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सांपों का दोस्त है रतन, फनधारी विषधरों को हाथों से पकड़कर देता है नई जिंदगी

मिर्जामुराद। बारिश का मौसम शुरू होते ही ग्रामीण इलाकों में सांपों के निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। सांप का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है। फन फैलाए जहरीले सांप को देखकर लोग घबरा जाते हैं और उससे दूरी बनाने लगते हैं। लेकिन इसी डर के बीच एक ऐसा शख्स भी है, जो इन विषधर जीवों को अपना दोस्त मानता है।
जहां आम लोग सांपों को देखकर डर के मारे पीछे हट जाते हैं, वहीं रतन नाम का यह व्यक्ति फुंफकार मारते और फन फैलाए सांपों को बेहद सहजता से पकड़ लेता है। सांपों के प्रति उसके इस अनोखे लगाव और साहस को देखकर ग्रामीण भी हैरान रह जाते हैं।
रतन को इलाके में सांपों का दोस्त कहा जाता है। जहरीले सांपों को पकड़ने का उसका तरीका लोगों के लिए किसी हैरानी से कम नहीं है। जब किसी घर, खेत या आसपास के इलाके में सांप निकलने की सूचना मिलती है तो लोग डर जाते हैं, लेकिन रतन मौके पर पहुंचकर बिना घबराए सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ लेता है।
ग्रामीणों के अनुसार, रतन सांपों को नुकसान पहुंचाने के बजाय उनकी जान बचाने का काम करता है। वह जहरीले सांपों को पकड़कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ देता है, ताकि इंसानों और सांप दोनों की जान बच सके।
सांपों को लेकर समाज में कई तरह की मान्यताएं हैं। सनातन धर्म में सांपों को भगवान शिव से जुड़ा माना जाता है। भगवान शिव के गले में विराजमान नाग को श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि नाग पंचमी के पर्व पर लोग नाग देवता की पूजा करते हैं और दूध-लावा चढ़ाने की परंपरा निभाते हैं।
हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सांप प्रकृति के लिए बेहद महत्वपूर्ण जीव माने जाते हैं। वे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। खेतों में चूहों और अन्य हानिकारक जीवों की संख्या को नियंत्रित करने में सांप मददगार होते हैं।
रतन का कहना है कि सांपों को बिना वजह मारना गलत है। ज्यादातर सांप इंसानों पर हमला नहीं करते, बल्कि खतरा महसूस होने पर अपनी सुरक्षा के लिए प्रतिक्रिया देते हैं। इसलिए उन्हें पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ना चाहिए।
ग्रामीण बताते हैं कि जब रतन सांप पकड़ने पहुंचता है तो कई बार बेहद खतरनाक स्थिति होती है। फन फैलाए सांप तेजी से हमला करने की कोशिश करते हैं, लेकिन रतन पूरी सावधानी और अनुभव के साथ उन्हें नियंत्रित कर लेता है।
उसके इस काम को देखकर कई बार लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जहां लोग जहरीले सांप के करीब जाने से भी डरते हैं, वहीं रतन उन्हें आसानी से पकड़ लेता है। उसकी हिम्मत और अनुभव ने उसे इलाके में अलग पहचान दिलाई है।
हालांकि सांप पकड़ने का काम बेहद जोखिम भरा होता है। थोड़ी सी गलती भी जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सांप पकड़ने वाले लोगों को भी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए और बिना प्रशिक्षण के ऐसे काम करने से बचना चाहिए।
रतन अपने अनुभव के दम पर सांपों को पहचानने और उनके व्यवहार को समझने में सक्षम है। वह जानता है कि कौन सा सांप कितना खतरनाक हो सकता है और उसे किस तरह सुरक्षित तरीके से पकड़ा जा सकता है।
बारिश के मौसम में सांप अक्सर बिलों से बाहर निकल आते हैं। पानी भरने या मौसम में बदलाव के कारण वे सूखे और सुरक्षित स्थान की तलाश में घरों, खेतों और आसपास के इलाकों में पहुंच जाते हैं। ऐसे समय में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
वन्यजीव विशेषज्ञ भी लोगों से अपील करते हैं कि सांप दिखने पर उसे मारने के बजाय वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें। इससे मानव जीवन के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
रतन जैसे लोग सांपों और इंसानों के बीच संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका प्रयास न केवल सांपों की जान बचाता है, बल्कि लोगों को भी जागरूक करता है कि हर सांप खतरनाक नहीं होता और प्रकृति के हर जीव का अपना महत्व है।
नाग पंचमी जैसे पर्वों पर जहां लोग सांपों के प्रति धार्मिक आस्था व्यक्त करते हैं, वहीं रतन जैसे लोग अपने काम से यह संदेश देते हैं कि जीवों के प्रति दया और संरक्षण की भावना भी जरूरी है।
ग्रामीणों के लिए रतन केवल सांप पकड़ने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि उन जीवों का रक्षक है जिन्हें देखकर अधिकतर लोग डर जाते हैं। उसके साहस और सेवा भाव के कारण ही लोग उसे सांपों का सच्चा दोस्त मानते हैं।





