद

Kavita2
31 Oct 2026 9:17 AM IST
यूपी में ब्लड बैंकों की पोल खुली, 14 सेंटर बंद
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मरीजों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने के दावों के बीच खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की विशेष जांच में कई चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रदेश में चैरिटेबल ट्रस्ट और सोसाइटी द्वारा संचालित ब्लड सेंटरों की जांच के दौरान कहीं अनिवार्य एलिजा (ELISA) परीक्षण की जगह रैपिड किट का इस्तेमाल किया जा रहा था, तो कहीं खराब डीप फ्रीजर में रक्त और उसके घटक रखे मिले। कई केंद्रों पर चिकित्सक और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी भी अनुपस्थित पाए गए। इन गंभीर खामियों को देखते हुए विभाग ने अब तक 14 ब्लड सेंटरों में रक्त संग्रह, परीक्षण, प्रसंस्करण और वितरण संबंधी गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस कार्रवाई से प्रदेश में संचालित निजी और चैरिटेबल ब्लड सेंटरों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, एफएसडीए ने प्रदेश के 31 जिलों में 81 ब्लड सेंटरों का औचक निरीक्षण किया। पहले चरण में 10 जिलों के 40 केंद्रों की जांच की गई थी, जिसमें सात केंद्रों पर गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद उनका संचालन रोक दिया गया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और सात अन्य केंद्रों पर भी प्रतिबंध लगाया गया। इस तरह अब तक कुल 14 ब्लड सेंटरों की गतिविधियों पर रोक लगाई जा चुकी है। विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य मरीजों को असुरक्षित रक्त चढ़ाए जाने की आशंका को कम करना और रक्त संग्रहण तथा वितरण की पूरी प्रक्रिया को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करना है।

जांच में सबसे गंभीर मामला रक्त की संक्रमण संबंधी स्क्रीनिंग से जुड़ा सामने आया। कुछ ब्लड सेंटरों में आवश्यक एलिजा परीक्षण की जगह रैपिड किट का इस्तेमाल किया जा रहा था। रक्तदान के बाद एकत्रित रक्त की संक्रमण संबंधी जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसके माध्यम से रक्त के जरिए फैलने वाले संक्रमणों के जोखिम को कम किया जाता है। निर्धारित परीक्षण प्रक्रिया का पालन नहीं होने से मरीजों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, रक्त जांच में लापरवाही विशेष रूप से उन मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, जिन्हें ऑपरेशन, दुर्घटना, प्रसव या गंभीर बीमारियों के उपचार के दौरान रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है।

जांच के दौरान रक्त और उसके घटकों के भंडारण में भी बड़ी लापरवाही सामने आई। बिजनौर के एक ब्लड सेंटर में माइनस 80 डिग्री सेल्सियस पर संचालित होने वाले डीप फ्रीजर का तापमान 26.7 डिग्री सेल्सियस पाया गया। यह अंतर रक्त घटकों की सुरक्षित भंडारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। रक्त और प्लाज्मा जैसे घटकों को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखना आवश्यक होता है। तापमान नियंत्रण की व्यवस्था खराब होने से रक्त घटकों की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहता है।

अमरोहा स्थित जीवन-24 चैरिटेबल ब्लड सेंटर में निरीक्षण के दौरान संक्रमण संबंधी स्क्रीनिंग के लिए रैपिड किट का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। यहां एलिजा और स्टेरिलिटी परीक्षण से संबंधित कमियां भी पाई गईं। इतना ही नहीं, ब्लड कंपोनेंट रूम में फंगस की मौजूदगी और इमरजेंसी किट में एक्सपायर्ड दवाएं मिलने की जानकारी भी सामने आई। ऐसी परिस्थितियां रक्त केंद्रों में स्वच्छता, गुणवत्ता नियंत्रण और आपातकालीन तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ाती हैं।

बुलंदशहर के डिबाई चैरिटेबल ब्लड सेंटर में निरीक्षण के दौरान मेडिकल ऑफिसर और तकनीकी कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। वहां रक्त के स्टॉक और अन्य अभिलेखों के रखरखाव में भी अनियमितताएं सामने आईं। इसी तरह जौनपुर के बदलापुर चैरिटेबल ब्लड सेंटर में आवश्यक स्टाफ की अनुपस्थिति के साथ एलिजा स्क्रीनिंग, स्टेरिलिटी परीक्षण और अन्य जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। यहां रेफ्रिजरेटर का तापमान दर्ज करने वाला उपकरण भी खराब पाया गया।

जांच टीमों ने केवल रक्त परीक्षण और भंडारण व्यवस्था ही नहीं, बल्कि रक्तदाताओं का रिकॉर्ड, रक्त प्राप्त करने वाले मरीजों का विवरण, स्टॉक रजिस्टर, तापमान नियंत्रण, रक्तदान शिविरों की अनुमति और निर्धारित शुल्क से संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की। कुछ केंद्रों पर जरूरी रजिस्टर अधूरे मिले, जबकि कई स्थानों पर रक्त प्राप्तकर्ताओं की पूरी जानकारी दर्ज नहीं की जा रही थी। इससे रक्त की प्रत्येक यूनिट का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर उसकी जानकारी प्राप्त करने की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

एफएसडीए के अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं मिलने वाले केंद्रों में रक्त और रक्त घटकों से जुड़ी गतिविधियां तत्काल बंद कराई गई हैं। जिन केंद्रों में कमियां पाई गई हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। संबंधित केंद्रों को स्पष्टीकरण देना होगा कि निर्धारित मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया। जिन केंद्रों का संचालन रोका गया है, वहां उपलब्ध रक्त और रक्त घटकों के नियमानुसार सुरक्षित निस्तारण के निर्देश भी दिए गए हैं।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। रक्त केंद्रों के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की मौजूदगी, नियमित जांच, स्वच्छता और तापमान नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं का पालन करना आवश्यक है। निरीक्षण के दौरान इन मानकों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित केंद्रों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे मामले ने प्रदेश में रक्तदान और रक्त वितरण व्यवस्था की निगरानी को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे शहरों में कई मरीज आपातकालीन स्थिति में उपलब्ध ब्लड सेंटरों पर निर्भर रहते हैं। दुर्घटनाओं में घायल लोगों, गर्भवती महिलाओं, थैलेसीमिया के मरीजों और गंभीर ऑपरेशन कराने वाले लोगों के लिए समय पर सुरक्षित रक्त मिलना बेहद जरूरी होता है।

हालांकि, जांच में अनियमितताएं मिलने का अर्थ यह नहीं है कि इन केंद्रों से वितरित प्रत्येक रक्त यूनिट संक्रमित या असुरक्षित थी। लेकिन निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन नहीं होना अपने आप में गंभीर चिंता का विषय है।

अब एफएसडीए की विशेष जांच के बाद अन्य ब्लड सेंटरों की कार्यप्रणाली पर भी निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि विशेष निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेगा। इस कार्रवाई का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश में जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचने वाला रक्त सुरक्षित, जांचा-परखा और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो।

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