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दुष्कर्म पीड़िता से बनीं मिसाल, एक डॉक्टर और चार बेटियां बनीं शिक्षक

मुरादाबाद। दुष्कर्म जैसी दर्दनाक घटना किसी भी पीड़िता के जीवन को गहरे तक प्रभावित कर सकती है। ऐसी घटनाओं के बाद सामाजिक ताने, मानसिक तनाव और भविष्य को लेकर चिंता कई बार पीड़िताओं को कमजोर कर देती है, लेकिन मुरादाबाद की पांच बेटियों ने इस दर्द को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। उन्होंने हिम्मत, परिवार के सहयोग और सही मार्गदर्शन के सहारे न सिर्फ अपनी जिंदगी को दोबारा संवारा, बल्कि आज दूसरी पीड़िताओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
इन पांचों महिलाओं में से चार सरकारी स्कूलों में शिक्षिका बन चुकी हैं, जबकि एक युवती विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई कर डॉक्टर बनने की राह पर आगे बढ़ रही है। कभी डर और खामोशी में रहने वाली ये बेटियां अब आत्मनिर्भर हैं और समाज में सम्मान के साथ अपनी पहचान बना रही हैं।
इनकी सफलता के पीछे परिवार का भरोसा, मिशन शक्ति केंद्र की काउंसलिंग और खुद को संभालने की मजबूत इच्छाशक्ति रही। पुलिस और मनोवैज्ञानिकों की मदद से इन पीड़िताओं ने धीरे-धीरे अपने डर को पीछे छोड़ा और शिक्षा को अपनी ताकत बनाया।
मुरादाबाद के पाकबड़ा क्षेत्र की एक किशोरी के साथ वर्ष 2019 में दुष्कर्म की घटना हुई थी। घटना के बाद वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गई थी। आरोपित की धमकियों और समाज के डर ने उसका आत्मविश्वास खत्म कर दिया था। लेकिन मिशन शक्ति केंद्र में शुरू हुई काउंसलिंग ने उसकी सोच बदलने में अहम भूमिका निभाई। महिला पुलिसकर्मी और मनोवैज्ञानिकों से बातचीत के दौरान उसने अपने मन की परेशानियां साझा कीं।
परिवार ने भी उसका लगातार साथ दिया और उसे भरोसा दिलाया कि एक घटना उसके पूरे जीवन का फैसला नहीं कर सकती। इसके बाद उसने दोबारा पढ़ाई शुरू की और डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए मेहनत की। उसने नीट परीक्षा पास की और जॉर्जिया के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में प्रवेश लिया। अब वह डॉक्टर बनने की तैयारी कर रही है।
इसी तरह मूंढापांडे क्षेत्र की एक युवती ने भी मुश्किल परिस्थितियों से लड़कर सफलता हासिल की। 12वीं के बाद उच्च शिक्षा का सपना देखने वाली इस युवती के साथ प्रेम का झांसा देकर दुष्कर्म किया गया था। घटना के बाद उसका आत्मविश्वास टूट गया और उसने लोगों से मिलना-जुलना तक बंद कर दिया था।
मिशन शक्ति केंद्र की काउंसलिंग और परिवार के समर्थन से उसने दोबारा पढ़ाई शुरू की। शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने के बाद वर्ष 2022 में वह सरकारी विद्यालय में शिक्षिका बन गई। आज वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है और अन्य पीड़िताओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
बिलारी क्षेत्र की एक अन्य युवती की कहानी भी संघर्ष और सफलता की मिसाल है। कम उम्र में उसके साथ हुई घटना के बाद उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया था और पढ़ाई भी छोड़ दी थी। लेकिन लगातार काउंसलिंग के बाद उसके अंदर फिर से आत्मविश्वास आया। उसने पढ़ाई पूरी की और वर्ष 2022 में सरकारी शिक्षक बन गई। अब वह अपने परिवार की जिम्मेदारी संभालने के साथ जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क शिक्षा भी दे रही है।
इनके अलावा दो अन्य युवतियों ने भी इसी तरह कठिन हालात का सामना करते हुए शिक्षा पूरी की और सरकारी नौकरी हासिल की। आज ये सभी महिलाएं न केवल अपने पैरों पर खड़ी हैं, बल्कि न्याय की लड़ाई भी मजबूती से लड़ रही हैं।
मनोविज्ञानी डॉ. रीना तोमर के अनुसार, दुष्कर्म जैसी घटना के बाद पीड़िता को सबसे ज्यादा जरूरत भावनात्मक सहयोग और विश्वास की होती है। समय पर मिली काउंसलिंग और परिवार का साथ उन्हें दोबारा सामान्य जीवन में लौटने की ताकत देता है।
मुरादाबाद में मिशन शक्ति केंद्रों के माध्यम से दुष्कर्म और छेड़छाड़ जैसे मामलों में पीड़िताओं को मानसिक सहायता और परामर्श दिया जाता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर पीड़िताओं की बार-बार काउंसलिंग कर उन्हें मजबूत बनाया जाता है।
इन पांच महिलाओं की कहानी बताती है कि कठिन परिस्थितियां जीवन को रोक नहीं सकतीं। हिम्मत, शिक्षा और सही सहयोग के बल पर कोई भी व्यक्ति अपने अतीत को पीछे छोड़कर नई शुरुआत कर सकता है।





