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राप्ती नदी खतरे के निशान से 41 सेंटीमीटर ऊपर, बढ़त की रफ्तार हुई धीमी

गोरखपुर। नेपाल से लगातार आ रहे पानी के कारण राप्ती नदी के जलस्तर में शुक्रवार को भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। शुक्रवार सुबह आठ बजे बर्डघाट पर राप्ती नदी खतरे के निशान से 41 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। हालांकि राहत की बात यह है कि नदी के बढ़ने की रफ्तार अब काफी धीमी हो गई है। पिछले 16 घंटे में राप्ती का जलस्तर केवल चार सेंटीमीटर बढ़ा है, जिससे प्रशासन और नदी किनारे रहने वाले लोगों को कुछ राहत मिली है।
राप्ती नदी का जलस्तर पिछले कई दिनों से नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश और वहां से आने वाले पानी के कारण बढ़ रहा है। लगातार पानी आने से नदी ने खतरे के निशान को पार कर लिया था। शुक्रवार सुबह तक नदी बर्डघाट में खतरे के स्तर से 41 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुकी थी। हालांकि जिस तेजी से पहले जलस्तर बढ़ रहा था, अब उस पर कुछ हद तक विराम लगा है।
जलस्तर के आंकड़ों के मुताबिक, 16 घंटे के दौरान राप्ती नदी में केवल चार सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है। इससे संकेत मिल रहा है कि ऊपर के क्षेत्रों से आने वाले पानी का दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसके बावजूद नदी अभी खतरे के निशान से ऊपर है, इसलिए प्रशासन सतर्कता बनाए हुए है।
राप्ती के जलस्तर पर सरयू नदी की स्थिति का भी सीधा असर पड़ रहा है। सरयू नदी के जलस्तर में कमी आनी शुरू हो गई है, लेकिन बरहज में यह अभी भी खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर बह रही है। यही कारण है कि राप्ती नदी का पानी तेजी से नीचे नहीं जा पा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार जब सरयू का जलस्तर अधिक रहता है तो राप्ती का पानी आगे निकलने में बाधा महसूस करता है। इससे राप्ती का जलस्तर लंबे समय तक ऊंचा बना रह सकता है। जैसे ही सरयू नदी का जलस्तर पर्याप्त रूप से नीचे आएगा, राप्ती नदी के पानी की निकासी तेज होगी और इसके स्तर में भी गिरावट शुरू हो सकती है।
बड़हलगंज क्षेत्र के पटनाघाट के पास राप्ती नदी का पानी सरयू से मिलता है। इसके बाद यह जलधारा बरहज की ओर बढ़ती है और आगे बलिया जिले के तुर्तीपार के पास गंगा नदी में मिल जाती है। इस पूरे जलप्रवाह तंत्र में किसी एक नदी का जलस्तर बढ़ने या घटने का असर दूसरी नदी पर भी दिखाई देता है।
बरहज में सरयू के खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर बहने के कारण फिलहाल राप्ती की निकासी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। जलस्तर में गिरावट शुरू होने के बावजूद स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती। नदी किनारे बसे इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत बनी हुई है।
प्रशासन की ओर से नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। बर्डघाट समेत विभिन्न माप केंद्रों से नियमित अंतराल पर जलस्तर के आंकड़े लिए जा रहे हैं। इसके आधार पर संभावित बाढ़ की स्थिति और नदी के आसपास के गांवों पर पड़ने वाले असर का आकलन किया जा रहा है।
राप्ती नदी के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण निचले इलाकों में जलभराव और खेतों में पानी पहुंचने की आशंका बनी हुई है। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को नदी के पास न जाने और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
नेपाल से आने वाली नदियों में मानसून के अंतिम दौर में भी अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति बन सकती है। नेपाल के पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में बारिश होने पर कुछ ही समय में इसका असर उत्तर प्रदेश की राप्ती, रोहिन और अन्य नदियों पर दिखाई देने लगता है। इसी कारण सीमावर्ती और पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में नदी के स्तर पर विशेष निगरानी रखी जाती है।
फिलहाल राप्ती की बढ़त धीमी होना राहत का संकेत जरूर है, लेकिन सरयू नदी के ऊंचे जलस्तर के कारण पूरी तरह राहत की स्थिति अभी नहीं बनी है। जब तक बरहज में सरयू खतरे के निशान से नीचे नहीं आती, तब तक राप्ती के जलस्तर में तेज गिरावट की संभावना कम मानी जा रही है।
प्रशासन के लिए आने वाले कुछ घंटे महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि नेपाल से आने वाले पानी की मात्रा कम होती है और सरयू के स्तर में गिरावट जारी रहती है, तो राप्ती का जलस्तर भी कम होना शुरू हो सकता है। दूसरी ओर यदि ऊपरी क्षेत्रों में फिर बारिश होती है तो स्थिति में बदलाव भी संभव है।
नदी किनारे के ग्रामीण इलाकों में लोगों की नजर लगातार जलस्तर पर बनी हुई है। किसानों को भी चिंता है कि यदि पानी लंबे समय तक खेतों में ठहरा रहा तो फसलों को नुकसान हो सकता है। हालांकि राप्ती की बढ़त की रफ्तार धीमी होने से उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में स्थिति में सुधार हो सकता है।
शुक्रवार सुबह आठ बजे तक बर्डघाट में राप्ती नदी खतरे के निशान से 41 सेंटीमीटर ऊपर थी। पिछले 16 घंटे में इसमें केवल चार सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं बरहज में सरयू अभी भी खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर बह रही है। ऐसे में राप्ती का जलस्तर कम होने के लिए सरयू के और नीचे आने का इंतजार किया जा रहा है।
फिलहाल प्रशासन ने नदी किनारे के क्षेत्रों में निगरानी जारी रखी है और लोगों से सतर्क रहने को कहा है। स्थिति में सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन जब तक दोनों नदियों का जलस्तर सामान्य नहीं हो जाता, तब तक एहतियात जरूरी रहेगा।





